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संस्कृति मंत्रालय ला रहा है सांस्कृतिक चैनल

Published At: Friday, 01 January, 2016 Last Modified: Tuesday, 27 February, 2018

समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो

दुनिया के कई दूसरे मुल्कों की तरह भारत में भी अब कला व संस्कृति से जुड़े विषयों को पूरी तरह समर्पित चैनलों लाने की कोशिश हो रही है। संस्कृति मंत्रालय इस दिशा में पहल कर रहा है और इस चैनल की योजना, योजना आयोग में विचाराधीन है। अपना एक समर्पित चैनल लाने की संस्कृति मंत्रालय की योजना के पीछे का तर्क है कि भारत की परंपरागत और सामयिक सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और प्रसार के लिए एक ऐसा चैनल होना चाहिए जो सिर्फ कला और संस्कृति पर केन्द्रित हो।
 
 लेकिन दुविधा यह है कि चैनल शुरू किया जाए या पहले मंत्रालय के अंदर एक प्रोडक्शन यूनिट शुरू किया जाए। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि हम एक नया चैनल शुरू करें या पहले से ही मौजूद चैनलों की सेवाएं लें, दोनों ही विकल्पों के लिए जरूरी है कि पहले हम अपना एक प्रोडक्शन यूनिट शुरू करें जो मुख्य रूप से ऐसे कार्यक्रम बनाए जो देश के युवा वर्ग को प्रभावित कर सके। 
इस आशय का एक प्रस्ताव योजना आयोग के सामने तब आया जब देश में कला व संस्कृति की स्थिति का जायजा लेने और अपनी महत्वपूर्ण सिफारिशें देने के लिए खुद आयोग ने ही एक उच्चस्तरीय समिति बनाई। भारत के संस्कृति सचिव की अध्यक्षता में बनी इस समिति ने योजना आयोग को सौंपी रिपोर्ट में कहा है कि एक समर्पित चैनल खोलने का महत्वपूर्ण मकसद यह भी है कि देश का युवा वर्ग भारत की सांस्कृतिक विरासत और सामयिक कला व संस्कृति को समझे और यह समझ तभी विकसित होगी जब बेहतर कार्यक्रमों के जरिए ये चीजें उन तक पहुंचें। 
 
मंत्रालय ने कहा है कि प्रस्तावित प्रोडक्शन यूनिट ऐसे कार्यक्रमों का निर्माण करे जो युवाओं को अपील करें और नई पीढ़ी तक पहुंच सकें। मंत्रालय ने यह उम्मीद भी लगाई है कि एक समर्पित चैनल आने तक मंत्रालय की कोशिश होगी कि इसकी प्रोडक्शन यूनिट द्वारा बनाए कार्यक्रमों का प्रसारण न केवल दूरदर्शन के सरकारी डीडी भारती या अन्य चैनलों पर बल्कि नेशनल ज्योग्राफिक, डिस्कवरी के अलावा ऐसे अन्य अंतरराष्ट्रीय चैनलों पर भी होगा। संस्कृति मंत्रालय ने इस प्रोडक्शन यूनिट के लिए इस वित्त वर्ष (2012-13) में शुरुआती 5 करोड़ रुपये का बजट रखा है। इस मद में अगले 5 वर्षों में 50 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। 
 
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