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देशभर में फैले इस गुनाह की अब परते खोलेगा ETV भारत

Published At: Wednesday, 27 June, 2018 Last Modified: Tuesday, 26 June, 2018

ETV भारत ने उस गुनाह की परतें खोलने की कवायद शुरू कर दी है, जिसकी जड़ें एक शहर, एक जिले, एक प्रदेश में नहीं, बल्कि समूचे हिन्दुस्तान में फैली हैं। अपराध का यह कारोबार देश की बड़ी नामी-गिरामी कंपनियों और उनके अफसरों की मिलीभगत से पैर पसार कर आज करोड़ों रुपए का हो चुका है। इस गुनाह से पूरे देश की पुलिस हलकान है। देशभर में अपनी जड़ें मजबूत कर चुके इस संगठित अपराध को नाकाम करने में अब तक पुलिस फेल रही है। नियमों की आड़ में बीमा कंपनियों के कर्ताधर्ता सरकार और उपभोक्ताओं को चूना लगाकर खुद मालामाल हो रहे हैं। पढ़िए ईटीवी भारत की ये रिपोर्ट-

बीते दिनों लखनऊ पुलिस ने चिनहट इलाके से सत्यम गुप्ता नाम के एक शातिर वाहन चोर को दबोचा था। पुलिस को उसके पास से कुल चार गाड़ियां बरामद हुईं थीं। पुलिस ने खुलासा किया कि सत्यम गैराज की आड़ में बीमा कंपनियों की मिलीभगत से चोरी की गाड़ियों को खपाने का काम कर रहा था।

टोटल लॉस की गाड़ियों से होता है खेल

मामूली वाहन चोर और उसके पकड़े जाने का गुड वर्क नजर आने वाला यह खुलासा ETV भारत की टीम के लिए एक सुराग था। ETV की टीम ने इस गठजोड़ की पड़ताल की तो पता चला सत्यम गुप्ता चोरी की चार पहिया गाड़ियों को खपाने में एक ऐसा तरीका अपना रहा था, जिसमें मुनाफा ज्यादा और रिस्क बहुत कम था। सत्यम गुप्ता दुर्घटना में 75 फीसद से ज्यादा बेकार हो चुकी या बीमा कंपनियों की भाषा में कहें तो टोटल लॉस गाड़ियों की आड़ में चोरी की लग्जरी गाड़ियों को खपाने का काम कर रहा था।

ऐसे समझें क्या है टोटल लॉस

टोटल लॉस उन गाड़ियों को कहा जाता है, जिन्हें इंश्योरेंस कंपनियां एक्सिडेंट होने के बाद बनने योग्य न मानकर कार मालिक को उसके इंश्योरेंस की रकम अदा कर देती है। बस यहीं से शुरू हो जाता है इंश्योरेंस कंपनियों का खेल। अमूमन इंश्योरेंस कंपनियां कार मालिक को इंश्योरेंस की रकम देने के बाद कबाड़ हुई गाड़ी को खुद नहीं रखतीं और न ही आरसी को आरटीओ में कैंसिल कराती हैं। एक्सिडेंट के बाद कबाड़ हो चुकी गाड़ियों को तमाम सरकारी और निजी इंश्योरेंस कंपनियां आरसी सहित कबाड़ी को बेच देती हैं। कार मालिक भी सौ फीसदी क्लेम पाकर खुश रहता है और सेल लेटर पर दस्तखत कर देता है। उसे यह पता नहीं होता कि गाड़ी इंश्योरेंस करने वाली कंपनी ले रही है या कोई और, जबकि बीमा कंपनियां सर्वेयर्स को मोहरा बना ग्राहक से गाड़ी बेचने के नाम पर स्टांप पेपर पर दस्तखत करा लेती हैं।

बिना जाने एक्सिडेंटल गाड़ी बेच देते हैं मालिक

कंपनियों द्वारा आरसी कबाड़ी के सुपुर्द करना और कार मालिक का बिना यह जाने कि गाड़ी कौन ले रहा है, सेल लेटर पर दस्तखत करना ही वाहन चोरी के कारोबार की जड़ है। कबाड़ी टोटल लॉस की गाड़ियों को कबाड़ से कहीं ज्यादा कीमत पर खरीदते हैं, ताकि दस्तावेजों में हेरफेर कर उनका चोरी की गाड़ियों में इस्तेमाल किया जा सके। हालांकि नियमानुसार बीमा कंपनियों को टोटल लॉस की गाड़ियों की आरसी कैंसिल करा देनी चाहिए, लेकिन वह अपने हित के लिए नियमों की अनदेखी करती हैं।

