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सीनियर एडिटर्स की नजर में कुछ इस तरह होगा न्यूज इंडस्ट्री का भविष्य!

Wednesday, 14 February, 2018

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।


हाल ही में हुए एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (ENBA)  समारोह में इंडस्‍ट्री से जुड़े दिग्‍गजों और युवाओं ने 'Newsroom 2020' को लेकर चर्चा की। सभी ने अपने-अपने तरीके से इस बात को बताने की कोशिश की आने वाले समय में यानी 2020 तक न्‍यूजरूम का भविष्‍य क्‍या होगा और यह इंडस्‍ट्री क्‍या मोड़ लेगी। हालांकि कार्यक्रम में अधिकतर लोग इस बात से सहमत दिखे कि पत्रकारिता के पुराने तरीके आने वाले समय में बेकार साबित होंगे और एक नया सिस्‍टम विकसित होगा जिसमें स्‍थानीय भाषा में इंटरनेट का इस्‍तेमाल बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी पहुंच बढ़ेगी। आने वाले समय में न्‍यूज व लोगों के विचारों पर इन्‍हीं का राज चलेगा।


NewsXके एसोसिएट एडिटर (स्‍पेशल प्रोजेक्‍ट्स) तरुण नांगिया का कहना था, ‘वर्ष 2020 तक यह माध्‍यम काफी बदल जाएगा। इस समय देश में ब्रॉडबैंड तेजी से अपने पैर पसार रहा है और वर्ष 2020 तक देश में ब्रॉडबैंड का इस्‍तेमाल काफी बढ़ जाएगा।’ कार्यक्रम में नांगिया ने यह भी बताया कि किस तरह आज के समय में सोशल मीडिया के अंदर उस खाली जगह को भरने की ताकत है, जो मेनस्‍ट्रीम मीडिया विभिन्‍न कारणों से पीछे छोड़ती जा रही है।


सोशल मीडिया की भूमिका के बारे में ‘जी मीडिया’ के एडिटर (इंटीग्रेटेड न्‍यूजरूम) संजय ब्रागटा ने कहा, ‘आज के समय में जिन लोगों के पास स्‍मार्टफोन है, वे सभी स्‍वतंत्र पत्रकार, पब्लिशर्स और एडिटर्स हैं। यदि उनके सामने कोई घटना घटित होती है तो वे इसे शूट कर लेते हैं, उसका कैप्‍शन लिखकर इसे सोशल मीडिया पर पोस्‍ट कर देते हैं। इच्‍छा होने पर वे ‘फेसबुक लाइव’ का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं और उन्‍हें न तो ओबी वैन की जरूरत है और न ही किसी तरह के न्‍यूजरूम अथवा कॉपी एडिटर की जरूरत है।’ब्रागटा ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि आजकल सोशल मीडिया पर सभी जानकारी पहले सेी उपलब्‍ध हैं ऐसे में न्‍यूजरूम में एडिटर की भूमिका कम होती जा रही है। वक्‍ताओं को भी लगता है कि सोशल मीडिया के सामने परंपरागत न्‍यूजरूम काफी कमजोर है।


उन्‍होंने कहा, ‘अभी तक एडिटर्स ही इस बात का निर्णय करते हैं कि कौन सी न्‍यूज जाएगी और कौन सी न्‍यूज पब्लिश अथवा प्रसारित नहीं होगी और यदि होगी भी तो उसका स्‍वरूप क्‍या होगा लेकिन सोशल मीडिया ने इन सभी नैतिकताओं को तहस-नहस कर दिया है। सोशल मीडिया पर कोई व्‍यक्ति लिखता है कि एक हिन्‍दू ने एक मुस्लिम व्‍यक्ति की हत्‍या कर दी अथवा एक हिन्‍दू ने किसी दलित का कत्‍ल करदिया। इन दिनों न्‍यूजरूम में हम इसी तरह की खबरों पर चर्चा करते हैं। यह थोड़ा अजीब जरूर लगता है लेकिन यह सच है। सोशल मीडिया के कारण काफी उथल-पुथल हो गई है और एडिटर्स अपने मनमुताबिक काम करने में परेशानी महससू कर रहे हैं।’


