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वरिष्ठ पत्रकार पंकज पाराशर की शार्ट फिल्म जल्द होगी रिलीज...

Published At: Friday, 10 November, 2017 Last Modified: Wednesday, 08 November, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण के क्षेत्र में पहले हाथ आजमा चुके वरिष्ठ पत्रकार पंकज पाराशर अब अपनी दूसरी डॉक्यूमेंट्री लेकर आ रहे हैं, जिसका नाम है 'द ब्रदरहुड'। यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म दादरी के बिसाहड़ा कांड की हकीकत बयां करती है। पंकज पाराशर इन दिनों दैनिक हिन्दुस्तान में नोएडा के ब्यूरो चीफ के तौर पर कार्यरत हैं।  

इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म का मकसद यह बताना है कि बिसाहड़ा जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं परेशानी तो पैदा कर सकती हैं लेकिन यहां हिन्दू और मुस्लिमों के बीच गहरे रिश्तों को खत्म नहीं कर सकती। फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो गया है और यू-ट्यूब पर इन दिनों लोकप्रियता बंटोर रहा है।

'द ब्रदरहुड' का निर्माण पंकज पाराशर ने ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब के सहयोग से किया है। पंकज पाराशर ने बताया, द ब्रदरहुड बिसाहड़ा कांड और अखलाख की हत्या के कारण हुई परिस्थितियों से शुरू होती है। उसके बाद यहां के दो गांवों घोड़ी बछेड़ा और तिल बेगमपुर के बीच रिश्तों पर फोकस करती है। घोड़ी बछेड़ा हिन्दू ठाकुरों का गांव है और तिल बेगमपुर में मुस्लिम ठाकुर हैं, लेकिन घोड़ी बछेड़ा गांव, तिल बेगमपुर गांव को अपना बड़ा भाई मानता है। मतलब, एक हिन्दू गांव का बड़ा भाई मुस्लिम गांव है। इसके पीछे कई ऐतिहासिक घटनाएं हैं। करीब 24 मिनट की डॉक्यूमेंट्री के दौरान ग्रेटर नोएडा, दादरी, जैसलमेर, सोमनाथ और ऋषिकेश से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएं और स्थल देखने को मिलेंगे।

पंकज पाराशर ने बतायाकई बड़ी अच्छी परंपराएं इन गांवों के बीच 300 वर्षों से कायम हैं। मसलन, अगर हिन्दू परिवारों में किसी युवक की शादी होती है तो लड़की वालों से शगुन मुसलमान बुजुर्ग लेते हैं। किसी परिवार के मुखिया की मौत हो जाने पर उसके सबसे बड़े पुत्र को उत्तराधिकार सौंपने के लिए पगड़ी बांधी जाती है। यह पगड़ी मुसलमान बुजुर्ग बांधते हैं। इतना ही नहीं इन गांवों में कोई विवाद हो जाता है और समाधान नहीं हो पाता तो तिल बेगमपुर गांव के मुसलमान बुजुर्गों को पंच नियुक्त किया जाता है। उनका फैसला दोनों पक्षों को मानना होता है।

इन गांवों में कई बेमिसाल घटनाएं 1857 के गदर और 1947 में आजादी के वक्त घटित हुई हैं। आजादी के बाद पूरे देश से मुसलमान पाकिस्तान गए थे, लेकिन इन गांवों से कोई मुसलमान पाकिस्तान नहीं गया था। कुछ लोगों ने पाकिस्तान जाना चाहा तो हिन्दुओं ने आगे बढ़कर रोक लिया था। यूपी विधानसभा चुनाव में हिन्दू और मुसलमान वोटरों का ध्रुवीकरण हुआ। लेकिन यहां की जेवर विधानसभा सीट पर हिन्दू और मुसलमान एक हो गए। मिलकर मतदान किया और अपने गोत्र के भाजपा उम्मीदवार ठाकुर धीरेंद्र सिंह को जिताया।

पंकज पाराशर का नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लंबा अनुभव रहा है। वह वर्ष 2008 में अमर उजाला के ग्रेटर नोएडा में ब्यूरो चीफ थे। उस समय भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन कर रहे घोड़ी बछेड़ा गांव के किसानों पर पुलिस ने फायरिंग की थी, जिसमें छह किसानों की मौत हो गई थी। वर्ष 2010 में पंकज पाराशर ने हिन्दुस्तान जॉइन कर लिया। हिन्दुस्तान में भी ग्रेटर नोएडा के ब्यूरो चीफ बनाकर भेजे गए। इस बार 2011 में भट्टा पारसौल के किसान आंदोलन में किसानों पर फायरिंग हुई थी।

इसके बाद पंकज पाराशर ने देश में भूमि अधिग्रहण कानून, मुआवजा भुगतान की नीति और किसानों की दशा पर 2013 में पहली डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'क्रश्ड ड्रीम्स' बनाई थी, जिसे खासी लोकप्रियता मिली थी। अब देश में हिन्दू-मुस्लिम रिश्तों पर केंद्रित दूसरी डॉक्यूमेंट्री 'द ब्रदरहुड' आ रही है। हालांकि, करीब चार महीनों से यह डॉक्यूमेंट्री सेंसर बोर्ड में फंसी हुई है। फिल्म के प्रमाणन को लेकर विवाद है, लेकिन फिल्म का ट्रेलर सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पर हासिल कर रहा है।

 

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