गैंग एक्सिडेंटल गाड़ी के ब्रैंड की गाड़ी करवाते हैं चोरी

कबाड़ी के पास जिस रंग और जिस ब्रैंड की एक्सिडेंटल गाड़ी आती है, सत्यम गुप्ता जैसे तमाम लोग वाहन चोरों की मदद से उसी रंग और उसी ब्रैंड की गाड़ी चोरी करवा लेते हैं। चोरी की हुई गाड़ी के गैराज पहुंचते ही मशीन और कारीगरों की मदद से एक्सिडेंटल गाड़ी का चेचिस नंबर काटकर चोरी कर लाई गई गाड़ी के चेचिस पर लगा दिया जाता है। यानी एक्सिडेंट में अगर सफेद रंग की गाड़ी आई है, तो चोरी कर लाई गई सफेद रंग की दूसरी गाड़ी पर एक्सिडेंट की हुई गाड़ी का चेचिस नंबर लगा देता है।

चेचिस नंबर बदलकर चोरी की गाड़ी हो जाती है जायज

चेचिस नंबर की अदला-बदली होते ही चोरी की गाड़ी दस्तावेजों में जायज हो जाती है और ऊंचे दामों पर आराम से दोबारा बेच दी जाती है। क्लेम देने के साथ ही इंश्योरेंस कंपनियां गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी आरसी पहले ही कबाड़ी को दिलवा चुकी होती है और साथ ही गाड़ी के फर्स्ट ओनर का सेल लेटर भी। इस तरह चोरी की गाड़ी को सेकेंड हैंड गाड़ी बता कर ऊंचे दामों में बेचने का कबाड़ी का धंधा सबसे चोखा हो जाता है। चोरी की गाड़ियों को खपाने के इस धंधे में सबसे बड़ी लापरवाही गाड़ियों का इंश्योरेंस करने वाली कंपनियों की उजागर हुई।

आरटीओ से कैंसिल नहीं होतीं टोटल लॉस की गाड़ियां

पड़ताल के दौरान पता चला कि इस समय देश में 4 सरकारी और 20 निजी इंश्योरेंस कंपनियां काम कर रही हैं। सरकारी इंश्योरेंस कंपनियों में सिर्फ दो इंश्योरेंस कंपनियां, द न्यू इंडिया और ओरिएंटल टोटल लॉस में क्लेम देने के बाद एक्सिडेंटल गाड़ी को अपने कब्जे में लेकर आरसी आरटीओ से निरस्त कराती हैं। बाकी कोई भी कंपनी चाहे वह सरकारी हो या फिर निजी, एक्सिडेंटल गाड़ी की आरसी को कैंसिल कराने की जहमत नहीं उठाती। टोटल लॉस के केस में आरसी का कैंसिल न होना ही चोरी की गाड़ियों को खपाने का बड़ा कारण है।

मुनाफे के लिए इंश्योरेंस कंपनियां कर रहीं नियमों की अनदेखी

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंश्योरेंश सर्वेयर एंड लॉस एसेसर के डिस्ट्रिक्ट कोआर्डिनेटर विपिन शुक्ला ने बताया कि गाड़ियों के इंश्योरेंस से रुपया कमाने में जुटी ये कंपनियां ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में ही देशभर में वाहन चोरी के कारोबार को जन्म दे रही हैं। कबाड़ बाजार में बिना आरसी ​​वाली टोटल लॉस की गाड़ी 25 हजार में खरीदी जाती है, तो वहीं आरसी समेत टोटल लॉस की गाड़ी को एक से डेढ़ लाख में खरीदा जाता है। अब आरसी के कागज से कबाड़ की कीमत में आ रहा यह लाखों का अंतर कंपनियों के लिए बड़ा मायने रखता है। इंश्योरेंस कंपनियां मुनाफे की निगाह से तो देखती हैं, लेकिन इस मुनाफाखोरी के कारण चोरी की गाड़ियों के कारोबार पर यह कंपनियां आंखें मूंद लेती हैं।

पुलिस कर रही मामले की जांच

वहीं इस पूरे कारोबार पर एसपी नार्थ लखनऊ अनुराग वत्स का कहना है कि बिना इंश्योरेंस कंपनियों की मिलीभगत के चोरी की गाड़ियों को नहीं खपाया जा सकता, लेकिन मिलीभगत साबित करने के लिए सबूत जुटाए जा रहे हैं और जांच की जा रही है।

(साभार: hindi.eenaduindia.com)



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