पत्रिका
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02/02/2012
17 वर्षों तक ‘आउटलुक’ पत्रिका के एटिडर-इन-चीफ के पद पर रहने के विनोद मेहता अपनी इस जिम्मेदारी से अब रिटायर हो रहे हैं। हालांकि वे समूह के साथ जुड़े रहेंगे, और बतौर सलाहकार काम करते रहेंगे। गौरतलब है कि विनोद मेहता के संपादकीय नेतृत्व में ही साप्ताहिक पत्रिका, ‘आउटलुक’ को 1995 में लॉन्च किया गया था।हमसे बात करते हुए, 69 वर्षीय विनोद मेहता ने अपनी सेवानिवृति की सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा, “मैं ‘आउटलुक’ समूह के साथ हूं और अगर कोई सोचता है कि मैं अलग हो गया हूं तो वे गलत है
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23/01/2012
आउटलुक ग्रुप में बड़े बदलाव के तहत आउटलुक समूह एवं पब्लिकेशन के अध्यक्ष्ा व पब्लिशर महेश्वर पेरी का कार्यकाल मार्च 2012 में समाप्त हो रहा है, जिसे ध्यान में रखते हुए महेश्वर पेरी समूह की जिम्मेदारियों को किसी और को सुपर्द करने का पूरा मन बना चुके हैं। सर्वसम्मत्ति से पेरी के स्थान पर इंद्रनील रॉय को आउटलुक समूह का पब्लिशर बनाने का विचार किया गया है। इंद्रनील 1996 से इस ग्रुप के साथ जुड़े हुए हैं और वर्तमान में आउटलुक ग्रुप के प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं
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18/01/2012
कालिन्दी मीडिया ग्रुप की साप्ताहिक पत्रिका इतवार जल्द ही लॉन्च होगी। समाचार4मीडिया.कॉम से बात करते हुये इतवार के संपादक श्रीकांत त्रिपाठी ने बताया कि इतवार जो डमी संस्करण हमने निकाला है उसकी सभी सेंटर से काफी अच्छी प्रतिक्रियाएं आयी हैं। उन्होंने बताया कि इतवार के बाद तर्जे जिंदगी नाम की एक लाइफ स्टाइल मैगजीग के प्रकाशन की तैयारियां की जाएंगी। श्रीकांत ने बताया कि 80 पेज की यह पत्रिका रविवार हर सप्ताह पाठकों तक पहुचेंगी
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17/01/2012
‘आउटलुक’ समूह ने अपनी बिजनेस पत्रिका ‘आउटलुक बिजनेस’ को फिर से लॉन्च किया है। नए ‘आउटलुक बिजनेस’ पत्रिका में बिजनेस क्षेत्र की टॉप लेवल की जानकारी विस्तार से दी जाएगी। नई पत्रिका समूह की पत्रिका, ‘आउटलुक प्रॉफिट’ से वित्त क्षेत्र और स्टॉक मार्केट में निवेशकों का कंटेंट शेयर करेगा।इस अवसर पर, ‘आउटलुक’ समूह के प्रकाशक, महेश्वर पेरी ने कहा, “हम लोग इस साल एक व्यापक ‘आउटलुक बिजनेस’पत्रिका को अपने पाठकों के लिए लाकर काफी खुश हैं
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11/01/2012
हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता को सम्मानित किए जाने के लिए दिया जाने वाला पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान इस वर्ष ‘अक्सर’ (जयपुर) के संपादक, डॉ. हेतु भारद्वाज को दिया जाएगा। डॉ. हेतु भारद्वाज साहित्यिक पत्रकारिता के एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं और ‘अक्सर’ से पहले वे ‘समय माजरा’ के संपादक रहे हैं। पुरस्कार के निर्णायक मंडल में सर्वश्री विश्वनाथ सचदेव, विजयदत्त श्रीधर, गिरीश पंकज, रमेश नैयर और सच्चिदानंद जोशी शामिल थे
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10/01/2012
