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बिहार और बिहारियों को तुच्छ समझ अपमानित वाले इसे जरूर पढ़ें...

Friday, 23 March, 2018

अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धि के बावजूद बिहार प्रति व्यक्ति आय के मामले में पिछड़ा हुआ है। बिहार आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली की समस्या से जूझ रहा है। बिहार के अधिकांश लोग कृषि से जीवनयापन करते हैं लेकिन एक बड़ा इलाका हर साल बाढ़ में डूबता है। ये कहा प्रभात खबर में छपे अपने संपादकीय में प्रधान संपादक आशुतोष चतुर्वेदी ने। उनका पूरा संपादकीय आप यहां पढ़ सकते हैं-

बिहार की गौरवशाली परंपरा 

एक राज्य के रूप में अस्तित्व में आये हुए बिहार को 106 साल पूरा होने जा रहा है। यह हम सबके लिए गौरव की बात है। लेकिन, देश में बिहार के लोगों की जैसी इज्जत होनी चाहिए, वैसी नहीं है। कुछेक राज्यों में बिहार के लोगों को बिहारी कह कर अपमानित करने की कोशिश की जाती है।  

दरअसल, लोगों को बिहार की सैकड़ों साल पुरानी गौरवशाली परंपरा का भान नहीं है। यह मौका है बिहार की गौरवशाली परंपरा को याद करने और युवा पीढ़ी को इसका एहसास कराने का।  

बिहार का इतिहास चार से साढ़े चार हजार साल पुराना है। सारण जिले का चिरांद गांव को बिहार की सबसे पुरानी बस्ती मानी जाती है, जहां से बिहार के अस्तित्व की कहानी शुरू होती है और देश-दुनिया में फैलती है। इस कहानी में फिर गौतम बुद्ध जैसे नाम आते हैं जिनके अनुयायी पूरी दुनिया में फैले हैं। महावीर जैसे विचारक आते हैं जिनके द्वारा स्थापित जैन संप्रदाय देश का एक प्रमुख धर्म है। यह 24 जैन तीर्थंकरों की कर्मभूमि रही है। सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह का जन्म पटना में हुआ था।  

आज भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में सिख धर्मावलंबी उनके जन्म स्थान पर मत्था टेकने आते हैं। बिहार का उल्लेख वेदों, पुराणों में मिलता है। ईसा पूर्व काल में इस क्षेत्र पर बिम्बिसार, पाटलिपुत्र की स्थापना करने वाले उदयन, चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक सहित मौर्य, शुंग तथा कण्व राजवंश के नरेशों ने राज किया।  

इसके पश्चात कुषाण शासकों का समय आया और बाद में गुप्त वंश के चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने बिहार पर राज किया। मध्यकाल में मुस्लिम शासकों का इस क्षेत्र पर अधिकार रहा। राजा विशाल का गढ़, जिसे आज वैशाली के रूप में जाना जाता है, वहां गणतंत्र ने पहली बार आकार ग्रहण किया था। साढ़े सात हजार से अधिक  प्रतिनिधि मिलकर पूरे इलाके का शासन चलाते थे। कहा जाता है कि दुनिया में लोकतंत्र यूरोप से आया।  

लेकिन, यूरोप से पहले हमें वैशाली में लोकतांत्रिक व्यवस्था का उदाहरण मिलता है। इसके बाद मगध के इर्द-गिर्द एक सत्ता केंद्र विकसित होने लगा, बृहद्रथ के वक्त से, अजातशत्रु उसे बढ़ाते हैं, फिर महापद्मनंद और फिर चाणक्य और चंद्रगुप्त की जोड़ी एक ऐसे मौर्य वंश की नींव डालती है, जो पूरे भारत के इलाके में फैलने लगती है। फिर अशोक जैसा राजा आता है जो प्रेम से दुनिया को जीतने की बात करता है और दुनिया भर में अपने दूत भेजता है। गुप्तकाल के रूप में भारत का स्वर्णयुग भी बिहार के मगध से ही संचालित होता है।  

यहां जनक जैसे राजा होते हैं और याज्ञवल्क्य जैसे विचारक। मैत्रेयी और गार्गी जैसी विदुषी महिलाएं बिहार से ही आती हैं। मिथिला में शंकराचार्य से मंडन मिश्र की पत्नी भारती शास्त्रार्थ करती हैं। यहां चाणक्य, वात्स्यायन, आर्यभट्ट, चरक, नागार्जुन जैसे विद्वान समय-समय पर जन्म लेते हैं और देश और दुनिया को अपने विचारों से दिशा देते हैं। नालंदा, विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालय खड़े होते हैं और दुनिया भर से छात्र यहां खिंचे चले आते हैं।  

यहीं के कवि विद्यापति अपने मधुर गीतों से जनमानस के हृदय में प्रेम जगाते हैं। कुंवर सिंह अंग्रेजों के खिलाफ गदर कर उनका जीना हराम कर देते हैं।  

