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जानें, क्यों उत्तर प्रदेश में ‘महागठबंधन’ विफल होगा?

Published At: Wednesday, 13 March, 2019 Last Modified: Wednesday, 13 March, 2019

सुभाष ढल
सामाजिक कार्यकर्ता।।

2019 आम चुनाव का आगाज हो चुका है, जो नए भारत की दिशा और दशा तय करेगा। सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारियों को यहां समर में उतरने से पूर्व अंतिम रूप दे रहे हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य सत्ता की दहलीज तक पहुंचना है। चूंकि केंद्र की सत्ता उत्तर प्रदेश के गलियारे से होकर ही गुजरती है। अतः इस किले को भाजपा अथवा अन्य दलों को फतह करना अत्यंत आवश्यक है। राज्य में मुकाबला अत्यंत रोचक है, जो भाजपा एवं महागठबंधन के बीच होगा। सपा-बसपा एवं लोक दल महागठबंधन में समाहित है। महागठबंधन ने कांग्रेस से अपनी दूरी बनाई हुई है, जबकि कांग्रेस महागठबंधन का हिस्सा बनना चाहती थी।

इसलिए भाजपा एवं महागठबंधन का सीधा मुकाबला तय है। वहीं, संघर्ष को त्रिकोण बनाने के लिए कांग्रेस ने अपने दो योद्धा ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रियंका गांधी को शस्त्रों से सुसज्जित कर सूबे में भेज दिया है। उत्तर प्रदेश का चुनाव ही नरेंद्र मोदी के भविष्य का निर्धारण करेगा। यदि भाजपा को पुनः सत्तारूढ़ होना है तो उत्तर प्रदेश का चुनाव जीतना भाजपा को आवश्यक ही नहीं, अपरिहार्य भी है। महागठबंधन को केवल मोदी नेतृत्व ही भेद पाएगा?  ऐसा प्रश्न राजनीतिक विश्लेषकों के मन में भी है। भाजपा इस महागठबंधन के समक्ष चुनौतियों को कैसे प्रस्तुत करेगी? यह तो समर में उतरने के बाद ही पता चलेगा। किंतु साम दाम दंड भेद की नीति इस समर में देखने को मिलेगी। कुटिलता की पराकाष्ठा चुनाव प्रचार के दौरान तय है। किंतु भाजपा के मैनेजर हर सूरत में महागठबंधन के दलों में वोटरों का स्थानांतरण नहीं होने दिए जाने के प्रयासों में अपनी कूटनीति का सफल प्रयोग कर सकते हैं। किसी भी सूरत में अखिलेश का वोट मायावती को न जाए, और मायावती का वोट अखिलेश को न जाए।

इस दिशा में भाजपा की तैयारी चल रही हैं, ऐसा लगता है। चुनाव को हिंदू बनाम मुस्लिम। जाटव, दलित, यादव, अन्य पिछड़ा वर्ग, पिछड़ा वर्ग आदि को हवा देकर अपने पक्ष में चुनाव किए जाने की दिशा में युद्ध स्तर पर कार्य कर सकती है। सपा से बागी शिवपाल सिंह भाजपा के लिए कितने लाभदायक होते हैं, भाजपा इसका प्रयोग करने में भी नहीं चूकेगी। एक ही नीति होगी भाजपा की, वे हर प्रकार से सपा तथा बसपा के वोटों को स्थानांतरण को रोकने के लिए मोदी ब्रह्मास्त्र का भी प्रयोग करेगी, यह भी तय है। मोदी की ताकत से संपूर्ण विपक्ष हताश है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ क्या खेल खेलते हैं, यह समय बताएगा? योगी आदित्यनाथ किसी भी खेल को खेलने में नहीं झिझकेंगे। हिंदुत्व के मुद्दे को तथा एयर स्ट्राइक को पूरी तरीके से इस चुनाव में हावी होने की पूर्ण संभावना है। राहुल गांधी के नेतृत्व को उत्तर प्रदेश में निखारने की कवायद चल रही है। उनकी ‘पप्पू’ छवि को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है, जो सोशल मीडिया पर पर हो रहा है। राहुल को छोटा भाषण दिए जाने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि वह अक्सर ऐसी गलती कर जाते हैं, जहां उत्तर देने में कांग्रेस के प्रवक्ता असहज हो जाते हैं।

शहीद परिवारों में गहरा रोष स्वभाविक है, इस दिशा में जिस प्रकार से नरेंद्र मोदी ने एयर स्ट्राइक कर भारत के जनमानस विशेष तौर पर शहीदों के परिवारों में जो अपनी पैठ बनाई है, उससे इनकार नहीं किया जा सकता। चुनाव में इसका पूरा लाभ भाजपा लेना चाहेगी। इस विषम स्थिति में क्या कांग्रेसी उत्तर प्रदेश में अपनी दमदार उपस्थिति प्रस्तुत करेगी?  सबसे मुख्य बात यह है अथवा यह कहें कि हमारा यह स्पष्ट मानना है कि उत्तर प्रदेश में जिन योद्धाओं को भेजा गया है, वह चुनाव के दौरान कोई खास परिवर्तन कर सकेंगे? ऐसे लगता नही है। महज चुनावी हुंकार से वोट नहीं मिलता है। वोट के लिये जनता से निरन्तर संवाद आवश्यक है। जिसमें कांग्रेस का होम वर्क अधूरा है। प्रोपेगेंडा करके वह यहां से चले जाएंगे। अगर कांग्रेस की स्थिति का सही मूल्यांकन किया जाए तो महागठबंधन अगर रायबरेली और अमेठी में अपने प्रत्याशी खड़े कर दे तो इनका जीतना मुश्किल ही नहीं, असंभव होगा। यह तय है कि उत्तर प्रदेश में मुख्य मुकाबला भाजपा तथा महागठबंधन में होगा। भाजपा यदि इस समर में अपने को प्रतिष्ठापित करने में सफल होती है तो संपूर्ण भारतीय राजनीति मोदीमय हो जाएगी।



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