मीडिया में प्रतिभाओं की कमी है: उदय शंकर

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समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो
फिक्की फ्रेम्स में अपने संबोधन में स्टार इंडिया के सीईओ, उदय शंकर ने कहा कि कंटेंट की गुणवत्ता के लिए आजकल सक्षम प्रतिभाओं की बहुत बड़ी कमी है। मीडिया एंड एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की आलोचना करते हुए उदय शंकर ने न्यूज़ ब्रॉकास्टिंग की समस्याओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “अधिकांश समय यह देखने को मिलता है कि लोग कंटेंट को मजाक बना देते हैं, टीआरपी की अंधी दौड़ में शामिल होकर वे इसका नकल करते हैं, जो सही नहीं है। अधिकांश मामलों में यह सक्षम प्रतिभाओं की कमी के कारण होता है।”
 
उदय शंकर का कहना था कि मीडिया कंपनियों द्वारा इस इंडस्ट्री की जरूरतों के लिए प्रतिभा एवं प्रशिक्षण की गुणवत्ता के लिए निवेश पर उचित ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान बिजनेस मॉडल में कुछ ही कंपनियां हैं जिन्होंने अपने लाभ का कुछ हिस्सा प्रतिभाओं के विकास पर खर्च किया जिससे की वे इस प्रतिस्पर्धी माहौल में टिक सकें। उन्होंने आगे कहा कि प्रतिभाओं की कमी का प्रभाव आज कंटेंट पर स्पष्ट रुप से देखा जा सकता है। शंकर ने आगे कहा, “एक समान कंटेंट की पुनरावृति हो रही है। ‘केबीसी’ इसका एक उदाहरण है। ‘स्टार’ ने भारत में इस फॉर्मेट को वर्ष 2000 में लाया था और अभी तक, दूसरे चैनलों के द्वारा इस तरह के कार्यक्रम का प्रसारण हो रहा है। और दर्शक इसे देख रहे हैं, इसलिए नहीं कि दर्शकों को यह कार्यक्रम पसंद हैं बल्कि इसलिए कि उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है।”
 
उदय शंकर ने छोटे मार्केट में टेलीविजन कंटेंट की पायरेसी पर अपनी बातों को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि इस तरह के पायरेटेड कार्यक्रम को रोकने के लिए सही व्यवस्था का अभाव है। उन्होंने कहा, “हम शायद एक उदाहरण हैं, जहां हमारे कंटेंट की चोरी (पायरेसी) होती है और हम कैरिज शुल्क का भुगतान करते हैं।”
 
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टिप्पणी

मीडिया में प्रतिभाओं की कमी है: उदय शंकर

मीडिया में प्रतिभा कि कमी नहीं . प्रतिभा को पहचानने वालों कि कमी है. भारत जैसे १.२ करोड़ कि जनसंख्या में आपको किस छेत्र में प्रतिभा कि कमी महसूस हो रही है . यहाँ प्रतिभा को सम्मान नहीं मिलता इसलिए वे बेकार बैठना ज्यादा पसंद करते हैं .

मीडिया में प्रतिभाओं की कमी है: उदय शंकर

उदयशंकर जी मै आपको बहुत दूरदर्शी समझता था ..मगर मेरी सोच गलत निकली. मीडिया में प्रतिभाओं की कमी नहीं है ..लेकिन उन्हें प्लेटफोर्म नहीं मिल पाता. इसकी वजह मीडिया के उच्च पदों पर बैठे लोग है जो वातानुकूलित केबिन में बैठ कर प्रतिभाशाली युवाओं को सतही लेवल पर परखने की कोशिश करते है ....और जिन्हें अपने अलावा दुसरे किसी आदमी में प्रतिभा नजर नहीं आती.