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ये महिला पत्रकार कश्मीर में तो है, पर वहां रिपोर्टिंग नहीं कर सकतीं क्योंकि...

Saturday, 04 August, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

वॉशिंगटन पोस्ट की भारतीय ब्यूरो चीफ एनी गोवेन के उस ट्वीट के बाद अब राजनीति शुरू हो गई है, जिसमें उन्होंने मंगलवार को ट्वीट कर कहा था कि वे अपनी दोस्त की शादी के लिए कश्मीर में हैं। लेकिन वह रिपोर्टिंग नहीं कर सकतीं, क्योंकि विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय द्वारा विदेशी पत्रकारों के दी जानी वाली आवश्यक विशेष मंजूरी उन्हें नहीं दी गई है। उन्होंने 22 जून को इसके लिए आवेदन किया था, जिसमें आवंछनीय देरी हो रही है।


हालांकि इस ट्वीट के बाद से कश्मीर की राजनीति में विदेशी मीडिया की आजादी की आबोहवा चल पड़ी है। नेशनल कांफ्रेंस के नेता ने गोवेन को मंजूरी नहीं दिए जाने को लेकर आपत्ति जताई है। 

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को आश्चर्य प्रकट किया कि क्या जम्मू एवं कश्मीर के हालात इतने बिगड़ गए हैं कि सरकार विदेशी संवाददाताओं को राज्य में स्वतंत्र रूप से पत्रकारिता करने की इजाजत देने से डर रही है। भाजपा की कश्मीर नीति की एक और उपलब्धि, जिसमें पीडीपी ने पूर्ण रूप से सहयोग किया। 


वहीं हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (एम) ने भी बुधवार को प्रेस रिलीज जारी कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता ने कहा कि यह दिल्ली की निराशा को दर्शाता है कि वह कश्मीर की सच्चाई को लेकर की जाने वाली सही रिपोर्ट से विदेशी मीडिया दूर को रखना चाहता है, विशेषकर तब जब सबसे खराब दमनकारी राज्य कश्मीर के लोगों पर खुलासा किया जा रहा हो।

प्रेस रिलीज में कहा गया है कि कश्मीर की रिपोर्टिंग करने से विदेशी मीडिया को रोकना  प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रत्यक्ष रूप से हमला करने की एक चाल है और इस पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया को ध्यान देना चाहिए और इसका विरोध करना चाहिए।

गौरतलब है कि विदेशी पत्रकारों को जम्मू-कश्मीर में रिपोर्टिंग करने के लिए 1990 के दशक की शुरुआत से गृह मंत्रालय की अनुमति लेनी होती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 मई 2018 को विदेश मंत्रालय ने सभी विदेशी समाचार संस्थानों को आदेश एक पत्र भेजा था, जिसमें कहा गया था कि भारत में विदेशी मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को अब से जम्मू कश्मीर जाने से 8 हफ्ते पहले लिखित में आवेदन करना होगा, जिसके बाद ही वे जम्मू कश्मीर के किसी हिस्से में जा सकते हैं।

इस पत्र में लिखा था, ‘विदेश मंत्रालय द्वारा ऐसा देखा गया है कि भारत में रह रहे विदेशी पत्रकार अपने पत्रकारिता के काम के लिए यात्राएं करते समय ऐसी प्रतिबंधित/संरक्षित (प्रोटेक्टेड) जगहों पर जा रहे हैं, जहां जाने के लिए पूर्व अनुमति/विशेष परमिट लेने की आवश्यकता होती है। ऐसे क्षेत्रों में बिना पूर्व अनुमति/विशेष परमिट के जाने से पत्रकार के लिए अनावश्यक रूप से असुविधा खड़ी हो सकती है।’

 

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