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फोटोगैलरी: खूबसूरत मुस्कुराहट वाली ने रची एहसासों की रोमांटिक दास्तां...

Published At: Saturday, 23 June, 2018 Last Modified: Friday, 12 October, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

आगरा की युवा दंत चिकित्सक और लेखिका डॉ. मुक्ता भदौरिया का रोमांटिक उपन्यास ‘एहसास: एक खूबसूरत खामोश दास्तां’ ने मार्केट में दस्तक दे दी है। किताब का लोकार्पण ताज लिटरेचर क्लब के बैनर तले प्रतापपुरा स्थित होटल ऑरेंज में किया गया। कार्यक्रम के दौरान किताब पर आधारित नाट्य प्रस्तुति भी की गई, जिससे यहां मौजूद सभी लोग भाव विभोर हो उठे।

इस दौरान आगरा लिट्रेचर क्लब की संस्थापिका भावना वरदान शर्मा, मुख्य अतिथि डीएम गौरव दयाल, विधायक योगेंद्र उपाध्याय, विशिष्ट अतिथि व पूर्व राज्य मंत्री डॉ. चंद्र प्रकाश राय, डॉक्टर तान्या धाकरे, एबीपी न्यूज चैनल के दिल्ली के प्रड्यूसर व वरिष्ठ पत्रकार मनीष कुमार शर्मा, प्रीति उपाध्याय, सिविल सोसायटी के अनिल शर्मा व डॉ. रविंद्र भदौरिया मंच पर प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

इस मौके पर मुख्य अतिथि डीएम गौरव दयाल शर्मा ने कहा कि किताब को बहुत ही सरल भाषा में लिखी गई है, जोकि आम जनमानस की भाषा है। सभी वर्ग के व्यक्ति इसे आसानी से समझ सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि कठिन भाषा का प्रयोग किताब को एक विशेष जनसमूह में बांध देता, जिस कारण जनमानस किताब से अपने को जोड़ नहीं पाता है, ऐसे में ये किताब हर पाठक की पसंद बनेगी।

कार्यक्रम में मौजूद विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि वे भी लेखन के प्रेमी है, लेकिन अब समय की विवशता के कारण लिख नहीं पाते हैं। उन्होंने लेखिका को उनकी किताब के लिए बधाई दी। उन्होंने ऐसी किताबें समाज को आईना दिखाती हैं।

विशिष्ट अतिथि व पूर्व राज्य मंत्री डॉ. सी.पी राय ने कहा कि मुक्ताजी ने किताब में व्यक्ति के मनोभावों को और पति, पत्नी और प्रेमी सभी के संवेदनाओं को भलिभांति दर्शाया है। उन्होंने कहा कि लेखिका ने बखूबी प्रत्येक किरदार की मनोदशा समझकर हर एक के मनोविज्ञान को छू लिया है। जिस तरीके से उन्होंने घटनाओं का जीवंत खाका खींचा है वह काबिले तारीफ है।

आगरा लिट्रेचर क्लब की संस्थापिका भावना वरदान शर्मा ने इस दौरान कहा कि यह किताब एक ताजा हवा को झोंका और दाम्पत्य जीवन से झूझती हुई एक खूबसूरत कहानी है।

वहीं टीएलसी की अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मधु भारद्वाज ने किताब की समीक्षा करते हुए कहा कि-

‘एहसास मोहब्बत के कहां खामोश रहेंगे।

दिल की धड़कनों की तरह आवाज करेंगे।

प्यार के पंछी हैं हम, जरा हमें भी समझो।

तुम्हारे बगैर फिर हम कैसे उड़ान भरेंगे...

उन्होंने आगे कहा कि यह किताब दर्शाती है कि लेखिका को भावनाओं की अच्छी समझ है। बहुत ही जीवंत तरीके से कहानी परोसी गई है।

सामाजिक संस्था आराधना की महासचिव डॉ. हृदेश चौधरी ने कहा कि उन्होंने जितनी पुस्तक पढ़ी उससे लगा जैसे सब हमारे चारों तरफ ही है। उन्होंने कहा कि बड़ी ही खूबसूरती से यह किताब लिखी गई है। इतनी कुशलताओं से मानवीय संवेदनाओं का उल्लेख करने के लिए मुक्ताजी को बधाई, क्योंकि किताब समाज में सुधार का कार्य भी करती हैं।

