दोस्ती की कहानी श्वेता सिंह, कमाल खान और अमृता राय की जुबानी
हर कोई आपका दोस्त नहीं हो सकता है दोस्त वही होता है जो आपका सोलमेट हो या जिसकी रूह के साथ आप जुड़े हो। उस इंसान के साथ रोजमर्रा की जिदंगी से जुड़ी आपकी हजारों यादें होती हैं। इस रिश्ते से जुड़े खुशी और मोहब्बत के इतने सुनहरे पल होते हैं जिन्हें बताया नहीं जा सकता है। मीडिया से जुड़ी हस्तियो ने कुछ ऐसे ही सुनहरे पलों को सुप्रिया अवस्थी के साथ बांटा.....
श्वेता सिंह, एंकर, आज तक : दोस्ती को अगर मैं शब्दों में पिरोना चाहूं कि तो दोस्त वही है, जो जरूरत पर काम आये। आजकल प्रोफेशन की काफी डिमांड है जिसके चलते हम बहुत से दोस्तो से नहीं मिल पाते हैं। लेकिन मेरे सभी दोस्त मेरे आज पास ही है। मेरे आस-पास जो हैं या जिनके साथ मैं काम करती हूं उन सभी के साथ मैं आज दिन भर रहूंगी।

मैं अपनी एक दोस्त का नाम तो नहीं लेना चाहती हूं, पर मुझे आज भी याद है किन्हीं कारणो से मैंने अपना जॉब छोड़ दिया था। मेरे साथ ही मेरी उस दोस्त ने भी वह जॉब छोड़ दिया जो मेरे साथ उसी कंपनी में थी। जिंदगी में सफलता और पैसे से पहले अच्छे दोस्त की तलाश करनी चाहिए।
कमाल खान, ब्यूरो प्रमुख, एन.डी.टीवी, लखनऊ : बहुत सी चीजे हैं जो होती हैं जिनको समझाया नहीं जा सकता है, दोस्ती भी एक ऐसा शब्द है। बहुत अच्छी बात है कि हर मौके के लिए एक खास दिन है लेकिन दोस्ती किसी दिन की मोहताज नहीं है। मेरी जो खास दोस्त है वो मेरी पत्नी रुचि कुमार है। मैं यह दिन उसी के साथ सेलिब्रेट करना चाहूंगा। दोस्ती और मोहब्बत अब किसी कानून या शरहद की मोहताज नहीं है। दोस्ती एक बुनियादी जुबान होती है।
हर कोई आपका दोस्त नहीं हो सकता है दोस्त वही होता है जो आपका सोलमेट हो या जिसकी रूह के साथ आप जुड़े हो। उस इंसान के साथ रोजमर्रा की जिदंगी से जुड़ी आपकी हजारों यादें होती हैं। इस रिश्ते से जुड़े खुशी और मोहब्बत के इतने सुनहरे पल होते हैं जिन्हें बताया नहीं जा सकता है।
अमृता राय, मुख्य संवाददाता, जी न्यूज : दोस्त वह हैं जो सुख-दुख में साथ रहें। मेरे सभी दोस्त हैं लेकिन मेरे खास दोस्तों में मेरे पति मेरी लिए बहुत अहमियत रखते हैं। दोस्ती हमारे रिश्ते में कभी एक दिन के लिए नहीं रही बल्कि हमने इसको अपने जीवन में खूब जिया है और जीते रहेंगे। पति-पत्नि के रिश्ते में दोस्ती एक दिन की नहीं होती है, बल्कि यह ताउम्र चलती रहती है। दोस्त बनाना तो आसान होता है पर दोस्ती निभाना उतना ही मुश्किल होता है।

सच्चे दोस्त की परख संकट के समय ही होती है मुझे भी इसका अहसास तभी हुआ। मेरा बेटा बहुत बीमार था। सभी लोग मुझसे कहते थे आप अपने बेटे को कैसे सभांलती हैं। मेरे पति के साथ की बजह से मुझे कभी यह महसूस नहीं हुआ कि मैं अकेली हूं। बड़े से जीवन का यह बहुत छोटा उदाहरण है। दोस्ती के रिश्ते के साथ हर दिन एक नई याद बनती है और जुड़ती है मेरी सभी दोस्तों के लिए यही कामना है।
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