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जब अटल जी ने खुद फोन कर मेरा ध्‍यान रखने को बोला...

Published At: Thursday, 16 August, 2018 Last Modified: Thursday, 16 August, 2018

अजय शुक्‍ल

प्रधान संपादक, आईटीवी नेटवर्क ।।

अटल जी के साथ मेरी तमाम यादें जुड़ी हुई हैं। यह वर्ष 1995-96 की बात है, जब मैं 'दैनिक जागरण' लखनऊ में संवाददाता हुआ करता था। उससे पहले तक अटल जी कभी लखनऊ से चुनाव नहीं जीते थे। उनकी बहुत तमन्‍ना थी कि वह लखनऊ से चुनाव जीतें। जिस समय अटल जी ने लखनऊ से चुनाव लड़ने का प्‍लान बनाया, उस समय समाजवादी पार्टी ने उनके मुकाबले में राजबब्‍बर को अपना प्रत्‍याशी बनाया था। समाजवादी पार्टी की ओर से चुनाव का सारा काम 'सहारा' मैनेज कर रहा था। उस समय 'दैनिक जागरण' ने चुनाव डेस्‍क बनाई थी और इसके लिए चार लोगों की टीम बनाई गई थी। टीम में मुझे भी शामिल किया गया था। इस टीम में मैं रिपोर्टिंग की ओर से था जबकि अन्‍य डेस्‍क के साथी थे।

मुझे अच्‍छी तरह याद है कि समाजवादी पार्टी के प्रत्‍याशी राजबब्‍बर की ओर से सहारा की पूरी टीम लगी हुई थी जबकि अटल जी के साथ उनके चुनिंदा लोग ही शामिल थे। उस समय दोनों प्रत्‍याशियों की बात करें तो इसमें 60 और 40 प्रतिशत का रेशियो थे। राजबब्‍बर की स्थिति जहां 60 प्रतिशत थी, वहीं अटल जी 40 प्रतिशत की स्थिति में थे। हमारी टीम में शामिल लोग भी दिल से चाहते थे कि अटल जी जीत जाएं। हमने उस समय चुनाव को बहुत ही बेहतर तरीके से कवर किया और अटल जी जीत गए। उस समय अटल जी 13 दिनों के लिए प्रधानमंत्री बने थे।

मुझे याद है कि मैंने एक आर्टिकल लिखा था, जिसका इंट्रो था कि अटल जी अब अपने करीबियों से भी उतनी आसानी से नहीं मिल पाएंगे, जिनसे कभी वह घुलमिलकर बात करते थे, क्‍योंकि प्रधानमंत्री के रूप में उनके आसपास कड़ा सुरक्षा घेरा होगा। जब अटल जी हमारे आफिस आए तो उन्‍हें वह आर्टिकल याद था। उन्‍होंने आते ही मुझे गले लगा लिया। इस बात से आप समझ सकते हैं कि वह कितने सरल ह्दय थे।

यही नहीं, मेरा पासपार्ट बनवाने में भी उन्‍होंने मेरी काफी मदद की थी। जब लखनऊ से शारजाह के लिए पहली फ्लाइट शुरू हुई थी तो उस समय कई पत्रकार उस फ्लाइट में जा रहे थे। लेकिन पत्रकारों की इस लिस्‍ट में मेरा नाम शामिल नहीं था। इसके बारे में जब अटल जी ने पूछा तो किसी ने उन्‍हें बताया कि मेरे पास तो पासपोर्ट नहीं है, इसलिए कैसे शारजाह जा पाऊंगा। यह अटल जी का विशाल ह्दय ही था कि उन्‍होंने प्रयास करके मेरा पासपोर्ट बनवाया।

वर्ष 1999 में जब 'अमर उजाला' ने अपना पंजाब एडिशन लॉन्‍च किया था। उस समय मुझे रिपोर्टिंग इंचार्ज बनाकर अमृतसर भेजा गया था। उस समय अटल जी ने पंजाब में पार्टी के तत्‍कालीन अध्‍यक्ष दया सिंह सोढ़ी को फोन कर मेरा ध्‍यान रखने के लिए बोला था। मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात थी कि एक प्रधानमंत्री ने मेरे लिए खुद फोन कर ध्‍यान रखने के लिए बोला हो।



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इन पर अश्लील कंटेट प्रसारित करने के आरोप सही हैं

आज के दौर में ऐसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करना बहुत मुश्किल है

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