Share this Post:
Font Size   16

जब आशुतोष और रोहित सरदाना में हुई 'शालीन' बहस, कई पर साधा निशाना

Published At: Tuesday, 08 January, 2019 Last Modified: Tuesday, 08 January, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2019 के पहले इंटरव्यू से केवल सियासी हलकों में ही हलचल नहीं हुई बल्कि मीडिया में भी एक तरह से भूचाल आ गया है। पत्रकारों की एकजुटता पर सवाल तो उठ ही रहे हैं, साथ ही आपसी द्वन्द भी शुरू हो गया है। हालांकि, द्वन्द वैचारिक है और केवल शाब्दिक बाणों से ही एक-दूसरे को घायल किया जा रहा है। इस कड़ी में सबसे नया नाम जुड़ा है ‘आजतक’ के दमदार एंकर रोहित सरदाना और पत्रकार से नेता बनकर वापस पत्रकारिता में लौटने वाले आशुतोष का। दोनों ट्विटर पर बहस कर रहे हैं, अच्छी बात ये है कि इस बहस में मर्यादाओं को ख्याल रखा जा रहा है। वैसे भी, वरिष्ठ पत्रकारों से शाब्दिक मर्यादाओं का सम्मान रखने की अपेक्षा की जाती है।

दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत एक जनवरी से हुई। जब न्यूज़ एजेंसी ‘एएनआई’ की संपादक स्मिता प्रकाश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू किया। इस इंटरव्यू के प्रसारण के साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कुछ पत्रकारों की उपस्थिति में स्मिता प्रकाश को निशाना बनाया। उनके द्वारा स्मिता के लिए इस्तेमाल किया गया शब्द pliable (लचीला) इंटरनेट पर सबसे ज्यादा खोजा गया। राहुल के इस वार का मुकाबला करने के लिए कई पत्रकार मैदान में उतरे, जिसमें रोहित सरदाना के साथ ही ‘ज़ी न्यूज़’ के संपादक सुधीर चौधरी भी शामिल थे। एडिटर गिल्ड ने भी इस पर नाराज़गी जताई। स्मिता को मिले इस समर्थन से सवाल खड़ा हुआ कि क्या मीडियाकर्मियों की ये प्रतिक्रिया समानता के सिद्धांत पर आधारित है?

वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने ट्विटर पर अपना दुःख साझा करते हुए कहा कि जब उनके जैसे पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा था, तब पूरा मीडिया खामोश क्यों रहा? इस बीच, पूर्व आप नेता और www.satyahindi.com के तौर पर अपना नया पत्रकारिता वेंचर लॉन्च करने वाले आशुतोष ने एडिटर गिल्ड और कुछ पत्रकारों की अतिसक्रियता पर अपने लेख के माध्यम से हमला बोला। उनके लेख का शीर्षक ‘क्या झुकने के लिये कहा गया तो रेंगने लगा है मीडिया?’

कुछ पत्रकारों को ये लेख नागवार गुज़रा, जिसमें रोहित सरदाना सबसे पहले स्थान पर आते हैं। रोहित ने इस लेख को ट्वीट करते हुए अपने विचार भी सामने रख दिए। उन्होंने लिखा कि ‘मीडिया रेंगने नहीं लगा है @ashutosh83b जी। पत्रकारों में भी बरसो से चले आ रहे ‘एकतरफ़ा नैरेटिव और ‘मठाधीशी’ को चुनौती देने वाली पीढ़ी खड़ी हो गई है। इसलिए कुछ लोगों को बुरा लगने लगा है।’     

