भारत के साथ हाथ मिलाने के लिए इससे बेहतर समय नहीं: अरूण पुरी
समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो
जैसा कि सभी लोगों ने 38 वीं एफआईपीपी वर्ल्ड मैगजीन कांग्रेस के उद्घाटन समारोह 10 अक्टूबर, 2011 को आशा लगा रहे थे कि 11 अक्टूबर, 2011 को दिल्ली में वर्ल्ड मैगजीन कांग्रेस में काफी गहमा-गहमी रहेगी। अरूण पुरी, सीईओ, ‘इंडिया टुडे’ समूह ने वर्ल्ड कांग्रेस में शामिल प्रतिनिधियों को याद दिलाया कि भारत वैश्विक मीडिया इंडस्ट्री के विकास के नए युग में मजबूती से कदम रख चुका है।
पुरी के अनुसार, “जब मैंने 2000 में एफआईपीपी को ज्वाइन किया था तो इंडियन मीडिया जगत को विश्व के लिए खोला नहीं गया था। और सत्य यह है कि 38 वीं एफआईपीपी वर्ल्ड मैगजीन कांग्रेस का आयोजन भारत में हो रहा है, इसका सीधा सा अर्थ है कि भारत का मीडिया जगत वैश्विक परिदृश्य में कदम रख चुका है। एफआईपीपी चेयरमैन के रूप में इसका आयोजन मेरे लिए गर्व की बात है।”
जब विश्व के अधिकांश हिस्से में समाचारपत्रों का प्रकाशन बंद हो रहा है, तो भारत में अकेले दिल्ली शहर में ही 16 अंग्रेजी के समाचारपत्रों का प्रकाशन होता है। पुरी के अनुसार, “विश्व के किसी भी अन्य हिस्से में यह संभव नहीं है।” भारत में 58 हजार मैगजीन रजिस्टर्ड हैं और अभी भी क्षेत्रीय प्रकाशनों को पूरी तरह से उपयोग में नहीं लाया गया है। भारत की जनसंख्या और जनसांख्यिकी के तथ्यों के अनुसार, देश में, अभी भी शिक्षा का स्तर 73 प्रतिशत है और इसमें लगातार वृद्दि दर्ज की जा रही है। इसका सीधा अर्थ है कि भारत में मैगजीन का भविष्य उज्ज्वल है।
पुरी ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा कि भारत विविधताओं से भरा हुआ देश है। एक ही समय में भारत में अलग-अलग युगों का अद्वितीय मिश्रण है। एक तरफ जहां, पारंपरिक मीडिया का विकास काफी तेज गति से हो रहा है तो दूसरी तरफ, डिजिटल मीडिया भी अपने लिए स्थान बना रही है।
भारत में, इंटरनेट का तेजी से विकास हो रहा है और मोबाइल के तेजी से विस्तार ने विश्व भर का ध्यान आकर्षित किया है।
वर्तमान में, इंडिया में मोबाइल धारकों की संख्या 85 करोड़ है और इसमें प्रत्येक महीने 1 करोड़ मोबाइल धारकों की संख्या बढ़ रही है। इसमें से स्मार्ट फोन का हिस्सा 25 प्रतिशत है। भारत, फेसबुक का तीसरा सबसे बड़ा उपयोगकर्ता देश है।
पुरी के अनुसार, इन नंबरों के अलावा भी भारत में बढ़ने की ललक और सामूहिक शक्ति निहित है। और मैगजीन इंडस्ट्री भी सामूहिक शक्ति के प्रभाव को महसूस कर रही है।
मैगजीन बिजनेस के सामने कई चुनौतियां और अवसर है। इतनी सारी चुनौतियां और अवसर मैगजीन इंडस्ट्री के सामने कभी नहीं थे। मैगजीन इंडस्ट्री चुनौतियों एवं नए वास्तविकताओं का सामना करने को तैयार है।
पुरी के अनुसार, तकनीक ने मैगजीन इंडस्ट्री के सामने काफी अवसर तैयार किए हैं।
पुरी के अनुसार, मैगजीन प्रकाशन भी इन चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार हैं। 38 वीं एफआईपीपी वर्ल्ड मैगजीन कांग्रेस में उन सभी बातों पर चर्चा जारी है जो मैगजीन इंडस्ट्री को प्रभावित करते हैं। यह एक आदर्श घटना है और इसके पीछे कारण यह है कि 86 वर्ष पूर्व पहला वर्ल्ड मैगजीन कांग्रेस आज ही के दिन पेरिस में आयोजित किया गया था। जिसके तहत, वैश्विक स्तर पर मैगजीन जगत में होने वाले कार्यों पर चर्चा की गई थी।
एफआईपीपी प्रेसिडेंट और सीईओ क्रिस एल्वेलीन के कहे गए शब्दों- वर्ल्ड मैगजनी कांग्रेस वैश्विक स्तर पर हो रहे कार्यों को देखने-समझने का अवसर प्रदान करता है, हवाला देते हुए पुरी ने कहा, “भारत के साथ हाथ मिलाने के लिए इससे बेहतर समय नहीं हो सकता।”
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