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रवीश कुमार साहित्य पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित

Published At: Friday, 01 January, 2016 Last Modified: Tuesday, 27 February, 2018

समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो

उत्‍तर प्रदेश महिला मंच के संस्‍थापक और कलम के योद्धा रहे स्‍व0 वेद अग्रवाल की स्‍मृति में दिए जाने वाला ‘साहित्‍य-पत्रकारिता-2011 पुरस्‍कार’ मेरठ के चैंबर हॉल में सामाजिक सरोकारों से जुड़े जुझारू पत्रकार, रवीश कुमार को दिया गया रवीश को यह सम्मान वरिष्‍ठ पत्रकार और भास्‍कर समूह के संपादक, श्रवण गर्ग और अप्रतिम कथाकार, चित्रा मुदगल ने दिया। इस अवसर पर उत्‍तर प्रदेशीय महिला मंच की अध्‍यक्ष डा0 अर्चना जैन, महामंत्री ऋचा जोशी, आमीन के रचयिता आलोक श्रीवास्‍तव और शिक्षाविद डा0 राधा दीक्षित मौजूद थीं।
 
मंच के 26 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, जिन सात महिलाओं को हिंद प्रभा सम्‍मान से अलंकृत किया गया उनमें सत्तर साल की युवा शूटर, प्रकाशो देवी, मंदबुद्धि बच्‍चों के विकास में लगीं प्रमिला बालासुंदरम, सौ से ज्‍यादा महिलाओं को ट्रैक्‍टर चलाना सिखा चुकीं शालिनी,  उत्‍तराखंड की संस्‍कृति और कला के उन्‍नयन में जुटीं लोकगायिका बसंती बिष्‍ट, महिला होकर पुरुषों का बोझ उठाने वाली रेलवे कुली मुंदरा देवी, तीन हजार रूपये से अपना उद्यम शुरु कर बीस देशों तक अपने उत्‍पाद पंहुचाने वाली प्रेरणा और शोषण के खिलाफ संघर्ष करने वाली प्रशासनिक अधिकारी डा0 अमृता सिंह हैं।
 
इस मौके पर, बोलते हुए भास्‍कर समूह के समूह संपादक, श्रवण गर्ग ने कहा, “गर्व होता है जब रवीश जैसे सामाजिक सरोकारों से जुड़े किसी बेवाक पत्रकार को देखते हैं। उससे भी ज्‍यादा गर्व तब होता है जब प्रकाशो, बालासुंदरम, शालिनी, मुंद्रा या प्रेरणा जैसी महिलाओं का सम्‍मान होता है क्‍योंकि अखबारों और इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया में चारों ओर से उनके जलाने, लूटने या इज्‍जत से खिलबाड़ की खबरें आ रही हैं और इन सब के बीच ऐसी महिलाएं एक ताकत बनकर उभरती हैं और हमें बताती है कि अभी सब कुछ खत्‍म नहीं हुआ है और होने भी नहीं दिया जाएगा।”
 
उन्‍होंने आगे कहा, “अखबारों में ये खबर तो छपती है कि एक किसान मर गया लेकिन ये खबर नहीं छपती वह किसान अपने पीछे एक औरत को भी मरने के लिए छोड़ गया क्‍योंकि औरत तो हर जगह मरती है, चाहे वह युद्ध का मैदान हो या सांप्रदायिक दंगे या फिर बिगड़ते पर्यावरण के चलते सूखते कुंए या झरने। यदि एक कुंआ सूखता है तो गांव में एक महिला के लिए पीने के पानी की दूरी और बढ़ जाती है। पानी के झरने लगातार सूख रहे हैं लेकिन महिलाओं के आंसू लगातार बढ़ते जा रहे हैं और उनकी पीठ लगातार कमजोर हो रही है या टूट रही है।”
 
गर्ग ने कहा, “कन्‍या भ्रूण हत्‍या को लेकर जो आंकड़े प्रकाशित हुए हैं, उनसे सिर शर्म से झुक जाता है। दुनिया भर की संस्‍था हमें बता रही हैं कि हिंदुस्‍तान में महिलाओं की संख्‍या भले ही पुरुषों के आस-पास हो लेकिन उच्‍च पदों पर उन्‍नति प्राप्‍त करने वाली महिलाओं का प्रतिशत दस से बारह के आस-पास ही है।”
 
उन्‍होंने कहा, “ये सारी परिस्थितियां बताती हैं कि हम जिस तरक्‍की या आर्थिक विकास दर की बात करते हैं वह उन महिलाओं तक नहीं पंहुचा है जो बीस रुपये में अपना घर चला रही है, अपने बच्‍चों को पढ़ा रही है और अंधेरे में अपनी आंखे फोड़ रही है।
 
रवीश कुमार ने अपने संबोधन में कहा, “आप सबको ये समझ लेना चाहिए कि न्‍यूज आपके लिए नहीं हैं क्‍योंकि आप दो पैसे भी नहीं देते। टेलीविजन का सारा खेल टीआरपी का है और विज्ञापनदाताओं के लिए है। हम इस तरह से उनके प्रति सम्‍मुख, उन्‍मुख और जिम्‍मेदार बना दिए गए हैं क्‍योंकि चार टीआरपी मीटर वाले बक्‍से जो तय करेंगे वही हम होंगे। इसलिए आप जो हमसे अपेक्षा रखते हैं, कुछ दिन बाद हम वह नहीं रह जाएंगे और कुछ दिन बाद अगर यही हालत रही तो आप लोगों को पत्रकारों को बुलाकर सम्‍मानित करने की जहमत नहीं उठानी पड़ेगी बल्कि चौराहों पर घेरकर पीटने की या फिर गाली देने की नौबत आ जाएगी।”
 
समारोह में अनेक विभूतियां मौजूद रहीं। संस्‍था के संपादक स्‍व0 वेद अग्रवाल का परिचय युवा लेखिका/पत्रकार आकांक्षा पारे ने पढ़ा। इस अवसर पर वरदा-2011 का विमोचन और वितरण भी हुआ।
 
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