वुमेन मैगजीन के पाठकों की संख्या में 2009 के राउंड वन से 14 प्रतिशत की कमी
समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो
इंडियन रीडरशिप सर्वे के द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं की क्षेत्रीय पत्रिकाओं के पाठकों की संख्या में तेजी से कमी दर्ज की गई है। 2009 के राउंड वन के एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार, महिलाओं के पत्रिकाओं के पाठकों की संख्या 81 हजार 83 लाख थी जो 2010 की दूसरी तिमाही में घटकर 72 लाख 49 हजार हो गई और फिर 2011 के दूसरी तिमाही के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, दो वर्ष के अंदर में महिलाओं पर आधारित क्षेत्रीय भाषाओं के पाठकों में 14 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
हिंदी में महिलाओं की पत्रिकाओं के पाठकों की संख्या में, एक वर्ष के अंदर में 6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार, 2009 के पहले राउंड में जहां हिंदी महिलाओं की पत्रिकाओं के पाठकों की संख्या 57 लाख 73 हजार थी वह 2010 के दूसरी तिमाही में बढ़कर 57 लाख 79 हजार हो गई और फिर 2011 के दूसरी तिमाही में घटकर 54 लाख 35 हजार रह गई।
अंग्रेजी में महिलाओं की पत्रिकाओं के पाठकों की संख्या 2011 की दूसरी तिमाही के एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार, 5 लाख 49 हजार है जो 2010 की दूसरी तिमाही के अनुसार, 5 लाख 66 हजार पाठक संख्या से तीन प्रतिशत कम हो गई है।
‘वनीता’ (मलयालम) मैगजीन भारत में महिलाओं के टॉप टेन पत्रिकाओं में नंबर वन के पायदान पर शामिल है। 2011 की दूसरी तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, एवरेज इश्यू रीडरशिप 26 लाख 71 हजार है जो 2010 की दूसरी तिमाही में 27 लाख 51 हजार पाठक संख्या से तीन प्रतिशत कम है। लेकिन दो वर्षों में इस मैगजीन के पाठकों की संख्या में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ‘मेरी सहेली’ दूसरे स्थान पर है, के पाठकों की संख्या 2011 की दूसरी तिमाही के अनुसार, 11 लाख 74 हजार है वहीं 2010 की दूसरी तिमाही में इसके पाठकों की संख्या 12 लाख 65 हजार थी। इस तरह, इसे 7 प्रतिशत की कमी झेलनी पड़ी है। इस मैगजीन को दो वर्ष के भीतर 51 हजार पाठकों यानी 4 प्रतिशत की कमी झेलनी पड़ी है। महिलाओं की पत्रिका, ‘गृहलक्ष्मी’ तीसरे स्थान पर है और इसे 13 प्रतिशत पाठकों की कमी हुई है। 2010 की दूसरी तिमाही में इसके पाठकों की संख्या 11 लाख 60 हजार थी जो 2011 की दूसरी तिमाही में घटकर 10 लाख 10 हजार रह गई है। दो वर्षों के अंदर में इसके पाठकों में कोई बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई है।
‘गृहशोभा’ (हिंदी) पत्रिका चौथे स्थान पर है और इसके पाठकों में एक वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत की कमी आई है, हालांकि दो वर्षों के अंदर में इसे 24 प्रतिशत यानी 3 लाख 22 हजार पाठकों की कमी आई है।
‘वनिता’ (हिंदी) पत्रिका पांचवे स्थान पर है और इसके पाठकों की संख्या 7 लाख 64 हजार है। इस पत्रिका के पाठकों की संख्या में सकारात्मक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2010 के दूसरी तिमाही के अनुसार, पाठकों की संख्या 7 लाख 2 हजार थी। इस तरह 9 प्रतिशत यानी 1 लाख 52 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2009 में इसके पाठकों की संख्या 6 लाख 12 हजार थी इस तरह से इसके पाठकों की संख्या में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
दूसरी तरफ, ‘सरिता’, ‘गृहलक्ष्मी’, ‘अवाल विकातन’, ‘सानंदा’ के पाठकों में नकारात्मक कमी देखी गई है।
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