रोहित सरदाना के विचारों का जवाब देने के लिए आशुतोष ने भी ट्वीट किया और इसके बाद तो दोनों में बहस शुरू हो गई। शब्द रूपी बाणों को ट्विटर रूपी कमान पर चढ़ाकर दोनों एक-दूसरे पर दागने लगे। रोहित को जवाब देते हुए आशुतोष ने लिखा ‘@sardanarohit भाई रोहित की राय से पूरी तरह से सहमत हूँ। नई पीढ़ी नया नैरेटिव लेकर आती है। पुरानी पीढ़ी को तकलीफ़ होती है। मेरी छोटी जिज्ञासा ये है कि नई पीढ़ी के नैरेटिव में मोदी/शाह से सवाल पूछना है या नहीं जैसे रोज राहुल गांधी को कठघरे में खड़ा किया जाता है’? इस पर रोहित ने कहा ‘निश्चित खड़ा किया जाता है! मोदी/शाह से ज़्यादा मीडिया ट्रायल राहुल गांधी का हुआ हो तो बताइए? बाक़ी रही बात स्मिता प्रकाश जी के इंटरव्यू की, तो बग़ल में हंटर रख के तो सवाल किए नहीं जा सकते! सवाल पूछने वाले ने सवाल पूछे, जवाब देने वाले की मर्ज़ी वो जैसे जवाब दे’!

दोनों इतने से ही शांत नहीं हुए। आशुतोष ने एक और ट्वीट दागते हुए लिखा ‘रोहित भाई ये पूरा सच नहीं है। सुबह से शाम तक सिर्फ़ राहुल से ही सवाल होते हैं। जब कि मीडिया का काम सरकार की चौकादारी करना भी है। मोदी से तीखे सवाल करने वाले ABP की गति को पाते हैं। ये तो सर्वविदित सच है’। इस ट्वीट का जवाब रोहित ने शब्दों की बाजीगरी के साथ दिया। उनके शब्दों में सम्मान भी था और तंज भी। उन्होंने लिखा ‘ग़लतफ़हमी है सर। पता नहीं हो जाती है या पैदा की जाती है! मीडिया अपना काम बख़ूबी कर रहा है। बाक़ी किसी चैनल पर टिप्पणी फ़िलहाल नहीं करूँगा। आपके वाली कटेगरी में आने के बाद लिखा जाएगा इस दौर की ‘कथित शहादतों’ पे भी कभी’!

इसके बाद आशुतोष ने भी एक कदम और बढ़ाते हुए ट्वीट किया ‘कोई नहीं! बहस होनी चाहिये। वैसे मैं मानता हूँ कि देश में काफी हद तक 2014 के पहले इकतरफ़ा नैरेटिव था। ये नैरेटिव बदला है पर ख़तरनाक तरीक़े से’। पूर्व नेता के इस ट्वीट का जवाब भी रोहित ने धमाकेदार अंदाज़ में दिया। उन्होंने कहा ‘बहस जारी रहेगी! छुट्टी पर हूँ, लौट कर अगला भाग। वैसे सर्दी किसी को अच्छी लगती है, किसी की जान पे बन आती है। नैरेटिव की कहानी भी ऐसी ही है। किसी को लगता है अब बैलेन्स हुआ, किसी की दुकानदारी ठप्प हो रही उसी बैलेन्स के चक्कर में’!

इस ट्वीट के साथ दोनों तो खामोश हो गए, लेकिन सुधीर चौधरी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए साफ़ कर दिया कि ‘पिक्चर अभी बाकी है।’ उन्होंने रोहित के ‘निश्चित खड़ा किया जाता है...’ ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा ‘आप पास्ता बना लेती हैं? आपको भारतीय खाने में क्या पसंद है? आपके अपनी सास से कैसे सम्बंध थे? रसोई में क्या पकता था? आपका पालतू कुत्ता पिद्दी कैसा है? कभी मिलवाइए। समोसा कैसा लगा’? अपने इस ट्वीट में भले ही सुधीर ने किसी को प्रत्यक्ष रूप से निशाना न बनाया हो, लेकिन सब जानते हैं कि बात किसकी हो रही है और किसे जवाब दिया जा रहा है। कुल मिलकर कहा जाए तो पीएम के इंटरव्यू से शुरू हुआ विवाद अभी मीडिया और कुछ वक़्त तक छाया रहेगा



पोल

सोशल मीडिया पर पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है, क्या है आपका मानना?

पत्रकार भी दूध के धुले नहीं हैं, उनकी भी जवाबदेही होनी चाहिए

ये पेड आईटी सेल द्वारा पत्रकारिता को बदनाम करने की साजिश है

Copyright © 2019 samachar4media.com