मीडिया की हिंदी और हिंदी की मीडिया का भाषा बैर

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मीडिया की दुनिया में इन दिनों भाषा का सवाल काफी गहराता जा रहा है। हम अगर बात हिंदी मीडिया और मीडिया की हिंदी की करें तो आये दिन लोग गलतियां निकालते नजर आते हैं। आइये जानते है कुछ तथ्यों को जिनके कारण हिंदी मीडिया दिनों-दिन अपनी हिंदी खराब कर रही हैं। भाषा के विभिन्न पहलों पर संवाददाता शिशिर शुक्ला ने वरिष्ठ पत्रकारों से बात की।
 
डेली न्यूज एक्टिविस्ट के संपादक निशीथ राय का कहना था कि पत्रकारिता की भाषा का स्तर दिनों-दिन गिरता जा रहा हैं। भाषा के स्तर का कोई मापदंड नही है, खास कर प्रिन्ट मीडिया की भाषा मे जिम्मेदारी और अनुशासन का अभाव है जो कि बहुत आवश्यक है। जहां तक हिंग्लिश की बात है, बहुत से शब्द हिंदी में आत्मसात कर लिये गये हैं जैसे ट्रेन आदि। लेकिन जब बहुत ज्यादा हिंदी-अंग्रेजी का घालमेल होगा तो यह मजाक का विषय बनेगा। इसके लिए वे लोग ही जिम्मेदार है जो इसे परोस रहे है। 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाने के अलावा क्या कोई जिम्मेदारी नही है इनकी।
 
ईटीवी उत्तर प्रदेश के न्यूज एडिटर बृजेश मिश्रा का कहना था कि इस में कोई शक नहीं कि मीडिया की भाषा का स्तर गिरा हैं। आज के समय में प्रिन्ट और टीवी दोनों अपनी मूल भाषा से विमुख हुये है। जब कोई पीढी अपनी भाषा से भटकती है तो वह बहुत कुछ खोती है हम सब को टीआरपी के पीछे न भाग कर भाषा को लेकर अपना-अपना दायित्व निभाना चाहिये जिससे हम अपनी विरासत को संभाल पायेंगे और इसे आने वाली पीढी तक पहुंचा पायेंगे।
 
 
वरिष्ठ पत्रकार शेष नरायण सिंह ने कहा कि रेडियो और टीवी ने भाषा को अधिक प्रभावित किया हैं। जिसके कारण भाषा कि हैसियत खत्म होती जा रही है इसके जिम्मेदार संस्थानों के शीर्ष पर बैठे लोग हैं वो ध्यान नही देते। वो समझते है कि हम एक नए व्याकरण को जन्म दे रहे हैं। जो कि बहुत गलत है इसके गंभीर परिणाम होगें।
 
 
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टिप्पणी

media ki hindi

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ajay