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वरिष्ठ पत्रकार शशि शेखर के पिता व साहित्यकार जगत प्रकाश चतुर्वेदी की याद में स्मरण सभा...

Published At: Saturday, 03 November, 2018 Last Modified: Tuesday, 13 November, 2018

">समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।  

हिंदी दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ के प्रधान संपादक शशि शेखर के पिता व हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार जगत प्रकाश चतुर्वेदी का बीते दिनों निधन हो गया। वे 90 साल के थे और आगरा से उनका गहरा लगाव था। लिहाजा उनकी स्मृतियों को सहेजे रखने के उद्देश्य से एक सन्स्मरणात्मक संगोष्ठी (शोक सभा) का आयोजन 17 नवंबर, दोपहर तीन बजे आगरा स्थित आगरा कॉलेज के गंगाधर शास्त्री भवन में किया जाएगा।

गौरतलब है कि 6 अक्टूबर को उन्हें उनके निवास स्थल मैनपुरी से कूल्हे की हड्डी टूटने के बाद सर्जरी के लिए देहरादून लाया गया था, जहां उनका इलाज सिनर्जी चिकित्सा संस्थान में चल रहा था। अस्पताल में उनके कूल्हे की सर्जरी हो गई थी, लेकिन बाद में उनके फेफड़े संक्रमित हो गए, जिसके बाद उन्हें बचाया न जा सका।

जगत प्रकाश चतुर्वेदी आगरा विश्वविद्यालय के संस्थान कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषाविज्ञान विद्यापीठ के पूर्व निदेशक थे। इसके पूर्व उन्होंने काशी-हिन्दू विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी सहित तमाम राजकीय पदों पर कार्य किया। 

वे प्रखर वक्ता, कवि और लेखक भी थे। उनके लिखे गीत और कविताएं काव्य गोष्ठियों और कई मंचों पर काफी लोकप्रिय हुए हैं। उनके निर्देशन में कई नामचीन कवि जैसे सोम ठाकुर, चौधरी सुखराम, प्रताप दीक्षित जैसे लोगों ने बड़ा मुकाम पाया। उनकी साहित्यिक विरासत उनके पुत्र शशि शेखर में भी झलकती है।

वे नव गीत आंदोलन के सशक्त हस्ताक्षर थे। उनकी पहली काव्य-कृति ‘दीपवेला’ 1950 के दशक में खासी चर्चित रही थी। ताजमहल पर उनकी कविता को अंतरराष्ट्रीय ख्याति भी मिली।

उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में 'बदली भी धूप भी’, ‘मेरे वन पाखी’ भी हैं। उनके द्वारा लिखे गए संस्मरण, रिपोर्ताज और यात्रा वृतान्त हिंदी की लोकप्रिय पत्रिकाओं में प्रकाशनोपरांत पठनीय ही नहीं संग्रहणीय भी हैं।

     



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