इंडियन मैगजीन कांग्रेस 2010 में रेवन्यू जुटाने के प्रयासों पर चर्चा

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समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो 
इंडियन मैगजीन कांग्रेस का छठा अधिवेशन मुंबई में 6 सितंबर, 2010 को शुरू हुआ। कांग्रेस का आयोजन एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन (एआईएम) के द्वारा किया गया है, कांग्रेस में मैगजीन इंडस्ट्री से संबंधित अनेकों मुद्दों पर चर्चा की जायेगी। पहले पैनल में चर्चा का विषय ‘एडिटोरियल चैलेंजेज इन ए वर्ल्ड ऑफ कनवर्जेंस’ था। सत्र की अध्यक्षता साइबर मीडिया के प्रेसिडेंट और एडिटर-इन-चीफ प्रशांतो कुमार रॉय ने की। पैनल में मैगजीन इंडस्ट्री के नामी संपादक शामिल थे इनमें फोर्ब्स इंडिया के संपादक इंद्रजीत गुप्ता, रीडर्स डाइजेस्ट इंडिया के मुख्य संपादक मोहन शिवानंद, पीपल के संपादक सायरा मेंजेज और फिल्मफेयर के संपादक जीतेश पिल्लई शामिल हैं।
 
मीडिया की दुनिया में कनवर्जेंस एक रोचक एवं महत्वपूर्ण विकास है। हालांकि, बोर्ड के प्रकाशक इसको लेकर सतर्क हैं और अपने ब्रांड का फायदा उठाने के लिए जैसा वे चाहते हैं अपनी इच्छा अनुसार, सभी माध्यमों में लाभ उठाने में सक्षम नहीं हो पाये हैं। प्रशांत कुमार रॉय ने सत्र की अध्यक्षता करते हुए कनवर्जेंस के उदाहरण देते हुए ब्रांड पर इसके प्रभावों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कनवर्जेंस के कुछ उदाहरणों में प्रिंट, वेब, मोबाइल, ईवेंटस और सोशल मीडिया है। उन्होंने बताया कि कैसे यह सभी एक ही डोमेन का हिस्सा हैं।
 
उन्होंने कहा, “यह जरूरी है कि सभी को एक साथ लाया जाये। हालांकि, सवाल यह है कि सभी को एक साथ लाने पर कैसे इसके फायदे उठाये जायें। उदाहरण के लिए, भारत में 35 करोड़ मोबाइल के उपभोक्ता हैं, लेकिन मोबाइल के बेस के लिए बहुत कम काम किया गया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संपादकों को यह जानना जरूरी है कि, राजस्व में कैसे वृद्धि की जाये। उन्होंने बीबीसी का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे बीबीसी ने कनवर्जेंस का प्रयोग करते हुए अपने कंटेंट का उपयोग किया है। साथ ही उन्होंने हफिंगटोन का उदाहरण देते हुए कहा, “ यह उन लोगों के लिए बाइबल है जो सोशल मीडिया के साथ प्रयोग करना चाहते हैं।”
 
‘फोर्ब्स इंडिया’ के बारे में बोलते हुए, इंद्रजीत ने कहा, कि कैसे शुरू से ही विभिन्न माध्यमों के बीच फोर्ब्स इंडिया ब्रांड ने परिस्थिति का फायदा उठाया। कई अन्य ब्रांडो के विपरीत, ‘फोर्ब्स इंडिया’ (नेटवर्क 18 के अंतर्गत) का अपना कोई विरासत नहीं था इसलिए इसने अलग तरीकों से चीजों को देखने की शुरुआत की। गुप्ता ने कहा, “हमने महसूस किया कि अगर हम प्रिंट से ही बंधे रह गए तो हम प्रासंगिक नहीं रह पायेंगे क्योंकि आज का उपभोक्ता विभिन्न प्लेटफॉर्म पर भी मौजूद है। इसलिए हमने अन्य माध्यमो का भी फायदा उठाने की कोशिश की।” गुप्ता ने आगे कहा, “हम लोग पत्रकारिता के बारे में स्पष्ट थे और शुरू से हमने प्रिंट पर ध्यान केंद्रित किया, क्योंकि यह हमारी पहचान थी।”
 
‘फिल्मफेयर’ के जितेश पिल्लई ने समझाया कि कैसे विभिन्न माध्यमों का उपयोग करके ‘फिल्मफेयर’ ब्रांड ने उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया और रिश्तों का आनंद लिया। “सोशल साइटस के माध्यम से, हम श्रोताओं की प्रतिक्रिया जानने में सक्षम हुए हैं। उन्होंने कहा, सोशल माध्यम का उपयोग करके उपभोक्ताओं को ब्रांड के करीब लाने में मदद मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल और मोबाइल का उपयोग करके उपभोक्ता सभी संभव तरीकों से स्थिति का फायदा उठाने में सक्षम हैं।”
 
मोहन शिवानंद ने अपने ब्रांड ‘रीडर्स डाइजेस्ट’ के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि कैसे ब्रांड ने सफलतापूर्वक 50 वर्ष पूरा किया। आगे उन्होंने कहा कि मीडिया के विभिन्न माध्यमों के कनवर्जेंस से जिंदगी कितनी कठिन हो गई है। ‘रीडर्स डाइजेस्ट’ ने प्रिंट माध्यम के साथ डिजिटल माध्यम का उपयोग करके कंटेंट को अपने उपभोक्ताओं के बीच कैसे पहुंचाया है। उन्होंने आगे कहा, “हम डिजिटल पर अधिक से अधिक कंटेंट देते हैं जिससे उपभोक्ता प्रिंट माध्यम पर वास्तविक कंटेंट के प्रति आकर्षित हों। इससे हमें अधिक से अधिक सदस्यता प्राप्त करने में आसानी होती है। हमारे पास डिजिटल माध्यम पर सभी कंटेंट नहीं है। कंटेंट का प्रीमियम महत्वपूर्ण है।”
 
‘पीपल’ मैगजीन की सायरा मेंजेज ने कहा, “स्टोरी के कारोबार में एक और डब्ल्यू कार्य कर रही है, जो ‘व्हीच स्टैंड फॉर व्हीच प्लेटफॉर्म’ को बताता है। आज, हम सभी भर्ती प्रक्रिया के दौर से गुजर रहे हैं। हम मीडिया के विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को अपने साथ जोड़ रहे हैं क्योंकि यह संपादकीय संभावनाओं की दृष्टि से बेहतर विकल्प है।”
 
ब्लॉगिंग, पॉडकास्टिंग, ईवेंटस और कई अन्य मीडिया कनवर्जेंस के विभिन्न नए रूप हैं। सभी संपादकों को जरूरत है कि कंटेंट का इस तरह से प्रयोग करें कि राजस्व के नए स्रोत उत्पन्न हो सकें। प्रकाशकों और मीडिया मालिकों को जरूरत है मीडिया के विभिन्न रूपों को एक साथ लाकर उनका संतुलित उपयोग किया जाये।
 
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