ब्रागटा के विचारों से सहमति जताते हुए ‘इंडिया न्‍यूज’ के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत तकनीक के दुरुपयोग पर चर्चा की। उन्‍होंने किसी खास राजनीतिक दल का पक्ष लेने वाले पत्रकारों की आलोचना भी की। राणा यशवंत का कहना था कि न्‍यूज के क्षेत्र में टेक्‍नोलॉजी का काम इसकी गति बढ़ाना और व्‍युअर्स के लिए रोचक बनाना है, न कि सच्‍चाई के साथ हेरफेर करना। उन्‍होंने कहा, ‘आज कुछ टेलिविजन के एंकर बिल्‍कुल किसी पार्टी के प्रवक्‍ता की तरह बात करते हैं और ऐसे में कई बार टेलिविजन देखते समय आप यह अंतर नहीं कर सकते हैं कि यह एक पत्रकार है अथवा किसी पार्टी का प्रवक्‍ता। वर्ष 2020 तक हमें न्‍यूजरूम में प्रचलित इस सिस्‍टम को बदलना होगा।’


कार्यक्रम में शामिल ‘एएनआई’ की एडिटर-इन-चीफ स्मिता प्रकाश ने इस बात पर जोर दिया कि टेक्‍नोलॉजी के आने के बाद से मीडिया इंडस्‍ट्री में स्‍पीड कितनी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है। स्मिता प्रकाश का कहना था, ‘यह माना जाता है कि न्‍यूज टेक्‍नोलॉजी से चलती है। पत्रकारिता के बारे में हमने जो शुरुआत में सीखा था, वह स्‍टोरी का पीछा करने के बारे में था अथवा स्‍टोरी जुटाना था लेकिन धीरे-धीरे हम सभी का फोकस स्‍टोरी को डिलीवर करने की तरह परिवर्तित हो गया। इसलिए आपको सबसे पहले स्‍टोरी को बाहर निकालना होगा।'


स्मिता प्रकाश का कहना था, ‘मल्‍टीमीडिया न्‍यूजरूम्‍स जैसे एएनआई में, पत्रकार आज मल्‍टीटास्किंग हो गए हैं वे रिपोर्टिंग करने भी जाते हैं, सेल्‍फी स्टिक की सहायता से घटनाओं अथवा इवेंट्स को शूट भी करते हैं और बिना एडिटिंग के ही स्‍टोरी को पब्लिश कर देते हैं क्‍योंकि आजकल तेज न्‍यूज का जमाना है। ऐसे में उनके पास इतना टाइम नहीं हैं और वे न्‍यूज पब्लिश करने में किसी से पीछे नहीं रहना चाहते हैं।’ उन्‍होंने समय के साथ बदलाव न होने के परिणामों के बारे में भी चेतावनी देते हुए कहा, ‘जो लोग समय के साथ चल रहे हैं और जो लोग स्‍टोरी ब्रेक कर रहे हैं, ऐसे लोग ही वर्ष 2020 तक प्रासंगिक बने रहेंगे।’


कार्यक्रम में बेस्‍ट एडिटर अवॉर्ड हासिल करने वाले ‘आज तक’ के मैनेजिंग एडिटर सुप्रियो प्रसाद ने इन दिनों मेनस्‍ट्रीम मीडिया के समक्ष आ रही चुनौतियों पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान सुप्रियो प्रसाद का कहना था कि उन्‍हें डर है कि वर्ष 2020 तक पत्रकार पूरी तरह अपनी विश्‍वसनीयता न खो दें। सुप्रियो प्रसाद का कहना था, ‘आज के समय को देखते हुए कहा जा सकता है कि जिस तरह आज हमारे पास बीट रिपोर्टर्स होते हैं, वर्ष 2020 तक हमारे पास राजनीतिक दलों के प्रॅड्यूसर होंगे। हो सकता है कि वे योगी आदित्‍यनाथ की तरह गमछा भी पहनेंगे। मैं देखना चाहता हूं कि हम लोग (पत्रकार) किस हद तक जा सकते हैं, यह काफी चिंताजनक बात है।’


प्रसाद ने कहा, ‘हमें इस बात की चिंता करने की जरूरत है कि वर्ष 2020 तक पत्रकारिता की विश्‍वसनीयता का क्‍या होगा। क्‍या हम उस समय तक मीडिया में विश्‍वसनीय लोगों को बनाए रखने में सक्षम होंगे? आज लोग हमें एंटरटेनमेंट के बतौर देखते हैं और छोड़ देते हैं ऐसे में इस बात की काफी संभावना है कि वर्ष 2020 तक हमारे पास ‘न्‍यूज’ नहीं होगी।’ वहीं, ट्रंप एशियाई पैसिफिक एडवाइजरी समिति में सलाहकार रहे पुनीत अहलूवालिया का कहना था कि वह अमेरिका की तरह वर्ष 2020 तक इसको लेकर कानून बनाने के लिए पैरवी करना चाहते हैं। उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि आने वाले समय में इसमें किसी तरह के फ्रॉड की आशंका समाप्‍त हो जाएगी। 


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