डिजिटलीकरण की दिशा में मंत्रालय को काम करना होगा: अंबिका सोनी
समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो
दिल्ली में इस सप्ताह आयोजित संगोष्ठी में अध्यक्षता करते हुए, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री, अंबिका सोनी ने भारतीय प्रसारण उद्योग के डिजिटलीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। संगोष्ठी में टेलीविजन उद्योग के विभिन्न क्षेत्र के लोगों ने शिरकत की। उनमें चैनल प्रमुख, प्रोड्यूसर, मार्केटिंग प्रमुख, वित्तीय विशेषज्ञ, कलाकारों के साथ, सरकारी निकायों के प्रतिनिधियों ने इस उद्योग के सामने आने वाली समस्याओं के हल पर चर्चा की। राजनैतिक क्षेत्र से वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री, जनता दल यूनाइटेड के सांसद शरद यादव से शामिल होने वाले गणमान्य सदस्यों में थे। इस संगोष्ठी का आयोजन इंडियन टेलीविजन एकेडमी ने किया।
संगोष्ठी मेंअंबिका सोनी ने भारतीय प्रसारण उद्योग के तेजी से डिजिटलीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “उन्होंने कहा कि तंत्र को दुरूस्त करने की जरूरत है जिससे डिजिटलीकरण की प्रक्रिया धीमी न हो। हमें समझने की जरूरत है कि देश में प्रसारण एनालॉग से होता है और यह शक्तिशाली लोगों द्वारा नियंत्रित है।” उन्होंने आगे कहा, अगर डीटीएच की ज्यादा मांग होती है तो सरकार अधिक ऑपरेटर्स को अनुमति दे सकती है और इसके लिए वे ट्राई के साथ बातचीत कर रहे हैं।
राजदीप सरदेसाई, एडिटर, सीएनएन-आईबीएन ने टीवी न्यूज़ इंडस्ट्री से संबंधित एक गंभीर मुद्दा को उठाया जब, उन्होंने कहा कि न्यूज़ चैनलों को विभिन्न राज्यों में केबल ऑपरेटर्स से सुरक्षा की जरूरत है, जो कभी-कभी किसी चैनल के खिलाफ हो जाते हैं और एक क्षेत्र में प्रसारण बंद कर देते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार को ऐसे लोगों के बारे में पता करना चाहिए जो इस क्षेत्र में दखल देते हैं, उन्हें जवाबदेह होने की जरूरत है।
इस बीच, रजत शर्मा, चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ, इंडिया टीवी ने इस मुद्दे पर बोलते हुए कहा, “राजनीतिक दलों के नेता और पार्टियों का विभिन्न शहरों और राज्यों में केबल पर नियंत्रण है, जो निश्चित रूप से उद्योग के लिए गंभीर खतरा है। 26/11 के बाद हम लोगों (न्यूज़ चैनलों के प्रतिनिधियों) ने एक-दूसरे से बातचीत शुरू किया और इसके परिणामस्वरूप कुछ ही समय में हमारे कंटेंट की गुणवत्ता में सुधार हुआ। अब, विभिन्न चैनलों के संपादकों के बीच कुछ समय के अंतराल पर बातचीत होती रहती है।”
जी कृष्णन, टीवी टुडे के सीईओ ने टीवी न्यूज़ चैनलों के ताजा राजस्व स्रोत के लिए दबाव पर बोलते हुए कहा, सरकार टीवी चैनलों को डिजिटलीकरण की अनुमति क्यों नहीं देती है? “हम लोग सदस्यता और विज्ञापन राजस्व का 50-50 प्रतिशत हिस्सा चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सदस्यता राजस्व का मुद्दा जल्द ही निर्धारित होना चाहिए।”
टीवी मीडिया इंडस्ट्री के वर्तमान परिदृश्य से निराश रविशंकर प्रसाद ने कहा, “टीआरपी की अंधी दौड़ को अलोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है। टीआरपी रिकॉर्ड सार्वजनिक जांच के अधीन होना चाहिए। मौजूदा स्थिति अच्छी नहीं है। हमें ईमानदार होकर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए उसके बाद जमीनी हकीकत को समझना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि जब कैस (कंडीशनल एक्सेस सिस्टम) लागू किया जा रहा था तो प्रसारक इसके खिलाफ थे। उन्होंने कहा कि वह भारत में छोटे गांवों सहित कई स्थानों पर गए है और पाया है कि लोग टीवी चर्चा, कार्यक्रम और सास-बहु शो का आनंद लेते हैं। उन्होंने कहा “यह पिछले एक दशक में इंडियन मीडिया इंडस्ट्री के विकास का संकेत है।”
उदय शंकर, सीईओ, स्टार इंडिया ने सेल्फ रेगुलेशन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि टीवी मीडिया इंडस्ट्री के लिए एक अच्छा कदम है। उन्होंने कहा, “इंडस्ट्री को प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए जिम्मेदारीपूर्वक सेल्फ रेगुलेशन को बनाये रखना होगा।”
टैम और उसकी कार्यप्रणाली पर विभिन्न आरापों का जवाब देते हुए, एल वी कृष्णन, सीईओ, टैम मीडिया रिसर्च ने कहा, डाटा का वर्तमान स्वरूप उद्योग जगत के निर्माण में सहायता कर सकता है। उन्होंने टैम के शोध को बताते हुए कहा, “80 प्रतिशत लोग सिर्फ 40-45 चैनल ही देखते हैं। 99 प्रतिशत विज्ञापन 110 चैनलों तक ही सीमित है। 85 प्रतिशत न्यूज़ सिर्फ शीर्ष के दस चैनलों पर ही देखा जाता है।” उन्होंने आगे कहा कि अगर उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाये तो वे पूर्वोत्तर राज्य और जम्मू-कश्मीर राज्य में भी काम करना चाहते हैं। कृष्णन ने कहा, “हम लोग सरकार और उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं।”
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