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खबरों में
17 अगस्त 2011 को नई दुनिया ग्रुप द्वारा भोपाल से लॉन्च किये गये अपने नये अखबार नई दुनिया फास्ट को 1 फरवरी से बंद कर दिया है। इस आठपेज के अखबार में लोकल खबरों को प्रमुखता दी जाती थी साथ ही इसमें ज्यादा से ज्यादा खबरों को जगह देने की कोशिश की जाती थी। हमसे बात करते हुए नई दुनिया प्रबंधन ने इसकी पुष्टि की, लेकिन बंद करने की वज़ह पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। इस अखबार की संपादकीय जिम्मेदारी वरिष्ठ पत्रकार राजेश सिरोठिया को दी गई थी
भारत के पहले प्रीमियम लाइफ स्टाइल चैनल एनडीटीवी गुड टाइम्स ने अपने शो फूडिस्तान के प्रसारण के लिए पाकिस्तानी चैनल जियो टीवी के साथ समझौता किया है। फूडिस्तान, पाक कला की एक ऐसी लड़ाई है जो भारत और पाकिस्तान के बीच की जा रही है, इस कार्यक्रम का प्रीमीयर 23 जनवरी को हुआ था। इस में 16 पेशेवर शेफ और 8 शेफ अपने-अपने देश के बेहतरीन और लज्जतदार खाने का प्रतिनिधित्व करेगें
अभय ओझा को हैदराबाद एसोसिएट ब्रॉडकास्टिंग कंपनी के चैनल टीवी 9 का वाइस प्रेसीडेंट -सेल्स बनाया गया है। टीवी9 ज्वाइन करने से पहले वे आरबीएनएल के रीजनल चैनल बिग मैजिक के नेशनल सेल्स हेड थे। उन्होंने बिग मैजिक चैनल जुलाई 2011 में ज्वाइन किया था। बिग मैजिक को ज्वाइन करने से पहले उन्होंने चार साल आईबीएन7 के एवीपी सेल्स के रुप में अपनी सेवाएं दी थी।ओझा ने अपने कॅरियर की शुरुआत टीवी टुडे नेटवर्क से फरवरी 1999 से की थी
सप्ताह का इंटरव्यू
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नीरज सनन, एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (मार्केटिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन), एमसीसीएस
अगर आपका कंटेंट गाजर-मूली की तरह है तो गाजर-मूली के ही पैसे मिलेंगे। आपको प्रीमियम पैसा लेना है तो कंटेंट भी प्रीमियम देना होगा। दर्शक पागल नहीं है कि वह आपको गाजर-मूली कंटेंट के प्रीमियम पैसे दे
आमने-सामने
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आनंद प्रधान, एसोसिएट प्रोफेसर, आईआईएमसी
भारतीय मीडिया और खासकर टी.वी उद्योग में इन दिनों खासी हलचल है। वर्ष २०१२ की शुरुआत बहुत धमाकेदार रही। देश में शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों में बाजार पूंजीकरण के लिहाज से सबसे बड़ी कंपनी, मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने टी.वी-18/नेटवर्क-18 (मनोरंजन चैनल कलर्स और न्यूज चैनल सी.एन.एन-आई.बी.एन, सी.एन.बी.सी आदि) में कोई 17 अरब रूपये के निवेश का एलान करके सबको चौंका दिया। -
प्रमोद जोशी, वरिष्ठ पत्रकार
इस बार पेड न्यूज़ पर भी आयोग की नज़र है। पर आयोग इसे प्रत्याशी के खर्च का मामला मानता है। उसके आगे उसकी दिलचस्पी नहीं। एक पत्रकार और पाठक के लिए यह साख को बेचने का मामला है। इसलिए पेड न्यूज की तमाम उन शक्लों पर भी विचार करने की ज़रूरत है जो चुनाव की परिधि से बाहर हैं।
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जनमत
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प्रमोद जोशी, वरिष्ठ पत्रकार
ऑनलाइन संचार दुनिया भर में विचार का विषय है। बेशक इसके मार्फत धोखाधड़ी और हेरफेर के मामले भी सामने आ रहे हैं, पर किसी भी एक कार्रवाई का प्रभाव कितना दूरगामी होगा, इसे देखने की ज़रूरत भी है।
नेटवर्क 18 और ईटीवी समझौते के बाद
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एस निहाल सिंह, ‘द स्टेट्समैन’ के पूर्व संपादकनेटवर्क18’और ‘ईटीवी’ समूह के बीच हुए समझौते पर मेरी पहली प्रतिक्रिया थी कि भारत के लिए यह सही समय है कि मीडिया में एकाधिकार के विरूद्ध एक कड़ा कानून लाया जाए। सभी प्रजातांत्रिक देशों, यहां तक कि सबसे अधिक विकसित देशों में भी इस तरह के कानून/प्रथा/आदर्श हैं।23/01/2012 -
दिलीप चेरियन, मीडिया विश्लेषकवैश्विक स्तर पर हमने देखा है कि जब बड़ी पूंजी मीडिया में प्रवेश करती है तो उसका किस तरह से असर होता है, वास्तव में हम क्या कर रहे हैं, हम खुद को दोहरा रहे हैं।आज, विश्व भर में मीडिया में अल्पाधिकार की प्रवृति दिखाई दे रही है, चाहे वह सिल्वियो बर्लुस्कोनी हो या रूपर्ट मर्डोक। सच्चाई यह है कि वे ना सिर्फ बड़े पैमाने पर मीडिया को प्रभावित करते हैं बल्कि राजनीति को भी प्रभावित करते हैं।
23/01/2012 -
महेंद्र त्रेहान, संस्थापक, संपादक इंडिया टुडेअगर सरकार और कॉरपोरेट अधिक सर्तक रहेंगे तो ऐसा नहीं होगा। एक व्यक्ति कई संपत्तियों का मालिक है। “2जी टेप (नीरा राडिया प्रकरण) से सभी को पहले से ही मालूम है कि कॉरपोरेट के द्वारा सभी कुछ निर्धारित किया जा रहा है। यह काफी खतरनाक है कि मुकेश अंबानी आपके सारे फैसले लेंगे, कहने का अर्थ की नीतियों का निर्धारण करेंगे क्योंकि जैसा कि आप सभी को मालूम है कि पहले (अतीत में) क्या हुआ है। चाहे वह किसी से बात करना या किसी की आलोचना करना या उसे बेनकाब करना हो.।”
23/01/2012