किताब के प्रकाशक टैलेंट फ्लिक प्रमोशंस लखनऊ के अनुपम जायसवाल ने कहा कि यह किताब आधुनिक समाज की व्यस्त जीवन शैली में तेजी से बदलते रिश्तों और उपजी समस्याओं का एक जीवंत खाका खींचती है। महत्वाकांक्षा, दूरिया, गलतफहमिया, रिश्तों को झकझोर देती हैं, पर जब प्यार आवाज देता है तो दोनों के बीच प्यार के सिवा कुछ भी नहीं बचता। उन्होंने कहा कि यह कहानी बहुत ही दमदार है, जिसमें आज की युवा पीढ़ी की प्रमुख समस्याओं को बखूबी दर्याशा है। उन्होंने कहा कि लेखिका मुक्ताजी ने लीक से हटकर लिखा है जो काबिले तारीफ है। इसलिए यह किताब जरूर पढ़ें।    

महिला शांति सेना की अध्यक्ष वत्सला प्रभाकर ने कहा कि वे एक लेखन वाले परिवार से आती हैं और जानती हैं कि कितनी मेहनत है किताब लिखने में। कितने ही क्षणों को लेखक जीता है, अपनी लेखनी से उभारता है। इतने भावनात्मक विषय पर लेखनी चलाने के लिए उन्होंने डॉ. मुक्ता को बधाई भी दी।

काॉस्मो गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. रश्मि खंडेलवाल ने कहा कि बहुत ही कम लोग ऐसे टॉपिक पर बात करते हैं। लेकिन मुक्ताजी ने ऐसे टॉपिक को चुना, जो काबिले तारीफ है। 

खत्री महिला सभा की अध्यक्ष शीला बहल ने कहा कि यदि ऐसी किताबें समाज में आएं तो परिवारों में उत्पन्न होने वाली समस्याएं शायद कुछ कम हो जाएं, क्योंकि किताब में कहानी नहीं होती वह हमारी मार्गदर्शक भी होती है। 

डॉ. प्रतिभा पाराशर ने कहा कि पढ़ने के बाद यह कहीं से नहीं लगा कि लेखिका का यह पहली किताब है। उन्होंने कहा कि इश्क बहुत खूबसूरत है। उससे भी खूबसूरत हैं वो दो लोग, जो इसे निभाते हैं।


स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीषा गर्ग ने कहा कि हर एक व्यक्ति को अपनी जीवन संगिनी को समझना चाहिए। स्त्री केवल पुरुष की जागीर नहीं है। उसकी भी अपनी इच्छाएं हैं। इसलिए जहां दोनों ही एक दूसरे की कद्र करें वहीं खुशी रहती है।

नेत्र सर्जन डॉ. मनोज गौतम ने कहा कि लेखिका ने बखूबी मानवीय संवेदनाओं को कागज पर उतारा है और हिंदी भाषा चुनने के लिए मैं विशेष रूप से धन्यवाद देती हूं, शुभकामनाएं देती हूं। दाम्पत्य जीवन में एक दूसरे को रिस्पेक्ट देना बहुत आवश्यक है, तभी हम खुशहाल रह सकते हैं।

डॉ. रविंद्र भदौरिया ने कहा कि प्रत्येक स्त्री की बहुत सारी छोटी-छोटी इच्छाएं होती हैं। बहुत बड़ी न सही पर हम छोटी-छोटी इच्छाएं पूरी करके शायद अपने जीवन साथी को कुछ दे पाएं। कोई पत्नी ताजमहल नहीं मांगती। पर हर पति की ये कोशिश होनी चाहिए कि अपनी पत्नी का सम्मान करें और उसके हुनर को पहचान कर उसे जीवन में आगे बढ़ने पर पूरा सहयोग करें। ये पुस्तक भी ऐसी ही कोशिश है मुक्ताजी के लिए।   

द्वितीय सत्र में एबीपी न्यूज चैनल के प्रड्यूसर मनीष कुमार शर्मा की किताब 'गंदगी के महारथी' का भी लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में एहसास कॉन्टेस्ट का आयोजन किया गया, जिसमें दीप्ति जैन को प्रथम व दिल्ली के रितेश वर्मा को द्वितीय पुरस्कार दिया गया। शुभाशीष गांगुली और सोम्पा गांगुली ने संगीतमयी प्रस्तुति दी। इस मौके पर काव्यधारा भी बही। प्रकाशक अनुपम जायसवाल का सम्मान भी किया गया।   

तस्वीरों में देखें विमोचन की झलकियां-   












                      


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