स्टिंग ऑपरेशन पर सीबीआई का फंदा
समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो
केंद्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए स्टिंग ऑपरेशन करने पर पत्रकारों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप में मुकदमा चलाया जा सकता है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कोई पार्टी सरकारी कर्मचारियों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए स्टिंग ऑपरेशन करती है, तो उस पर भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा चलाया जा सकता है। अगर इसकी सूचना पहले या तुरंत बाद एजेंसी को नहीं दी जाती।
गौरतलब है कि पत्रकार अरविंद विजयमोहन और व्यवसायी रजत प्रसाद द्वारा न्यायाधीश अल्तमश कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ में एक याचिका दायर की गई है। ये दोनों एक स्टिंग ऑपरेशन करने पर मुकदमे का सामना कर रहे हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 30 मई 2008 को इनकी याचिका को खारिज कर दिया था, इससे पहले केंद्रीय जांच एजेंसी के द्वारा स्थापित विशेष अदालत में इन्हें आरोपित किया गया था।
वीडियो में पूर्व केंद्रीय मंत्री, दिलीप सिंह जूदेव को छत्तीसगढ़ में खनन अधिकार देने के लिए 5 नवंबर 2003 को एक आस्ट्रेलियाई कंपनी से 9 लाख रुपये लेते हुए दिखाया गया था। याचिका कर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने पत्रकारों का पक्ष रखते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार का खुलासा करने के लिए पत्रकारों पर अभियोग नहीं लगाया जा सकता है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि एनडीटीवी के द्वारा अपराधी और अभियोजक पक्ष के बीच सांठ-गांठ को उजागर करने के लिए स्टिंग ऑपरेशन करने पर सुप्रीम कोर्ट ने चैनल की सराहना की थी और पत्रकारों पर कोई आरोप नहीं लगाया गया था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि जब स्टिंग ऑपरेशन करने वाली पार्टी का सार्वजनिक हित के अलावा भी कोई निहित होगा या कोई और स्वार्थ होगा, तब स्टिंग ऑपरेशन करने वाली पार्टी पर भी मुकदमा चलाया जा सकता है।
जांच एजेंसी ने कहा कि कानून प्रवर्तन का काम केवल सरकारी एजेंसियो का है। दूसरे केवल देश के कानून लागू करने में सक्षम सरकारी संस्थाओं की मदद कर सकते है, लेकिन स्वतंत्र रुप से कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकते।
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