इण्डियन एक्सप्रेस, द वीक को आईपीआई अवार्ड
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने विजेताओं को सोमवार को पुरस्कृत किया । उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी ज्यादा मजबूत होती है जब मीडिया के जरिए वे लोग अपनी आवाज रखते हैं। जिनकी अपनी कोई आवाज नहीं होती। दोनों की खोजपरक खबरों ने अपनी भूमिका निभाई, इसलिए उन्हे पुरस्कृत किया गया।
इण्डियन एक्सप्रेस की मुंबई संवाददाता स्मिंता नायर ने अपनी रपट में उजागर किया था कि पुलिस जांच से यह पता लगा कि मोदासा और मालेगांव में हुए धमाकों के पीछे कट्टरवादी हिन्दू समूह थे। इस रपट के बाद एक्सप्रेस संवाददाताओं की एक टीम ने खोज खबरों का सिलसिला शुरू किया और आतंकवादी घटना का पूरा सच पेश किया।
द वीक की विदिशा घोषाल ने बताया कि विदर्भ की विधवाओं की गैरमौजूदगी का ब्यौरा मेरी खबर मूक भुक्तभोगी में है। उन्होंने कहा कि इस खबर के जरिए उन महिलाओं को अभिव्यक्ति का मौका मिला। द इण्डियन एक्सप्रेस के प्रधान संपादक शेखर गुप्ता ने इस मौके पर कहा कि ये खबरें फाइल छीनने या स्टिंग ऑपरेशन जैसी नहीं थीं और पत्रकारिता किसी के बैडरूम में कैमरा लगाना भी नहीं है। ये वे खोजपरक खबरें हैं जिनमें तथ्य जुटाए जाते हैं, छानबीन की जाती है और दूसरे का भी पक्ष रखा जाता है।
( साभार: जनसत्ता)
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