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भैय्यू जी महाराज: आप हमेशा याद रहेंगे, बोले वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय

Published At: Saturday, 30 June, 2018 Last Modified: Saturday, 30 June, 2018

संतोष भारतीय

प्रधान संपादकचौथी दुनिया ।।

भैय्यू जी महाराज एक महान संत, एक महान समाजसेवी थे

भैय्यू जी महाराज की आत्महत्या इस देश के उन लोगों की कहानी है, जो बड़े लोग होते हैं लेकिन अपने आसपास के लोगों को नहीं पहचानते हैं। एक बार मैं आपसे कोगी का जिक्र कर चुका हूं। कोगी एक ऐसा कीड़ा होता है, जो मानव शरीर के भीतर पीछे से घुसता है और पेट के सारे अंगों को काटता हुआ, सिर फाड़ कर निकल जाता है। कोगी को पहचानना मुश्किल है, क्योंकि यह आम कीड़ों जैसा होता है। पर यह मनुष्य और जानवर के लिए मृत्युदूत है। कोगी इंसानी रूप में भी होते है, जिसके साथ लग जाए, उसे तबाह करके छोड़ते हैं। भैय्यू जी महाराज ऐसे ही कोगियों के शिकार हो गए। भैय्यू जी महाराज ऐसे संत थे, जिन्होंने गेरुए कपड़े कभी नहीं पहने। पता नहीं उनमें क्या आकर्षण था कि लोग उनके पास उमड़ कर पहुंचते थे। भैय्यू जी महाराज लोगों की व्यथा, दर्द और तकलीफ सुन कर अपनी सलाह देते थे। मैं भैय्यू जी महाराज से काफी दिनों से परिचित था। भैय्यू जी महाराज मुझे शायद अपना मित्र मानते थे। मैंने जो भी भैय्यू जी महाराज से कहा, उन्होंने करने की कोशिश की। मैंने उनसे कहा कि आप मुंबई आइए, श्री कमल मोरारका जी की खींची हुए चित्रों की प्रदर्शनी है, उसका उद्घाटन कीजिए। भैय्यू जी महाराज वहां आए। मैंने भैय्यू जी महाराज से जिसे भी मिलने के लिए भेजा, उन्होंने सम्मान और धैर्य के साथ उनकी बात सुनी।

भैय्यू जी महाराज मंदिरों की श्रृखंला नहीं बनवाते थे, बल्कि उनकी पूजा करते थे, जिन्हें समाज में कोई नहीं पूछता। मध्य प्रदेश में एक पारदी समाज है, जिन पर अपराधी होने का ठप्पा लगा है। उनके बच्चों को कोई समाज में साथ नहीं रखता। भैय्यू जी महाराज ने पारदी समाज के बच्चों की शिक्षा के लिए आवासीय विद्यालय खोले। भैय्यू जी महाराज ने कन्याओं की शिक्षा का इंतजाम किया, शादियां कराईं, किसानों को बीज और खाद की सहायता देते थे। किसान आत्महत्या न करें, उसके लिए मुहिम चलाते थे। इस सब के लिए वे किसी से पैसा नहीं मांगते थे। उनके काम को जनता श्रद्धा की नजर से देखती थी। इसलिए लोग अपने खुद पैसे देते थे। भैय्यू जी महाराज के इसी व्यक्तित्व से प्रभावित होकर भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, दूसरी पार्टियों के लोग उनके यहां जाते थे। महाराष्ट्र का कोई भी राजनेता बिना भैय्यू जी महाराज से मिले अपने को पूर्ण नहीं मानता था। भैय्यू जी महाराज के दुश्मनों की संख्या भी कम नहीं थी। उनके ऊपर कई बार हमले हुए, उनका एक्सिडेंट कराया गया। भैय्यू जी महाराज ने देवदासी प्रथा के खिलाफ अभियान चलाया। देवदासे बन चुकी बच्चियां को वहां से निकाल कर एक आश्रम में भेजा। जब वे वहां से आ रहे थे तो उनके ऊपर गोलीबारी हुई। उनकी जान जाते-जाते बची। जाहिर है, ये हमला उनलोगों ने किया था, जो देवदासी प्रथा को चलाए रखना चाहते थे। भैय्यू जी महाराज के खिलाफ वही लोग थे, जो समाज सुधार के खिलाफ थे।

