क्या मीडिया एजेंसीज को मीडिया ऑनर होना चाहिए
समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो
रवि किरन ने इस विषय के विपक्ष में बोलते हुए कहा कि मीडिया एजेंसीज को मीडिया ऑनर नहीं होना चाहिए। हो सकता है कि कल तक यह बात सही रही हो, लेकिन अब मीडिया एजेंसीज औऱ मीडिया मालिकों को एक ही भूमिका में नहीं देखा जा सकता। आज आइपीटीवी, ब्रॉडबैंड और दूसरे कंटेंट के कारण हमारी पहुंच बढ़ रही है, जिसके चलते क्लाइंट्स का मीडिया एजेंसीज के साथ 100 करोड़ तक की डील कर रहे हैं। लोग आपको इतना पैसा दे रहे हैं, क्योंकि उन्हें आप पर विश्वास है आपकी भूमिका पर विश्वास है। यह केवल लॉस और प्रॉफिट की बात नहीं है, यह क्लाइंट और एजेंसीज के बीच का रिश्ता है।
एजेंसीज ह्यूमन विहैवियर को समझती हैं इसलिए क्लाइंट्स हमारे पास आते हैं। आप एक ऑनर होकर मीडिया क्लाइंट्स के पास जाएं और बिजनेस तलाशें तो वह अलग बात है लेकिन जैसा मैंने पहले भी कहा कि इसके भूमिकाओं का संकट पैदा होगा और फिर ऐड का संकट पैदा होगा।
शशि सिन्हा ने इसके पक्ष में कहा कि मीडिया एजेंसीज को मीडिया ऑनर होना चाहिए कहा क्योंकि मीडिया एजेंसीज और मीडिया ऑनर दोनों ही पैसा कमाते हें। अगर मीडिया एजेंसीज के लोग मीडिया ऑनर बनते हैं तो उनका उद्देश्य पैसा कमाना है न कि एक-दूसरे के बिजनेस को ओवरलैप करना।
हम लोग 20 साल से इस इंडस्ट्री में हैं और आज इस तरह के सवाल बड़े कन्फ्यूजिंग लगते हैं। ऐसा नहीं है कि मीडिया कंपनी के मालिक यह नहीं जानते कि मालिक और क्लाइंट्स के बीच बैलेंस कैसे स्थापित किया जाए। हवास और डेन्ट्सू जैसी कंपनियां मीडिया ट्रेडर पहले हैं मीडिया एजेंसी बाद में।
शशि सिन्हा के पक्ष में अपनी बात रखते हुए मिंडाशेयर एपैक के सीईओ आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि मीडिया ऑनर कौन हैं जो कंटेंट देते हैं या फिर जो कंटेट बनाते हैं। अगर आप फेसबुक पर लॉगिन करते हैं तो आप मीडिया ऑनर बन गए क्योंकि आप मीडिया बना रहे हैं इसलिए प्रसार के दौर में यह कहना मुश्किल है कि मीडिया एजेंसीज को मीडिया ऑनर नहीं होना चाहिए।
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