‘आईपीएल’ की नीलामी में ‘स्‍टार इंडिया’ के सीईओ उदय शंकर ने उठाया था ये रिस्‍क ‘आईपीएल’ की नीलामी में ‘स्‍टार इंडिया’ के सीईओ उदय शंकर ने उठाया था ये रिस्‍क

‘आईपीएल’ की नीलामी में ‘स्‍टार इंडिया’ के सीईओ उदय शंकर ने उठाया था ये रिस्‍क

Wednesday, 13 September, 2017

रुहेल अमीन ।।

स्‍टार इंडिया’ (Star India) के चेयरमैन और सीईओ उदय शंकर ने एक बार फिर साबित कर दिखाया है कि आखिर क्‍यों उनका नाम बेहद सफल शख्सियतों में गिना जाता है। उनके नेतृत्‍व में हाल ही में करीब 24 बोलीदाताओं को पीछे छोड़कर ‘इंडियन प्रीमियर लीग’ (IPL)के टेलिविजन और डिजिटल प्रसारण के अधिकार ‘स्‍टार इंडिया’ (Star India)  ने अपने नाम कर लिए हैं। इसके लिए ‘स्‍टार इंडिया’ ने 16347.50 करोड़ रुपये चुकाए हैं।

ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्‍या इसके पीछे पैसा कारण रहा अथवा उदय शंकर का परफेक्‍ट गेम प्‍लान, जिसने स्‍टार इंडियाको ये सफलता दिलार्इ। इस बारे में हमने उदय शंकर से बातचीत कर जानना चाहा कि आखिर वे इस बारे में क्‍या सोचते हैं और आगे उनकी क्‍या प्‍लानिंग है। इस बातचीत के दौरान उदय शंकर ने यह भी बताया कि नीलामी प्रक्रिया के दौरान उन्‍हें किस बात का सबसे ज्‍यादा डर सता रहा था और इस बड़े प्‍लेटफॉर्म का लाभ वे किस तरह उठाएंगे।

पेश हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश :

आईपीएल के मीडिया अधिकार हासिल करने के बाद अब आपकी क्‍या प्‍लानिंग है और आप इस प्‍लेटफॉर्म को यहां से कहां लेकर जाएंगे ?

इस बारे में फिलहाल मैं कुछ नहीं कह सकता हूं। इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्‍दबाजी होगी। मैं अभी सभी चीजों को समझने की कोशिश कर रहा हूं। इसलिए सच में इस बारे में आपको फिलहाल मैं कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं हूं। यदि मैं कहूं कि इस बारे में हमने पहले ही सोच लिया है तो यह बिल्‍कुल झूठ होगा। 

नीलामी के दौरान क्‍या कभी ऐसी स्थिति भी आई थी, जब आपको लगा कि चीजें आपके अनुकूल नहीं हो रही हैं ?

हमने इस बारे में कुछ योजना ही नहीं बनाई थी। हमने तो सिर्फ साधारण तरीके से नीलामी प्रक्रिया में हिस्‍सा लिया था। एक बार जब आप सीलबंद टेंडर जमा कर देते हैं तो फिर इस बारे में कुछ पता नहीं रहता। वो तो जब आप नीलामी वाले कमरे में जब जाते हैं और वहां देखते हैं कि भारतीयों के साथ ग्‍लोबल स्‍तर के दिग्‍गज वहां बैठे हैं और इस प्रक्रिया में हिस्‍सा ले रहे हैं तो समझ में आ जाता है कि मुकाबला कड़ा होने जा रहा है। हमारी स्‍ट्रेटजी काफी जोखिम भरी थी क्‍योंकि हमने अपनी नीलामी में सभी कैटेगरी में बोली ऐसी लगाई थी, जिसमें हमें डर लग रहा था। ऐसे में हम काफी चिंतित थे। हमें पता था कि या तो हमें सभी अधिकार मिल जाएंगे अथवा हम सभी अधिकार खो देंगे।

ऐसी भी चर्चाएं हैं कि स्‍टारसभी स्‍पोर्टिंग ब्रॉडकास्‍ट अधिकार हासिल कर एक तरह से अपना एकछत्र राज्‍य स्‍थापित कर सकता है, इस बारे में आप क्‍या कहेंगे ?

