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‘सोशल मीडिया' पर 'सार्थक शनिवार' के मंच पर उठीं खूब आवाजें...

Published At: Monday, 23 April, 2018 Last Modified: Monday, 23 April, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

तथ्यों की जांच किए बगैर हम सोशल मीडिया पर निजता को शेयर कर रहे हैं, एक तरफ जहां सब कुछ छुपा लेना चाहते है वहीं एक दूसरा तंत्र है जो आप पर नजर जमाए हुए है ये बात जी न्यूज के डिजिटल एडिटर दयाशंकर मिश्र ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नोएडा परिसर में 'सार्थक शनिवार' के अंतगर्त आयोजित एक परिचर्चा में कही। इस कार्यक्रम का विषय था- सोशल मीडिया: अवधारणा और विश्वसनीयता

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज की जरूरत है फेक न्यूज से बचने की। विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया पर स्वनियमन आवश्यक है। फेक न्यूज आज मुख्यधारा की पत्रकारिता में हावी हो रहा है, जिस पर नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है।  

दयाशंकर मिश्र ने आगे कहा कि समाजहित के पहलुओं को जागृत करना ही सोशल मीडिया का धर्म होना चाहिए। अपने आपको सही साबित करने की भूख ही खबरों की विश्वसनीयता को कम कर रही है। डिजिटल मीडिया पर हमें त्वरित प्रतिक्रिया से बचना चाहिए। सोशल मीडिया के खबरों की जांच करके करके फेक न्यूज को कम किया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान एनडीटीवी की न्यूज एंकर अदिति राजपूत ने कहा कि जो दूसरे के दर्द को शब्द दे, वही पत्रकारिता कहलाती है। पत्रकारिता का क्षेत्र निरंतर सीखने का है। सोशल मीडिया ने जहां एक ओर संचार के क्षेत्र में बेहतर मंच उपलब्ध कराया है वहीं इस पर झूठ और फरेब की खबरें भी बढ़ी है। इस प्रकार की खबरों से संवेदनशीलता घटती जा रही है और मानवीय संवेदना खोखली होती जा रही है, आदमी-आदमी से दूर होता जा रहा है।

वहीं समाचार4मीडिया के डेप्युटी एडिटर अभिषेक महरोत्रा ने कहा कि सोशल मीडिया के आगमन से जहां चुनौतियां बढ़ी हैं, वहीं डिजिटल मीडिया में करियर की संभावनाओं में भी अपार वृद्धि हुई है। एक ओर जहां सोशल मीडिया स्वयं संपादक और लेखक बनने का अवसर देती है, वहीं दूसरी ओर आपकी रचनात्मकता और सजगता को मंच प्रदान करती है। पर जिस तरह सोशल मीडिया के शैशवकाल में ही इसका विश्वनीयता पर विमर्श हो रहा है, तो ये स्वंय दर्शाता है कि संकट कितना है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया को भरोसेमंद बनाना है, तो हम सब को इस पर कोई भी मेसेज डालने या फॉर्वर्ड करने से प हले उसे जांच लेना चाहिए वरना हम खुद ही इसको अविश्वसनीय श्रेणी मे ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि ये दोधारी तलवार है, यहां सुषमा स्वराज यश पाती हैंं, तो शशि थरूर बड़ा नुकसान उठाते हैं।

इस बीच न्यूज-18 के ऑटो मोबाइल एडिटर विष्णु सोनी ने बताया कि सोशल मीडिया पर कुछ भी निजी नहीं है। सोशल मीडिया पर आप की साख का ध्यान नहीं रखा जाता है। सोशल मीडिया वर्तमान में लगभग 225 करोड़ उपभोक्ताओं का एक अलग देश बनता जा रहा है यहां पर लोग व्यक्तिगत खबरों को बिना जांचे परखे साझा कर देते हैं, इससे खबरों की सार्थकता खत्म हो रही है। इस पर नियंत्रण की आवश्यकता बढ़ रही है। सरकार मीडिया का नियमन करे, इससे पहले हमें स्वनियमन कर लेना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. सौरभ मालवीय ने किया। इस अवसर पर MSN हिंदी के एडिटर अनुराग मिश्र, सहायक प्राध्यापक सूर्य प्रकाश, लाल बहादुर ओझा, डॉ. रामशंकर, मधुकर सिंह, ऋचा चांदी, अनिरुद्ध सुभेदार और तमाम छात्रगण मौजूद रहे।

यहां देखें कार्यक्रम की अन्य तस्वीरें-



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