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ऐसी बेजा मांग करने वाले वकीलों को क्यों कोड़े लगाए जाने चाहिए,बताया डॉ. वैदिक ने...

Thursday, 26 April, 2018

डॉ. वेद प्रताप वैदिक

वरिष्ठ पत्रकार ।।

आसाराम को सजा बहुत कम है

आसाराम को उम्रकैद की सजा और उसके दो साथियों को 2020 साल की सजा हुई। एक नाबालिग शिष्या के साथ बलात्कार की है, यह सजा! बलात्कार के खिलाफ जो कानून अभी देश में है, उसके हिसाब से तो यह सजा ठीक है लेकिन मैं समझता हूं कि यह सजा बहुत कम है।

बलात्कार के लिए ऐसी सजा तो किसी को भी दी जा सकती है। आसाराम जैसे आदमी को जो अपने आप को संत कहलवाता है, जिसने लाखों लोगों को उल्लू बनाया, जो नेताओं और अभिनेताओं की तरह नौटकियां रचाता है, जिसने अरबों रुपयों की संपत्तियां खड़ी कर लीं, ऐसे धूर्तराज को सिर्फ उम्रकैद! उसने बलात्कार भी किया तो किसके साथ? अपनी एक अबोध शिष्या के साथ! उसने सारे गुरुशिष्य संबंधों की मर्यादा मटियामेट कर दी। खुद की उम्र 70 के पार और शिष्या की उम्र 16 भी नहीं।

उसके वकील जजों से कह रहे थे कि आप सजा सुनाते वक्त आसाराम जी की उम्र का ख्याल जरूर रखें। मैं उन वकीलों से पूछता हूं कि क्या आसाराम ने अपनी उम्र का खुद ख्याल रखा? अपनी पोती की उम्र वाली शिष्या के साथ कुकर्म करने वाले आदमी का अदालत ख्याल रखे, यह भी अजीब बात है। ऐसी बेजा मांग करने वाले वकीलों को भी कोड़े लगाए जाने चाहिए और उन पर जुर्माना भी थोपना चाहिए।

आसाराम ने बलात्कार ही नहीं किया है बल्कि उसके दो चश्मदीद गवाहों की हत्या और एक पर जानलेवा हमला भी हुआ है। ये हत्याएं किसने करवाई हैं​​? झूठे दस्तावेज़ पेश करके सर्वोच्च न्यायालय को धोखा देने की भी कोशिश की गई। झूठे बहाने बनाकर जमानत पर छूटने की भी कोशिश की गई। आसाराम का बेटा भी जेल की हवा खा रहा है। लगभग आधा दर्जन धूर्त साधुसंत इस समय जेल में हैं। इन कुख्यात संतों की सारी संपत्ति सबसे पहले जब्त की जानी चाहिए। फिर इन्हें असाधारण सजा दी जानी चाहिए क्योंकि ये अपने आपको असाधारण व्यक्ति बताते है। ये हिंदुत्व के कलंक हैं। इन्हें उम्रकैद होगी तो ये जेल की रोटियां तोड़ेगे और मुफ्त की दवाइयां खाएंगे। ये अपनी राक्षसी वासना को तृप्त करने के लिए पता नही वहां रहकर क्या क्या हथकंडे अपनाएंगे? बेहतर तो यह होगा कि इन्हें मौत की सजा दी जाए और पूरी सजधज के साथ दिल्ली के लाल किले या विजय चौक पर लटकाया जाए। यदि आसारामजैसे लोगों में ज़रा भी संतई होती तो वे अपना जुर्म खुद कुबूल करते और अपने लिए फांसी की सजा खुद मांगते या जेल में ही आत्महत्या कर लेते।


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