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रेडियो 2011 - बदलाव जो हमने देखा

Published At: Friday, 01 January, 2016 Last Modified: Tuesday, 27 February, 2018

 समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो

काफी समय से लंबित पड़े एफएम फेज3 प्रस्ताव को आखिर में आकर साल 2011 में 7 जुलाई को केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई। इस प्रस्ताव के बाद से रेडियो इंडस्ट्री के विस्तार का दौर शुरू हुआ है।  इसके 839 नये एफएम चैनलों को लाइसेंस दिया जायेगा। इसके साथ ही सरकार का एफएम विस्तार के तीसरे चरण के लाइसेंस की नीलामी के जरिए सरकार 1,733करोड़ रुपए कमाने की उम्मीद थी। इन नये एफएम चैनलों में देश के एक लाख व इससे ज्यादा आबादी वाले 294 शहरों में 839 निजी एफएम चैनल उपलब्ध होंगे। सरकार ने 227 और शहरों में चैनलों के लाइसेंस ई-नीलामी के जरिए देने को मंजूरी दे दी है। अंबिका सोनी ने कहा था कि एक स्वतंत्र विशेषज्ञ एजेंसी ई-नीलामी का आयोजन करेगी। और यह नीलामी इसी वित्त वर्ष में पूरी कर ली जायेगी।
 
साथ ही इस प्रस्ताव में एक अहम बात भी कि एफएम चैनलों पर खबरों का प्रसारण जिसकी मांग एफएम चैनलों के द्वारा समय समय पर उठाई जाती रही है। इसके जरिए से एफएम चैनलों को खबरें प्रसारित करने का अधिकार दिया गया लेकिन उन्हें केवल एआईआर रेडियो की खबरें बिना कोई संपादित किये प्रसारण करना होगा। इस बारे में अंबिका सोनी का कहना था कि एफएम चैनलों को किसी दूसरी न्यूज एजेंसी या फिर अपने समाचार प्रसारित करने का अधिकार जरूर मिलेगा लेकिन वो इस पर निर्भर करेगा कि वो लोग एआईआर की खबरें प्रसारण के हक को कैसे निभाते हैं। वे खेल आयोजनों, यातायात, मौसम, सांस्कृतिककार्यक्रमों, उत्सवों, परीक्षाओं के नतीजे समेत जनहित की जानकारियां भी दे सकेंगे।
 
 इसमें तीसारा महत्वपूर्ण बिंदु है कि एफडीआई की सीमा बढ़ाना जिसे 20 फीसदी से बढ़ाकर 26 फीसदी कर दिया गया है। इसके साथ ही नेशनल स्तर पर प्रसारित कुल स्टेशनों में से 15फीसदी ही निजी चैनलों को देने की सीमा कायम रखी गई है, लेकिन जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व और द्वीप समूहों तक चैनलों की पहुंच बढ़ाने के लिए उन इलाकों में इस सीमा को बढ़ाया जा सकता है। साथ ही यह बात भी इसमें कही गई है ऐसे दूर्गामी क्षेत्रों में रेडियो को बढ़ावा देने के लिए शुरुआत तीन सालों के लाइसेंस फीस आधी ही लीजायेगी। और इसकी साथ ही वो प्रसार भारती के संसाधनों का इस्तेमाल भी आधे किराए पर सकते हैं। अब रेडियो स्टेशनों के लाइसेंस फीस दस साल की बजाय 15 साल के लिए देनी होगी।
 
जहां एक ओर इस फैसले पर निजी ऑपरेटरों ने खुशी जाहिर की तो कई मुद्दों पर उन्होंने रोष भी जताया उनका कहना था कि 1733 करोड़ का लक्ष्य हासिल करने के लिए ऑपरेटरों से ज्यादा लाइसेंस फीस ली जा सकती है।  साथ ही उन्होंने लाइसेंस नीलामी प्रक्रिया और आकाशवाणी की खबरों के प्रसारण पर भी विरोध जताया। एफएम ऑपरेटरों का कहना था कि जो साल 2010 में 3 जी 3जी और ब्रॉडबैंड वायरलेस एक्सेस लाइसेंस प्रक्रिया दूरसंचार विभाग ने अपनाई थी वहीं प्रक्रिया सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा इस्तेमाल की जा रही है जो कि उचित नहीं है।
 

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