आईबीएन-18 नेटवर्क के सिटिज़न जर्नलिस्ट अवार्ड घोषित

अमिताभ बच्चन ने पुरस्कार बांटे

दिल्ली ब्यूरो
 
आईबीएन-18 नेटवर्क ने आज सिटिजन जर्नलिस्ट अवार्ड के विजेताओं को सम्मानित किया। ये पुरस्कार उन सामान्य नागरिकों को दिये जाते हैं जो बेहतर कल की इच्छा से सिस्टम में बदलाव लाने के लिए निर्भीक होकर अपनी लड़ाई लड़ते हैं और समाचार भेजते हैं। इनमें पुरस्कारों में ‘सिटिजन जर्नलिस्ट फाइट बैक’, ‘सिटिजन जर्नलिस्ट सेव योर सिटी’, ‘सिटिजन जर्नलिस्ट बी द चेंज’, ‘सिटिजन जर्नलिस्ट वीडियो’, ‘सिटिजन जर्नलिस्ट फोटो ’ और ‘सिटिजन जर्नलिस्ट स्पेशल’ नामक 6 श्रेणियां हैं। होटल ताज पैलेस में आयोजित एक शानदार समारोह में ये पुरस्कार वितरित किये गए। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने विजेताओं को सम्मानित किया।
 
आईबीएन-18 की संपादकीय टीम देश भर से पुरस्कार के लिए संभावित लोगों की सूची बनाती है और प्रतिष्ठित लोगों की ज्यूरी विजेताओं का निर्णय करती है। इस साल की ज्यूरी में डा. किरन बेदी, अरविंद केजरीवाल, नीलम कटारा, अनिरुद्ध बहल तथा राजेन्द्र यादव शामिल थे।
 
आईबीएन-18 सिटिजन जर्नलिस्ट अवार्ड 2010 के विजेताओं में ‘सिटिजन जर्नलिस्ट फाइट बैक’ वर्ग में दिल्ली की गायत्री देवी, फरीदाबाद की पूजा, गुडगांव के राकेश सिंह और इलाहाबाद के राम प्यारे लाल, ‘सिटिजन जर्नलिस्ट  सेव योर सिटी’ वर्ग के अंतर्गत जम्मू के अरुण कुमार, दिल्ली के बृजेश कुमार चौहान तथा दिल्ली के ही इंदु प्रकाश सिंह, ‘सिटिजन जर्नलिस्ट बी द चेंज  कैटेगरी में झारखंड में गढ़वा के धन्नंजय कुमार सिंह तथा दिल्ली के केके मुहम्मद, ‘सिटिजन जर्नलिस्ट वीडियो’ के अंतर्गत औरंगाबाद के भीमराव सीताराम वथोड़े, ‘सिटिजन जर्नलिस्ट फोटो’ के तहत बुडगाम, काश्मीर के डा. मुजफ्फर भट्ट तथा ‘सिटिजन जर्नलिस्ट स्पेशल’ के तहत मेरठ की रजिया सुल्तान, मुंबई के समीर ज़ावेरी तथा दिल्ली के संजीव शर्मा शामिल हैं।
 
फाइट बैक श्रेणी में 90 वर्षीया स्वतंत्रता सेनानी गायत्री देवी ने अपनी पेंशन के लिए अनवरत लड़ाई लड़ी, देह व्यापार की शिकार पूजा ने इस काले धंधे से न केवल खुद छुटकारा पाया बल्कि दूसरों का जीवन भी बचाया, राकेश सिंह ने ट्रक दुर्घटना में मृत अपने पुत्र के हत्यारे ट्रक ड्राइवर को ढूंढ़ा, राम प्यारे लाल श्रीवास्तव ने नरेगा और गरीबी रेखा से नीचे के राशन कार्डो के घपले की पोल खोली।
 
सेव योर सिटी श्रेणी में अरुण कुमार ने प्रदूषण के कारण बच्चों में अपंगता का राज़ खोला, बृजेश कुमार चौहान दिल्ली के जल माफिया के खिलाफ लड़े तथा इंदु प्रकाश ने दिल्ली की बेघर महिलाओं के लिए रैन बसेरे के इंतजाम की लड़ाई लड़ी।
 
धन्नंजय कुमार सिंह ने बेसहारा लड़कियों की शादियां करवाईं, केके मुहम्मद ने प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिए स्कूल खुलवाये। वीडियो कैटेगरी के विजेता भीमराव सीताराम वथोड़े ने औरंगाबाद के आर्ट कालेज की दयनीय दशा के विरुद्ध लड़ाई लड़ी और फोटो कैटेगरी में डा. मुजफ्फर भट्ट ने सरकारी परियोजना में बाल श्रम की पोल खोली।
 
स्पेशल कैटेगरी में बाल श्रम के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली मेरठ की  13 वर्षीया रजिया सुलतान, मुंबई में रेलवे दुर्घटनाओं के शिकार लोगों की डाक्टरी देखभाल करने के लिए 17 साल की उम्र में अपनी दोनों पैर गंवा चुके संजीव जावेरी तथा अपंग अध्यापक संजीव शर्मा ने अपने स्कूल की सफाई की लड़ाई लड़ी।

 

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