इसी बिहार में कादंबिनी गांगुली जैसी महिला का जन्म होता है जो देश ही नहीं बल्कि पूरे ब्रिटिश साम्राज्य की पहली महिला ग्रेजुएट बनती है। रुकैया मुस्लिम छात्राओं के लिए स्कूल खोलती हैं। फिर सच्चिदानंद सिन्हा, महेश नारायण जैसे लोग आते हैं जो बिहारियों के बीच अस्मिता जगाते हैं। नील किसानों को न्याय दिलाने के लिए राजकुमार शुक्ल मोहनदास करमचंद गांधी को चंपारण खींच लाते हैं और सत्याग्रह का अनूठा प्रयोग होता है। बिहार आकर गांधी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी आवाज उठाते हैं और इसी धरती से वह गांधी से महात्मा बनते हैं।  

बिहार की माटी के सपूत डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बनते हैं। जयप्रकाश नारायण यहीं से इमरजेंसी के खिलाफ बिगुल फूंकते हैं। यहीं से शुरुआत होती है मंदिरों में दलितों को पुजारी बनाने की। देश को लेखक, विचारक, प्रशासक, और मेधावी युवक उपलब्ध कराने का सिलसिला आज भी जारी है। जमींदारी उन्मूलन और पंचायतों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने का कानून बिहार में लागू होता है। बाद में उसे पूरा देश अपनाता है। आशय यह कि बिहार का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है।

लेकिन, यह भी सच है कि मौजूदा दौर में बिहार के समक्ष अनेक चुनौतियां भी हैं। बिहार को अभी बुनियादी समस्याओं को हल करने का कार्यभार पूरा करना है।  

अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धि के बावजूद बिहार प्रति व्यक्ति आय के मामले में पिछड़ा हुआ है। बिहार आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली की समस्या से जूझ रहा है। बिहार के अधिकांश लोग कृषि से जीवनयापन करते हैं लेकिन एक बड़ा इलाका हर साल बाढ़ में डूबता है। कोसी, मिथिला और सीमांचल के इलाके को बाढ़ से मुक्ति का इंतजार है। अगर इससे मुक्ति मिल जाये तो इस पूरे इलाके की तस्वीर बदल सकती है। देश का कोई कोना नहीं है जहां बिहार के लोग नहीं रहते हैं। लेकिन महाराष्ट्र, कर्नाटक, असम, जम्मू कश्मीर जैसे कई राज्यों की घटनाएं हमारे सामने हैं, जहां बिहार के लोगों को अपमानित किया गया। हमें बिहार में ही शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने होंगे ताकि लोगों को बाहर जाने की जरूरत ही न पड़े।  

आज हर साल दिल्ली और दक्षिण के राज्यों में पढ़ने के लिए बिहार के हजारों बच्चे जाते हैं। साथ ही राजस्थान के कोटा में बिहार और झारखंड के हजारों बच्चे कोचिंग के लिए जाते हैं। आज जरूरत है कि हम ऐसा ढांचा विकसित करें कि हमारे बच्चों को पढ़ाई और कोचिंग के लिए बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े। स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा एक-दूसरे के पूरक हैं। आज जरूरत है कि स्कूली शिक्षा को लेकर किये गये प्रयास को उच्च शिक्षा की बेहतरी के लिए भी लागू किया जाये।

दूसरा, बिहार ऐतिहासिक धरोहरों, धर्म, अध्यात्म और संस्कृति का केंद्र रहा है। यहां की परंपराएं, संस्कृति, रीति-रिवाज और पर्व-त्योहार पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं। राजगीर, नालंदा, वैशाली, बोधगया, पावापुरी जैसी लंबी सूची है। बोधगया तो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का केंद्र है।

पर्यटन के क्षेत्र में काम हुआ है लेकिन इस पर और ध्यान दिये जाने की जरूरत है। मेरा मानना है कि बिहार और झारखंड दो सहोदर भाई है। दोनों मिलकर विकास का नया मॉडल स्थापित कर सकते हैं। बिहार के पास उद्योग नहीं है, पर बड़ी संख्या में प्रशिक्षित कामगार हैं।

झारखंड में उद्योग हैं, बिजली है और तेजी से औद्योगीकरण हो रहा है। इसका फायदा बिहार उठा सकता है। इसके लिए दोनों राज्यों को साझा विषयों पर बात करनी होगी। तत्व की बात यह कि वक्त आ गया है कि बिहार भविष्य की ओर देखे। पिछले वर्षों में किये गये प्रयास से सीख लेकर उत्साह के साथ आगे बढ़े, भविष्य का चिंतन करें। हमारा विश्वास है कि बिहार आगे बढ़ेगा तो देश भी आगे बढ़ेगा।

(साभार: प्रभात खबर)


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