पिछले चार महीने में कई बार वहां जाने का मेरा कार्यक्रम बना, लेकिन जा नहीं सका। उनका मेरे पास कई बार फोन भी आया था, लेकिन मैं नहीं जा पाया, इसका मुझे दुख है। भैय्यू जी महाराज देश के सवालों को लेकर के बहुत ही ज्यादा जागरूक रहते थे। वे अपने पास आने वाले नेताओं को गरीबों और लोगों के लिए काम करने के लिए कहते थे। जब नरेन्द्र मोदी जी मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने एक अनशन किया दिनभर का। उस अनशन को भैय्यू जी महाराज ने तुड़वाया था। अन्ना हजारे के प्रसिद्ध दिल्ली आन्दोलन का अनशन तुड़वाने का काम भी भैय्यू जी महाराज ने ही किया।

भैय्यू जी महाराज की मां बहुत बीमार थीं। वे बिस्तर पर लेटी रहती थीं। मैं जब भैय्यू जी महाराज के यहां जाता था तो मैं उनकी मां का चरण छूता था। भैय्यू जी महाराज हमेशा मां के पास ले जाकर कहते थे कि मां देखो, संतोष जी आए हैं और मां आशीर्वाद के लिए हाथ उठाती थी। भैय्यू जी महाराज ने उनके कमरे को ही अस्पताल के कमरे का स्वरूप दे दिया था। अभी दो साल पहले उनके पिता जी का देहांत हुआ था। भैय्यू जी के घर में ज्यादा लोग नहीं हैं। उनकी पत्नी का देहांत तीन साल पहले हो गया था। भैय्यू जी अपनी बेटी के लालन-पालन और पढ़ाई-लिखाई को लेकर बहुत परेशान रहते थे। उन्होंने एक बार मुझसे कहा कि संतोष जी जब मैं बाबागिरी में आया तब देखा कि इन बाबाओं के ढकोसले, प्रपंच क्या हैं और लोगों को कैसे बरगलाते हैं। मानव तो मानव है, उसकी कमजोरियां होती हैं और उन कमजोरियों की वजह से कल कोई मुझ पर आरोप लगाए कि मैंने किसी का शोषण किया, तो ये ठीक नहीं होगा। इसलिए मैंने तय किया कि मैं शादी कर लूं। उनकी फिजियोथेरेपिस्ट, जो एक्सिडेंट के बाद उनकी फिजियोथेरेपी करने आती थी, उनसे उन्होंने शादी कर ली। भैय्यू जी महाराज ने कहा कि इस फैसले का सबसे बड़ा कारण मेरी बेटी की देखभाल करना था। किसी लड़की की देखभाल महिला ही अच्छे से कर सकती है। लेकिन भैय्यू जी महाराज कोगियों के शिकार हो गए। ये कोगी कौन है? ये कोगी वो थे, जो भैय्यू जी महाराज के आसपास रहते थे। भैय्यू जी महाराज के नाम पर बहुत सारे काम करते थे।

भैय्यू जी महाराज ने इसका इशारा किया था कि कुछ लोग उनकी पत्नी के कान में फुसफुसाते रहते हैं। इतने बड़े आदमी की पत्नी होने का मनोवैज्ञानिक दायित्व शायद उनकी पत्नी नहीं संभाल पाई। भैय्यू जी महाराज देखने में सुदर्शन थे। जो लोग उनके पास आते थे, उन्हीं के होकर रह जाते थे। महिलाएं आकर भैय्यू जी महाराज से घंटों बातें करती थी। पुरुष बात करे तो कोई बात नहीं पर महिलाएं बात करती थी, तो शायद उन्हें (भैय्यू जी महाराज की पत्नी) शक होता था। उन्होंने भैय्यू जी महाराज की टोह लेनी शुरू कर दी। भैय्यू जी महाराज की नई पत्नी के घर वाले का शायद मानसिक स्तर भी वैसे ही हैं। भैय्यू जी महाराज की प्रसिद्धी, काम, ज्ञान उनके लिए बेमतलब था। भैय्यू जी महाराज की व्यक्तिगत सम्पति उनकी खेती थी, जिसका अधिकतर हिस्सा उन्होंने सार्वजनिक काम के लिए बेच दी थी। उनकी संपत्ति, ट्रस्ट किसके पास जाए, इसे लेकर उनके घर में रोज कलह होती थी। शायद उनकी पत्नी, बेटी को साथ नहीं रखना चाहती थी। भैय्यू जी महाराज इस स्थिति से बहुत परेशान रहते थे।

