जल्द आ रहा है नया साप्ताहिक अखबार, ‘मुक्त कंठ’
अनामी से यह पूछे जाने पर कि वर्षो पहले बंद हुयी पत्रिका को पुन: क्यों शुरू कर रहें है तो उनका कहना था कि पत्रिका के लिए एक पहचान की जरूरत होती हैं। लेकिन ‘मुक्त कंठ’ के साथ ऐसा नहीं होगा। हमारे गांव दियो से 2 बड़े साहित्यकारों का इतिहास जुडा हुआ है। देव के राजा रहे, जगन्नाथ प्रसाद किंकर भी बड़े साहित्य रंगमंची और फिल्म निर्माता थे। मेरी कोशिश हमारे गांव की इन तीन महापुरूषों के द्वारा साहित्य के लिए किए गए महान काम को ही आगे ले जाने की है। हमने अपने गांव की बंद पत्रिका, ‘मुक्त कंठ’ को फिर से शुरू करके नया रूप देने की पहल की है। शंकर दयाल सिंह के पत्रकार पुत्र, रंजन कुमार सिंह नए नारे के साथ दियो औरंगाबाद और पूरे मगध एरिया को नयी पहचान दिलाने की मुहिम चला रहे हैं। रंजन अपने दादा व पिता की साहित्यक परंपरा को ऊंचाई पर ले जाना चाहते है। ‘मुक्त कंठ’ को पुन: प्रकाशित करना रंजन के सकारात्मक काम को आगे बढ़ाने में मदद करना है।
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टिप्पणी
बहुत बहुत बधाई...अनामी जी
बहुत बहुत बधाई...अनामी जी
thanx4all
dear dosto
aap sab mitro ki shubhkamnao ke liye bahut 2 aabhar
मुक्त कंठ अपने नाम की भांति
मुक्त कंठ अपने नाम की भांति होगा....
स्वागत है आपका ...
स्वागत है आपका ...
मुक्त कंठ बिहार की पहचान हुआ
मुक्त कंठ बिहार की पहचान हुआ करता था एक समय , अनामी उस पहचान को वापस लाने में कामयाब हो, ऐसी मेरी कामना है।
बबल जी बधाई के पात्र हैं....
बबल जी बधाई के पात्र हैं....
यह नया साप्ताहिक कुछ नया
यह नया साप्ताहिक कुछ नया करेंगा...
svagat aapke snkalpo ka .nya
svagat aapke snkalpo ka .nya kuch kren.
klm kee takt ; gurutv jage.
अनामी शरण जी को बहुत बहुत
अनामी शरण जी को बहुत बहुत बधाईयां ...