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30 साल का इंटरनेट, पर काम बूढ़ों जैसा...

Thursday, 12 July, 2018

दुनिया 1988 में इंटरनेट से जुड़ी थी। अब इसे 30 साल पूरे हो गए हैं। उम्र के लिहाज से देखें तो इंटरनेट अभी युवावस्था में है, लेकिन काम के लिहाज से बूढ़ा हो रहा है। इंटरनेट पर मौजूद तमाम लिंक्स बेकार पड़ी हैं, खुलती ही नहीं। तमाम वेबसाइट्स पर डेड लिंक्स के पेज हैं।

हॉर्वर्ड लॉ रिव्यू के अनुसार, इंटरनेट पर मौजूद 30% लिंक्स ओपन करने पर 404-एरर बता देते हैं। 70% लिंक्स रिस्पॉन्स ही नहीं करते। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी जब पहली बार दफ्तर में गए थे तो 83% पीडीएफ फाइल्स जो सरकारी डोमेन में थी, इरेस हो चुकी थीं।

हॉर्वर्ड के ही अनुसार, डेड लिंक्स को डिलीट करना इंटरनेट के लिए बड़ी चुनौती है। जैसे-जैसे वेबसाइट्स बढ़ती जा रही हैं, इंटरनेट को और अच्छा और परिपक्व होना चाहिए। लेकिन डेड लिंक्स की समस्या खत्म किए बिना ये संभव नहीं होगा। दरअसल एक वेबसाइट में कई लिंक्स रहते हैं, सबके डोमेन नेम अलग होते हैं। क्लिक करते ही पोस्ट पर जाते हैं, इससे रीडर वेबसाइट के एक पेज से दूसरे पर बढ़ जाता है। यहां इन्हीं लिंक्स की बात हो रही है। जब ये लिंक्स रिस्पॉन्स देना बंद कर देते हैं, तो इसे डेड लिंक्स कहते हैं। अब तक जो भी प्रयास किए गए हैं, वे डेड लिंक्स फिक्स करने के हैं।

इसके खत्म होने पर 404-एरर की समस्या खुद कम हो जाएगी। इंटरनेट के कंटेंट प्रोवाइडर और टेक्नोलॉजिस्ट से डेड लिंक्स खत्म करने के लिए खास तौर पर निवेश करने की अपील की गई है, ताकि इनका हल निकाला जा सके। दरअसल ऑनलाइन लिंक खराब होने की परेशानी इंटरनेट के कंटेंट पब्लिशर या प्रोवाइडर की तरफ से ही आती है। ये एडिटोरियल की मार्केटिंग के लिए इसकी लिंक थर्ड पार्टी से शेयर कर देते हैं। इधर, थर्ड पार्टी की वेबसाइट्स पर कंटेंट लगातार बदलता जाता है। इस वजह से उस कंटेंट पर क्लिक करने पर 404 डेड पेज बताने लगता है।

2 साल में एक अरब से ज्यादा डेड लिंक्स बहाल किए गए 

वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की टेक्नोलॉजी टीम ने पिछले 2 साल में एक अरब से ज्यादा डेड लिंक्स को बहाल किया है। फिर भी अभी 30% काम ही पूरा हुआ है। 70% काम अभी भी बाकी है। अब फोरम की ये टीम इसी तर्ज पर 404-डेड पेज की समस्या का हल निकालने के लिए काम कर रहे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मुताबिक- डेड लिंक्स की समस्या से निजात पाने के लिए कंटेंट प्रोवाइडर को ज्यादा से ज्यादा नए कंटेंट बनाने की बजाय पुराने कंटेंट को ही ज्यादा से ज्यादा दिन तक पढ़वाने की कोशिश करनी चाहिए। 

(साभार: दैनिक भास्कर)


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