चार महीने पहले उनका फोन आया कि मुझे आपसे बहुत जरूरी बात करनी है, आप इंदौर आइए। भैय्यू जी महाराज ने अपनी संपत्ति एक शिष्य विनायक के नाम कर दिया है। इन्हीं विनायक ने मुझे फोन किया कि आप सीधे घर आइए। मैं पहले आश्रम जाता था, वहां से फिर घर आता था। इस बार मैं सीधे उनके घर गया। वहां वे आम लोगों से मिल रहे थे। मैं जा कर बैठ गया। वहां मुझे एक फैमिली बैठी मिली, जिसके बारे में मुझसे भैय्यू जी ने कहा कि ये उस लड़की की मां हैं, जिसके  बलात्कार के खिलाफ पूरे महाराष्ट्र में मराठाओं का आन्दोलन हुआ था। भैय्यू जी ने कहा कि सरकार ने वादा किया था कि इसके भाई को नौकरी देंगे, लेकिन नहीं दी। उस परिवार का किसी ने ध्यान नहीं रखा। उस परिवार का ध्यान भैय्यू जी महाराज ने रखा। भैय्यू जी देश की हालत से बहुत परेशान थे। भैय्यू जी मोदी सरकार के काम करने की तरीके से बहुत खिन्न थे। वे इस बात से भी खिन्न थे कि महाराष्ट्र में सिंचाई की समस्या है, लेकिन महाराष्ट्र में राज्य सरकार कोई पहल नहीं कर रही है। उन्होंने मुझसे कहा कि मानव मन अजीब है, बहुत कुछ पाना चाहता है, लेकिन जब पा लेता है तब पता चलता है कि उसने जिसके लिए इतना त्याग किया, वो सब परेशान हैं। तब मुझे पहली बार अंदाजा लगा कि भैय्यू जी के मन में कहीं कोई खिन्नता है। तब लगा कि शायद आम आदमियों से ऊपर उठा हुआ यह इंसान कोगियों का शिकार हो गया है। उनका शिकार हो गया है, जो उनकी पत्नी के पास जाकर उनके खिलाफ भड़का रहे है। या उनकी पत्नी को सलाह देने वाले प्रॉपर्टी को लेकर के पीछे पड़े हैं। कई बार भैय्यू जी ने मुझसे कहा कि आप महाराष्ट्र के उन जगहों पर चलिए, जहां मैं समाजसेवा कर रहा हूं। उन्होंने कई बार कहा कि एक नया आन्दोलन शुरू करते हैं, एक नई यात्रा शुरू करते हैं। लोगों को शपथ दिलवाएंगे कि वो समाज के लिए काम करें। आखिर, ऐसा क्या हुआ कि जो आदमी एक बजे तक ट्‌वीट कर रहा है, एक मंत्री को जन्मदिन की बधाई दे रहा है, वो डेढ़ बजे खुद को गोली मार ले।

मुझे पता चला कि कमरे में कुछ बातचीत हुई और उन्होंने कमरे से सभी लोगों को निकाल कर कमरा अंदर से बंद कर लिया। शायद कुछ लिखा। लेकिन कमरा बंद करने और गोली की आवाज आने में पंद्रह से बीस मिनट का ही फर्क रहा। ये सभी बात मैं उनके परिवार पर कोई आक्षेप लगाने के लिए नहीं कह रहा हूं। मैं बस इतना कह रहा हूं कि जो लोग मानवीय कमजोरियों के शिकार होते हैं, उन लोगों के घर में ऐसे हादसे होते रहते हैं। भैय्यू जी महाराज ने शायद सोचा होगा कि मैं किस के सामने क्या सफाई दूंगा। अगर कोई मेरा अपना ही मेरी बात नहीं मानता है, तो मैं कहां जाकर क्या सफाई दूंगा। भैय्यू जी महाराज ने दुनिया से जाना बेहतर समझा।

अब भैय्यू जी महाराज की यादें ही रहेंगी। उन्हें मैंने कभी गुस्सा होते नहीं देखा। लेकिन, वे उन कोगियों से हार गए, जिन्होंने सफलतापूर्वक विवाद पैदा कर दिया। यह तनाव ही था, जिसने शायद यह लिखने को मजबूर कर दिया कि मैं हार गया हूं। भैय्यू जी महाराज इस हार को जीत में बदल सकते थे। भैय्यू जी महाराज ने अपनी बीमार मां को भी नहीं याद किया। उस बेटी का भी ध्यान उन्होंने नहीं किया, जिसके लिए उन्होंने अपनी जिंदगी में नए लोगों को शामिल किया। भैय्यू जी महाराज दूसरों को हिम्मत देते थे। पर स्वयं हिम्मत नहीं जुटा पाए इस नागपाश को काटने की। भैय्यू जी महाराज आप नहीं हैं, लेकिन मुझे आप हमेशा याद रहेंगे। भैय्यू जी महाराज को प्रणाम।

 

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