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प्रोफेसर अरुण कुमार भगत की दो किताबों ने दी मार्केट में दस्तक...

Published At: Monday, 02 July, 2018 Last Modified: Monday, 02 July, 2018

 

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

दिल्ली स्थित आर्यवर्त साहित्य संस्कृति संस्थान में शनिवार को प्रोफेसर अरुण कुमार भगत की किताब 'आपातकालीन पत्रकारिता की संघर्ष गाथा' और 'आपातकाल की कहानियां' का लोकार्पण किया गया। किताब का लोकार्पण हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी ने किया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि आपातकाल के काले अध्याय पर एक साथ दो-दो किताबों का लोकार्पण कर रहा हूं। राजनेता सिर्फ पांच साल के लिए सोचता है जबकि एक दूरदर्शी लेखक अगली पीढ़ी तक के लिए सोचता है। उन्होंने आपातकाल के दौरान लोगों को किस तरह की यातनाएं झेलनी पड़ी इसके बारे में भी बताया और कहा कि जेल यातनाओं की यादें दुख देती हैं। राज्यपाल ने कहा कि सम्पूर्णानन्द ने कहा था कि ये क्रांति अभी पूरी नहीं हुई है। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों की चर्चा की और कहा कि आज जिस गुड गवर्नेंस की चर्चा चल रही है वो समाज के अंतिम व्यक्ति तक को महसूस होनी चाहिए। उसे ये एहसास होना चाहिए की सरकार उसकी है। राज्यपाल ने कहा कि 1975 में आपातकाल सत्ता सुख के लिए लगाया गया था।

इस मौके पर विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आंबेकर थे, जबकि प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे।

गौरतलब है कि प्रोफेसर अरुण कुमार भगत माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय नोएडा परिसर के प्रभारी हैं। प्रोफेसर भगत ने अभी तक कुल 15 किताबें लिखी हैं। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वे पिछले 23 वर्षों से आपातकाल पर शोध कर रहे हैं। जब आपातकाल लगाया गया उस समय वह 10 वर्ष के थे। उन्होंने व्यक्तिगत अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि उनके पिता एक शिक्षक थे जिनका वेतन आपातकाल के दौरान नसबंदी के लक्ष्य को पूरा न करने के कारण रोक दिया गया था।

  

 

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