यह बात सही नहीं है। इस बारे में इससे ज्‍यादा मैं कुछ नहीं कह सकता हूं। जब प्रतिद्वंद्वियों द्वारा इस तरह की बात उठाई जाती हैं, तब कोई कुछ नहीं कहता है। पहली बार यह चिंता उस प्‍लेटफॉर्म के मालिक द्वारा जताई गई थी, जिसका अपना बिजनेस एजेंडा था और उसकी चिंता सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के परिप्रेक्ष्‍य में थी जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय महत्व रखने वाले खेलों की प्राइवेट ब्रॉडकास्टर से साझा की हुई फीड को प्रसार भारती अब सिर्फ टेरेस्ट्रियल नेटवर्क (terrestrial network) या फिर डीडी फ्री डिश पर ही दिखा सकता है। इसलिए, उस आदेश से लाभ उठा रहे लोग जरूर इससे प्रभावित होंगे। इसलिए सबसे पहली बात तो ये हैं कि मुझे इस बारे में कुछ कहने की जरूरत नहीं है। दूसरी बात ये कि यदि आप क्रिकेट का दायरा देखेंगे तो इस बारे में बात करना फिजूल है। क्‍योंकि हमें सिर्फ ‘ICC’ और ‘IPL’ के अधिकार मिले हैं। इन दोनों में से ‘ICC’ हर साल नहीं होता है। उदाहरण के लिए वर्ष 2018 में ‘ICC’ टूर्नामेंट नहीं है, सिर्फ ‘IPL’ है। करीब छह साल पहले हमने ‘BCCI’ के अधिकार हासिल किए थे, जो छह महीने से भी कम समय में खत्‍म होने वाले हैं। ऐसे में हमारे लिए यह आखिरी ‘BCCI’ सीजन है, जिसके हमारे पास अधिकार हैं।

ऐसे में मीडिया कंपनियों, टेलिकॉम कंपनियों और ग्‍लोबल टेक्‍नोलॉजी कंपनियों वाले इस प्रतिस्‍पर्द्धी माहौल में ये अधिकार किसे मिलेंगे, कौन जानता है। हमारे पास इंग्लिश क्रिकेट बोर्ड के अधिकार थे, जो खत्‍म हो चुके हैं। इसके अलावा हमारे पास क्रिकेट ऑस्‍ट्रेलिया के अधिकार थे, वे भी खत्‍म हो चुके हैं। हमारे पास साउथ अफ्रीका बोर्ड के अधिकार नहीं है और न ही श्रीलंका के अधिकार हैं। ऐसे में वेस्‍ट इंडीज जैसे अधिकारों को तो मैं गिन भी नहीं रहा हूं। इसलिए बहुत सारा क्रिकेट ऐसा है, जिसके हमारे पास अधिकार नहीं हैं। इसलिए इस तरह की बात करने का कोई आधार नहीं है। फिलहाल हमारे पास जो भी अधिकार हैं, वह सिर्फ कुछ वर्षों के लिए हैं और आईपीएल के अधिकार भी निश्चित समय के लिए हैं। ऐसे में आप कैसे उस चीज पर एकाधिकार जमा सकते हैं जो आपके पास नहीं है अथवा जो हर साल एक जैसी नहीं रहती है।

आईपीएल लीग काफी सफल है और इसकी दर्शक संख्‍या लगातार बढ़ती जा रही है, ऐसे में आपको क्‍या लगता है कि इसके पीछे क्‍या वजह है?

इसके पीछे एक नहीं बल्कि तीन-चार प्रमुख वजह हैं। इनमें पहली और सबसे खास बात तो यह है कि टी-20 पैटर्न क्रिकेट प्रेमियों को काफी आकर्षित करता है। इसे समझना भी काफी आसान है और इसमें समय भी कम लगता है और तीन-चार घंटे में ही खत्‍म हो जाता है। लेकिन यह अकेला ऐसा फॉर्मेट और टूर्नामेंट है, जिसमें श्रेष्‍ठ भारतीय और विदेश खिलाड़ी मिलकर हिस्‍सा लेते हैं। इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों में इसने अपनी गहरी पैठ बनाई है। प्रत्‍येक टीम और फ्रेंचाइजी ने स्‍थानीय लोगों से गहरा नाता जोड़ा है। ऐसे में मुंबई के लोग मुंबई इंडियंसऔर दिल्‍ली में लोग दिल्‍ली डेयरडेविल्‍सको अपनी टीम के रूप में देखते हैं। ऐसे में लोगों का इन टीमों से गहरा जुड़ाव हो जाता है। आखिर में सबसे बड़ी बात तो यही है कि इसका समय फिक्‍स है। इसे शाम को ही रखा जाता है, जब अधिकांश लोग थके-मांदे अपने काम से घर लौटते हैं और कुछ मनोरंजन चाहते हैं। क्रिकेट में टी-20 फॉर्मेट को सभी लोग साथ में बैठकर देख सकते हैं, फिर चाहे वह महिला हो अथवा पुरुष, जवान हो अथवा बुजुर्ग। यही कारण है कि आज की तारीख में आर्इपीएल इतना सफल है।  

