कई बार नेशनल चैनल रीजनल चैनलों पर निर्भर होते हैं : सुधीर चौधरी
समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो
आज के समय में लोकल मार्केट बहुत ज्यादा बढ़ गया है। नेशनल और इंटरनेशनल न्यूज चैनल के बाद अब न्यूज चैनल रीजनल मार्केट में अपने पंख फैला रहे हैं और यह आने वाले समय में एक अच्छा मार्केट होगा। आज देश भर में करीब 58 रीजनल चैनल हैं। इस मार्केट के बारे में न्यूज नेक्सट के एक सेशन में ‘क्या रीजनल चैनल अपना वादा पूरा कर रहे हैं’ के मुद्दे पर चर्चा की गई ।
इस सेशन को लाइव इंडिया के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी ने मॉडरेट किया और पैनल में करिश्मा इंनेसीएटिव की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट अमिता कर्वाल, महुआ टीवी के सेल्स प्रेसिडेंट निखिल सेठ और टीवी99 के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ मोसस मनोहर शामिल थे।
रीजनल मार्केट के बारे में विचार रखते हुए अमिता कर्वाल ने बताया कि आज के समय में बहुत सारा इंवेस्टमेंट और प्लानिंग रीजनल चैनलों के खाते में जा रहा है। उन्होंने साउथ इंडिया विशेषकर आंध्र प्रदेश का उदाहरण देते हुए अपनी बात कही। उन्होंने बताया कि आंध्रप्रदेश में सबसे ज्यादा रीजनल चैनल हैं और ये न्यूज चैनल बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। इसकी वजह एक ही है कि ये चैनल उपभोक्ताओं की नब्ज को पकड़ चुके हैं उन्हें पता है कि वहां के उपभाक्ताओं को क्या चाहिए। उन्होने रीजनल चैनलों को लेकर अपना एक अलग दृष्टिकोण बना लिया है।
मोसस मनोहर ने बताया कि रीजनल चैनलों में पत्रकारिता के एथिक्स ज्यादा देखने को मिलते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि अक्सर छोटे चैनलों के बारे में सोचा जाता है कि ये चैनल छोटे हैं लेकिन ये चैनल ही लोकल विज्ञापनदात्ताओं की इच्छाओं की पूर्ति करते हैं और छोटी-बड़ी हर घटना को ये कवर करते हैं। उन्होंने कहा कि हम कई नेशनल चैनलों की तरह अपनी जिम्मेदारी नहीं भूलते जो प्राइम टाइम में खबरों की जगह डब्लयू-डब्लयू-ई दिखाते हैं।
महुआ के सेल्स प्रेसिडेंट निखिल सेठ ने बताया कि रीजनल चैनल रिटेलर्स, बिल्डर्स, स्टील बार फर्म और शिक्षा संस्थानों के लिए अपने लोकल उपभोक्ताओं के लिए अपनी बात पहुंचाने का एक अच्छा साधन बन कर उभरे हैं।
सुधीर चौधरी ने बताया कि कई बार ऐसी स्थितियों से इंकार नहीं किया जा सकता कि नेशनल चैनल रीजनल चैनलों पर निर्भर रहते हैं। उन्होंन अपनी बात मैंगलोर प्लेन क्रेश का उदाहरण देते हुए स्पष्ट की। उन्होंन बताया कि इस स्टोरी के लिए नेशनल चैनल पूरे तरीके से रीजनल चैनलों पर निर्भर थे।
रीजनल चैनलों को वैसे तो छोटे चैनलों के रूप में देखा जाता है, जबकि वो टीआरपी की होड में भी शामिल होने की कोशिश करते हैं। रीजनल चैनलों की तारिफ करते हुए मनोहर ने बताया कि एक नेशनल चैनल ने राजस्थान में चुनावों को देखते हुए वहां अपना ब्यूरो खोला लेकिन चुनाव के दो महीने बाद ही उस ब्यूरो को बंद कर दिया गया। उनका कहना था कि ऐसी हरकते करके नेशनल चैनल अपनी खुद की बिरादरी को बदनाम कर रहे हैं लेकिन रीजनल चैनल ऐसी हरकतें नहीं करते।
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