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इस नाम से हिमांशु तिवारी ‘आत्मीय’ ने लिखी अपनी पहली किताब

Tuesday, 12 December, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

अपनी अथक मेहनत के चलते मीडिया में लगातार मील के पत्थरों को छू रहे हिमांशु तिवारी आत्मीय ने अपनी पहली किताब लिखी है, जिसका शीर्षक है- वेश्या एक किरदार। इस किताब का प्रकाशन हिंद युग्म ब्लू ने किया है और इसकी कीमत मात्र 76 रुपए रखी गई है।

इन दिनों हिमांशु लखनऊ में ‘नवभारत टाइम्स’ के डिजिटल वेंचर में कॉपी एडिटर के तौर पर जुड़े हुए हैं। हिमांशु ने कानपुर के जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट ऐंड मास कम्युनिकेशन से एमसीएजे करने के दौरान ही स्वतंत्र लेखन शुरू किया। हिमांशु ने न्यूज एक्सप्रेस में बतौर असिस्टेंट प्रड्यूसर अपने करियर की शुरुआत की। कुछ ही दिनों में उनके काम को देखते हुए चैनल प्रबंधन ने उन्हें प्रड्यूसर पद की जिम्मेवारियां थमा दीं। हालांकि चैनल बंद हो जाने की वजह से सभी कर्मचारियों को एक बड़ा झटका लगा। फिर हिमांशु दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट अखबार से बतौर सब एडिटर जुड़ गए, लेकिन यहां से निकलने के बाद वे वन इंडिया’ (फ्रीलांस जर्नलिस्ट) और आर्यावर्त के साथ भी जुड़े रहे। कांशीराम के करीबी आरके चौधरी, कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह, शीला दीक्षित, योगी आदित्यनाथ से बातचीत कर एक्सक्लूसिव देने वाले आत्मीय ने वन इंडियासे नाता तोड़ा तो उन्होंने सॉलिड खबरनाम से एक नया पोर्टल भी शुरू किया, लेकिन एक साल तक इसके साथ जुड़े रहने के बाद वे भारत समाचारमें आ गए और अब नवभारत टाइम्स के साथ जुड़े हुए हैं।  

अपनी किताब के बार में आत्मीय लिखते हैं-

किरदारों पर ही तो जिंदगी है या ऐसे ही समझ लीजिए कि जिंदगी भर हम न जाने कितने किरदार निभाते हैं। इश्क में रोमियो होने वाला किरदार, धोखा मिलने पर देवदास वाला किरदार, शादी हो जाने के बाद किरदार कई बार सच्चा हो पाता है और कई बार नहीं भी...वेश्या भी मेरे मुताबिक एक किरदार ही है, जो बेहद संजीदगी के साथ अपना किरदार निभाती है। इंसान का किरदार सबसे ज्यादा बेईमानी से भरा हुआ है। तलाश के देखिएगा कभी उस किरदार को। इश्क में मां-बाप समेत कई और रिश्तों को ख़ाक करने की कोशिश की है। नौकरी के वक्त कभी वेश्या से भी बदतर खुद को पाया है। फिर भी न जाने क्यों वेश्या आज भी सबसे खराब मानी जाती है। जीबी रोड सुन लिया तो कान सन्न हो जाते हैं। न जाने कितनी वेबसाइट्स, किताबों का पता बंद आंखों के सामने से भी गुजरने की औकात रखता है। कहानियां हो सकता है बीहड़ भी लगें क्योंकि इन्हें इलाकों से उतारकर लाया हूं। पढ़िएगा जरूर क्योंकि पहली किताब है, कहानियां इश्क के किरदार से शुरू होकर कई किरदारों को छूते हुए गुजरेंगी। सर्दियां हैं तो किसी किरदार को फूंक लीजिए, देखिएगा आप कितने किरदार में ईमानदार हैं।

बस आखिर में इतना ही कहूंगा...

किसी रोज निकला था मैं भी घर से बंद लिफाफे में एक पता लेकर,

उस दिन जो छूटा था फिर आज तक मैं अपने ही घर में लौट न पाया।।

बता दें कि उनकी किताब की प्री-बुकिंग शुरू हो चुकी है, किताब खरीदने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर खरीद सकते हैं-

https://www.amazon.in/dp/9384419923/ref=cm_sw_r_wa_awdb_t1_IVkkAb6YNDCZ6 

 

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पोल

क्या इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा का क्रिकेट की दुनिया में जाना सही है?

हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

नहीं, जिसका काम उसी को साजे। उनका कर्मक्षेत्र मीडिया ही है

बड़े लोगों की बातें, बड़े ही जाने, हम तो सिर्फ चुप्पी साधे

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