आजकल कई और स्‍पोर्टिंग लीग आ रही हैं और लोकप्रिय भी हो रही हैं। ऐसे में क्‍या आपको लगता है कि आईपीएल इससे किसी तरह प्रभावित होगा। इसके अलावा क्‍या क्रिकेट की ओवरडोज का डर भी बना हुआ है?

सबसे पहली बात जो मुझे लगती है, वो यह है कि क्रिकेट की पॉवर पहले से ज्‍यादा हुई है। हम देख चुके हैं कि पिछली साल के मुकाबले इस साल आईपीएल पहले से काफी विशाल था। ऐसे में कुछ लोगों ने सिर्फ से मिथक बना रखा है कि क्रिकेट कुछ ज्‍यादा हो रहा है। आप भी जानते हैं कि ज्‍यादा क्रिकेट नहीं है। जहां पर ज्‍यादा क्रिकेट की बात हो रही है, वह टेस्‍ट मैच क्रिकेट है, जिसका अपना दर्शक वर्ग है। इसके अलावा कुछ ही ओडीआई’ (ODIs) मैच हैं।   

सिर्फ इंग्लिश प्रीमियर लीग’ (English Premier League) ही ऐसी लीग है, जो साल में थोड़ा ज्‍यादा चलती है। ऐसे में मेरा मानना है कि क्रिकेट बहुत ज्‍यादा नहीं हो रहा है। हमें उम्‍मीद करनी चाहिए कि सभी लीग, सभी स्‍पोर्ट्स और क्रिकेट को फायदा होगा।

आईपीएल के डिजिटल अधिकारों में इस बार भारी वृद्धि देखने को मिली है। क्‍या यह वाकई में आश्‍चर्यजनक नहीं था ?

आप बिल्‍कुल सही कह रहे हैं। यह काफी हैरानी भरा था कि दो टेलिकॉम कंपनियों और एक सोशल मीडिया कंप‍नी ने इसके लिए इतनी बड़ी बोली लगाई। उन्‍होंने टेंडर खरीदे थे इसलिए इतनी बोली लगाई लेकिन ये काफी चकित करने वाली थी। मुझे यह भी लगता है कि लोग बोली के लिए काफी तैयारी से अए थे। बोली में शामिल अधिकांश खिलाडि़यों ने अपनी पसंद के क्षेत्र चुन लिए थे और इसके लिए वे काफी रकम चुकाने को तैयार थे।

स्‍टार इंडियाद्वार इस रकम को वसूलने को लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं और लोग अपने-अपने हिसाब से गणित लगा रहे हैं। ऐसे में आपका गेम प्‍लान किया है?

आपको इस तरह की बयानबाजी से दूर रहकर सिर्फ तथ्‍यों पर ध्‍यान देना चाहिए। आपने आईपीए के लिए क्‍यों उस तरह का बेंचमार्क सेट कर दिया है, जिस कीमत पर ये दस साल पहले बेचे गए थे। तब वो बात नहीं थी, जो अब है। जिन लोगों को उस समय अधिकार हासिल हुए थे, वे काफी भाग्‍यशाली थे। लेकिन अब बीसीसीआई का टी-20 गेम 43 करोड़ रुपये में और टेस्‍ट मैच 43 करोड़ रुपये में होता है, लेकिन ये अधिकार भी छह साल पहले दिए गए थे। यदि आज बीसीसीआई के अधिकारों के लिए बोली लगाई जाए तो निश्चित रूप से यह ज्‍यादा पर छूटेगी। इसलिए आप बेंचमार्क नहीं सेट कर सकते हैं। लोग सिर्फ उसी रकम को देख रहे हैं जो दस साल पहले दी गई थी। लेकिन दस साल बाद तो सभी चीजें महंगी हो जाती हैं।

क्‍या आपको लगता है कि 16,347.5 करोड़ रुपये जादुई आंकड़ा नहीं है ?

नहीं,  यह जादुई आंकड़ा तो हैं। लेकिन इसे असामान्‍य नहीं कहा जा सकता है।

 


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