‘इंडिया टुडे’ में सीनियर मैनेजमेंट लेवल पर कुछ परिवर्तन किए गए हैं। ‘इंडिया टुडे’ समूह में 11 वर्षों के लंबे कार्यकाल के बाद से मैल्कम मिस्त्री, पब्लिशिंग डायरेक्टर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मिस्त्री जल्द ही एक नया वेंचर शुरू करने वाले हैं। फिलहाल मार्च के आखिर तक वे संस्थान के साथ बनें रहेंगे। एक और बदलाव के तहत मनोज शर्मा को अब ग्रुप बिजनेस हेड बनाया गया है
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09/01/2012
भारत के सबसे अनुभवी वित्तीय पत्रकारों में से एक सौरव मजूमदार ने ‘नेटवर्क18’ समूह की मैगजीन, ‘एंटरप्रेन्योर’ को एडिटर-इन-चीफ के तौर पर ज्वाइन किया है। ‘एंटरप्रेन्योर’ के अलावा, मजूमदार ‘फर्स्टपोस्ट.कॉम’ से भी जुड़ गए हैं। मजूमदार के पास फाइनेंसियल दैनिकों में महत्वूपूर्ण संपादकीय पदों पर 18 वर्षों का अनुभव है।वे ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’, कोलकता में, रेजिडेंट एडिटर और मुंबई से बाहर के लिए ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’में डिप्टी एडिटर के तौर पर भी कार्य कर चुके हैं
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26/12/2011
जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका मीडिया विमर्श के पांच साल पूरे होने पर निकाला गया वार्षिकांक सोशल नेटवर्किंग साइट्स और उनके सामाजिक प्रभावों पर केंद्रित है। पत्रिका के ताजा अंक की आवरण कथा इसी विषय पर केंद्रित है। इस आवरण कथा का प्रथम लेख माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने लिखा है, जिसमें उन्होंने सोशल नेटवर्किंग साइट्स के सकारात्मक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए इसके सार्थक उपयोग की चर्चा की है
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23/12/2011
इंडियन रीडरशिप सर्वे 2011 की तीसरी तिमाही के आंकड़ों के अनुसार मलयालम भाषा की पाक्षिक पत्रिका ‘वनिता’ नंबर एक की पोजिशन पर काबिज है। दूसरी तिमाही की अपेक्षा इस बार इसकी पाठक संख्या में कमी जरूर आई है। इसकी पाठक संख्या 26 लाख 71 हजार से घटकर 25 लाख 90 हजार रह गई है। वहीं, 20 लाख 25 हजार पाठकों के साथ हिंदी मासिक ‘प्रतियोगिता दर्पण’ दो नंबर पर रही। तीसरे पायदान पर हिंदी पाक्षिक मैगजीन, ‘सरल सलिल’ मौजूद है। इसकी पाठक संख्या में कमी दर्ज की गई है। ‘सरस सलिल’ ने करीब 98 हजार पाठक गवाएं हैं
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23/12/2011
इंडियन रीडरशिप सर्वे 2011 की तीसरी तिमाही के आंकड़ों के अनुसार हिंदी पत्रिकाओं की रीडरशिप में कमी देखी गई है। हिंदी टॉप टेन पत्रिकाओं में दो पत्रिकाओं को छोड़कर आठ पत्रिकाओं ने अपने पाठक गंवाए हैं। एक नंबर पर काबिज ‘प्रतियोगिता दर्पण’ करीब 1 लाख 29 हजार पाठक खोये हैं। इसकी पाठक संख्या अब घटकर 20 लाख 25 हजार हो गई है। दूसरे पायदान पर मौजूद पाक्षिक ‘सरस सलिल’ की पाठक संख्या 20 लाख 39 हजार से घटकर 19 लाख 41 हजार रह गई है। वहीं, तीसरे नंबर पर मासिक पत्रिका ‘मेरी सहेली’ रही जिसने अपनी पाठक संख्या में ग्रोथ दिखाई है
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