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‘शांति’ किसी देश-कल्चर-धर्म का एक्सक्लूसिव नहीं है, बोले प्रख्यात वक्ता प्रेम रावत

Published At: Monday, 12 November, 2018 Last Modified: Tuesday, 13 November, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

पिछले चार दशक से शांति का सन्देश पूरे विश्व में फैलाने वाले प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय वक्ता प्रेम रावत ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में एक बार फिर शांति का संदेश दिया। इस बार उन्होंने अपना संदेश मानवता और शांति के लिए मीडिया की भूमिका पर दिया।

बता दें कि यह कार्यक्रम 'यूथ पीस फाउंडेशन' की ओर से कराया गया, जिसका विषय था- 'Media for Humanity and Peace'. इस कार्यक्रम के पैनल सेशन में प्रेम रावत के अतिरिक्त 'बिजनेस वर्ल्ड' व 'एक्सचेंज4मीडिया' के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ अनुराग बत्रा, वरिष्ठ पत्रकार सईद नकवी व  ज्योतिर्मय रॉय, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन के डायरेक्टर जनरल के.जी. सुरेश और न्यूज24 की डिप्टी एडिटर शीतल राजपूत मौजूद रहीं। 

 तमाम पत्रकारों और आमजनों को संबोधित करते हुए रावत  ने कहा कि शांति किसी देश, किसी कल्चर व किसी धर्म का एक्सक्लूसिव नहीं है। इसकी जरूरत पूरे विश्व को है, इसलिए ये सभी देशों को चाहिए। शांति के बारे में बात करें तो दो-तीन प्रश्न पहले उठते हैं। एक तो ये कि शांति के बारे में बहुत समय से सुनते आए हैं। उन्होंने कहा कि यहां मैं दो-तीन सालों की बात नहीं कर रहा हूं, बल्कि हजार सालों की बात कर रहा हूं। शांति हर धर्म के लोगों को चाहिए और सबको यह पसंद भी है कि शांति होनी चाहिए। लेकिन यहां यही प्रश्न उठता है कि फिर हो क्यों नहीं रही है, बजाय इसके कि हम शांति के और करीब जाएं, हम इससे और दूर जा रहे हैं। इसलिए लड़ाइयां हो रही हैं और सभी लोग बैठे-बैठे तमाशा देख रहे हैं।


रावत ने कहा कि शांति पर बड़े-बड़े भाषण होते हैं पर शांति का कहीं नामोनिशान नहीं है।इस बीच उन्होंने सवाल भी उठाया कि ऐसा क्यों हो रहा है? यदि लड़ाइयां बंद हो जाएं तो क्या शांति हो जाएगी? उन्होंने कहा कि समय तो पहले भी ऐसा रहा है जब लड़ाइयां नहीं हो रही थीं, तो क्या शांति थी? और अगर शांति थी, तो फिर लड़ाइयां क्यों चालू हो गई। उन्होंने कहा कि शांति तो लड़ाईयों को जन्म दे नहीं सकती, तो फिर शांति है क्या?


उन्होंने आगे कहा कि जब हम दूर से देखते हैं तो लड़ाई का धुआं नजर आता है, जब नजदीक से देखते हैं तो पता चलता है कि लोग लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि धुआं या फिर घर लड़ाई नहीं पैदा करता बल्कि लोग लड़ाई पैदा करते हैं और लोगों को चाहिए शांति। इसलिए कहीं परिवर्तन लाना है तो लोगों में लाना है। 



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