ताज़ातरीन

खबरों में

02/02/2012

17 अगस्त 2011 को नई दुनिया ग्रुप द्वारा भोपाल से लॉन्च किये गये अपने नये अखबार नई दुनिया फास्ट को 1 फरवरी से बंद कर दिया है। इस आठपेज के अखबार में लोकल खबरों को प्रमुखता दी जाती थी साथ ही इसमें ज्यादा से ज्यादा खबरों को जगह देने की कोशिश की जाती थी। हमसे बात करते हुए नई दुनिया प्रबंधन ने इसकी पुष्टि की, लेकिन बंद करने की वज़ह पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। इस अखबार की संपादकीय जिम्मेदारी वरिष्ठ पत्रकार राजेश सिरोठिया को दी गई थी


02/02/2012

भारत के पहले प्रीमियम लाइफ स्टाइल चैनल एनडीटीवी गुड टाइम्स ने अपने शो फूडिस्तान के प्रसारण के लिए पाकिस्तानी चैनल जियो टीवी के साथ समझौता किया है। फूडिस्तान, पाक कला की एक ऐसी लड़ाई है जो भारत और पाकिस्तान के बीच की जा रही है, इस कार्यक्रम का प्रीमीयर 23 जनवरी को हुआ था। इस में 16 पेशेवर शेफ और 8 शेफ अपने-अपने देश के बेहतरीन और लज्जतदार खाने का प्रतिनिधित्व करेगें


02/02/2012

अभय ओझा को हैदराबाद एसोसिएट ब्रॉडकास्टिंग कंपनी के चैनल टीवी 9 का वाइस प्रेसीडेंट -सेल्स बनाया गया है। टीवी9 ज्वाइन करने से पहले वे आरबीएनएल के रीजनल चैनल बिग मैजिक के नेशनल सेल्स हेड थे। उन्होंने बिग मैजिक चैनल जुलाई 2011 में ज्वाइन किया था। बिग मैजिक को ज्वाइन करने से पहले उन्होंने चार साल आईबीएन7 के एवीपी सेल्स के रुप में अपनी सेवाएं दी थी।ओझा ने अपने कॅरियर की शुरुआत टीवी टुडे नेटवर्क से फरवरी 1999 से की थी


सप्ताह का इंटरव्यू

आमने-सामने

जनमत

क्या सोशल मीडिया को सरकार की निगरानी में लाना उचित हैं ?:

enba2011

नेटवर्क 18 और ईटीवी समझौते के बाद

  • एस निहाल सिंह, ‘द स्टेट्समैन’ के पूर्व संपादक
    नेटवर्क18’और ‘ईटीवी’ समूह के बीच हुए समझौते पर मेरी पहली प्रतिक्रिया थी कि भारत के लिए यह सही समय है कि मीडिया में एकाधिकार के विरूद्ध एक कड़ा कानून लाया जाए। सभी प्रजातांत्रिक देशों, यहां तक कि सबसे अधिक विकसित देशों में भी इस तरह के कानून/प्रथा/आदर्श हैं।
    23/01/2012
  • दिलीप चेरियन, मीडिया विश्लेषक
    वैश्विक स्तर पर हमने देखा है कि जब बड़ी पूंजी मीडिया में प्रवेश करती है तो उसका किस तरह से असर होता है, वास्तव में हम क्या कर रहे हैं, हम खुद को दोहरा रहे हैं।

    आज, विश्व भर में मीडिया में अल्पाधिकार की प्रवृति दिखाई दे रही है, चाहे वह सिल्वियो बर्लुस्कोनी हो या रूपर्ट मर्डोक। सच्चाई यह है कि वे ना सिर्फ बड़े पैमाने पर मीडिया को प्रभावित करते हैं बल्कि राजनीति को भी प्रभावित करते हैं।

    23/01/2012
  • महेंद्र त्रेहान, संस्थापक, संपादक इंडिया टुडे
     अगर सरकार और कॉरपोरेट अधिक सर्तक रहेंगे तो ऐसा नहीं होगा। एक व्यक्ति कई संपत्तियों का मालिक है। “2जी टेप (नीरा राडिया प्रकरण) से सभी को पहले से ही मालूम है कि कॉरपोरेट के द्वारा सभी कुछ निर्धारित किया जा रहा है। यह काफी खतरनाक है कि मुकेश अंबानी आपके सारे फैसले लेंगे, कहने का अर्थ की नीतियों का निर्धारण करेंगे क्योंकि जैसा कि आप सभी को मालूम है कि पहले (अतीत में) क्या हुआ है। चाहे वह किसी से बात करना या किसी की आलोचना करना या उसे बेनकाब करना हो.।”
     
    23/01/2012