विविध भारती ने संगीत की आत्मा को बचाया है – कमल शर्मा

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रेडियो के माध्यम से जन-जन तक संगीत पहुंचाने वाली विविध भारती की लोकप्रियता आज पॉप संगीत के जमाने में भले ही कम हो रही हो, लेकिन विविध भारती का का आज भी अपना मुकाम है। ऐसा नहीं है कि विविध भारती सिर्फ पुराने संगीत को ही तवज्जों देती है, हर वर्ग का ध्यान रखकर कार्यक्रम तैयार करने वाली विविध भारती एक जमाने में संगीत का पर्याय हुआ करती थी। लेकिन आज विविध भारती एफएम चैनलों की दौड़ में कहां है और बदलते जमाने के हिसाब से प्रसारण में क्या बदलाव किए जा रहे हैं यह जानने के लिए हमने बात की विविध भारती के कुछ वरिष्ठ अनांउसर से। 
 
इस बाबत विविध भारती के वरिष्ठ अनाउंसर कमल शर्मा ने समाचार4मीडिया से बात करते हुये कहा कि विविध भारती की शुरूआत तब हुई जब एम चैनल नहीं हुआ करते थे और संगीत चैनल के नाम पर केवल विविध भारती थी। तब भी हमारी कोशिश होती थी कि हम लोगों की पसंद का तो ख्याल रखें ही साथ ही संगीत की आत्मा को जीवित रखने की भी कोशिश करें। तब जो आज के रेडियो जॉकी हैं, उन्हें अनाउंसर कहा जाता था और आज भी उन्हें अनाउंसर ही कहा जाता है, क्योकि रेडियो जॉकी शब्द तो बहुत बाद में आया है। अनाउंसर का काम सिर्फ यह नही होता कि स्क्रिप्ट ली और सुना दी, वे भी बहुत क्रिएटिव काम करते है। हांलाकि यह दौर युवा संगीत का है लेकिन विविध भारती में आज भी क्लासिकल संगीत को ही ज्यादा तब्बज़ो दी जाती है, क्योंकि क्लासिकल संगीत हमारी धरोहर के साथ ही सबका पंसदीदा संगीत भी है। विविध भारती में पूरे परिवार को ध्यान में रखकर ही संगीत प्रस्तुत किया है न कि किसी एक सदस्य के बारे में सोचकर ।
 
उन्होंने यह भी कहा कि हमारी पहली वरीयता यह है कि हम अपनी विरासत को बचा कर रखें। पर ऐसा भी नहीं है कि हम सिर्फ क्लासिकल संगीत को ही वरीयता दे रहे हैं, हम आज के जमाने का और युवाओं के पसंदीदा संगीत को भी प्रस्तुत करते हैं। आज के दौर में हजारों रेडियो जॉकी है लेकिन उन्हें अमीन सायसी, कमल शर्मा, यूनुस खान और निम्मी मिश्रा जैसी लोकप्रियता न मिलने का मुख्य कारण यह है कि आज कम्प्टीशन बहुत बढ़ गया है। आज किसी भी फील्ड में इतने सारे ऑप्शन उपलब्ध हैं कि जगह बनाने में काफी समय लग जाता है। उसके बाद ही शोहरत मिलती है। विविध भारती अपने श्रोताओं और प्रशंसको को अच्छी सेवा तो देना चाहता है, लेकिन वह इसके लिए अपनी धरोहर, संस्कृति और मूल्यों से समझौता नहीं कर सकता है।
 
इसी संदर्भ में विविध भारती के अनाउंसर युनुस खान ने कहा कि हम रेडियो जॉकी नहीं हैं, अनांउसर हैं। हम निवेदन करते हैं और सबसे अहम बात कि हम श्रोताओं के सामने अपनी बात को रखते हैं न कि थोपते हैं। इसलिए आज भी हम उसी परंपरा को निभाते हुए, अपने आपको एनाउंसर ही कहलाना पसंद करते हैं न कि रेडियो जॉकी। विविध भारती में ऐसे संगीत को वरीयता दी जाती है जिससे हमारे श्रोता और प्रशंसक खुद को जुड़ा महसूस करें। फिर संगीत में ठहराव होना भी बहुत ही जरूरी है और ऐसी शमां सिर्फ पुराने गानों के माध्यम से ही बांधी जा सकती है। मेरे हिसाब से भाषा के साथ खिलवाड़ कर शोहरत नही हासिल की जा सकती। जब तक आपकी भाषा में आत्मीयता नहीं होगी और लोग आपसे खुद को जोड़ नहीं पायेंगे तब तक कुछ आप अपनी बात को लोगों के सामने बेहतर तरीके से नहीं रख सकते। आप जो शब्द बोलते हैं उससे आपके स्वाभाव और व्यक्तित्व दोनों की पहचान होती है।  
 
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