Share this Post:
Font Size   16

जोश व देशप्रेम की भावना जगाएगी पत्रकार दिनेश काण्डपाल की ये किताब

Published At: Monday, 14 January, 2019 Last Modified: Monday, 14 January, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

हिंदी के पाठकों के लिए पहली बार युद्ध की सत्य और रोचक कहानियों का संग्रह एक किताब के रूप में उपलब्ध है। भारतीय सेना के जांबाज़ जवानों की वीरता की शौर्य गाथाएं समेटकर लाने वाले दिनेश काण्डपाल वरिष्ठ पत्रकार हैं। उनकी लिखी किताब ‘पराक्रम-भारतीय सैनिकों के शौर्य और बलिदान की यादगार गाथाएं‘ का लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) गुरमीत सिंह और कर्नल (रिटा.) एनएन भाटिया ने नई दिल्ली के प्रगति मैदान में अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला 2019 में 11 जनवरी को विमोचन किया।

प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस किताब में दिनेश काण्डपाल ने वर्ष 1947 से लेकर करगिल तक भारतीय सैनिकों की वीरता की सच्ची कहानियों को पाठकों तक पहुंचाया है। दिनेश काण्डपाल फिलहाल ‘इंडिया टीवी’ में सीनियर प्रड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी दिनेश काण्डपाल ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत आकाशवाणी की युववाणी और विदेश प्रसारण सेवा से अनुवादक और एनाउंसर के तौर पर की। इसके अलावा एस वन, ईटीवी, न्यूज़ एक्सप्रेस समेत कई चैनलों में सेवा प्रदान कर चुके हैं। मूलरूप से उत्तराखंड के परिवार से आने वाले दिनेश काण्डपाल ने सेना के परिवेश को बेदह करीब से देखा है। ‘पराक्रम’ उनकी पहली किताब है।

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) गुरमीत सिंह ने पुस्तक मेले में आयोजित इस कार्यक्रम में कहा, ‘दिनेश काण्डपाल का ये प्रयास बेहद सराहनीय है। दिनेश काण्डपाल ने ये किताब बहुत रोचक शैली में लिखी है, जो पाठकों को बहुत प्रेरित करेगी। ये किताब देश के वीर जवानों की कहानियों को लोगों तक लाने का एक ईमानदार प्रयास है। इस किताब को पढ़कर पाठकों के भीतर देशप्रेम, जोश और वीरता की भावनाओं का संचार होगा।‘ लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) गुरमीत सिंह भारतीय सेना के डिप्टी चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के पद से रिटायर हुए हैं और सेना के सर्वोच्च मेडलों से सम्मानित किए गए हैं, वह चार बार राष्ट्रपति द्वारा भी सम्मानित किए गए हैं।

विमोचन के मौके पर दिनेश काण्डपाल ने कहा, ‘एक फौजी पिता का बेटा होने के नाते और उत्तराखंड के चौखुटिया कस्बे में अनेक सैनिक परिवारों के बीच बीते बचपन के कारण सेना के प्रति लगाव पैदा हुआ। हमेशा ही सेना के लिए कुछ करने की ललक थी, जिससे उन्हें ये किताब लिखने की प्रेरणा मिली।‘ दिनेश काण्डपाल ने कहा कि वो चाहते हैं कि देश के युवा भारतीय सेना को जानें, भारतीय सैनिकों की वीरता, शौर्य और योगदान को पहचानें और ‘पराक्रम’ उसी दिशा में उठाया गया एक कदम है।

कर्नल (रिटा.) एनएन भाटिया ने कहा, ‘अफसोस की बात है कि देश में आम लोगों को फौज के बारे में बहुत कम जानकारी है। ऐसे में सैनिकों की कहानियों को लोगों के सामने लाने वाले दिनेश काण्डपाल को बहुत धन्यवाद देता हूं।‘ कुमाऊं रेजिमेंट से सेवानिवृत्त हुए कर्नल भाटिया कार्यक्रम में भावुक हो गए जब उन्होंने कुछ यादों को ताज़ा करते हुए बताया कि वेलोंग की लड़ाई में उनके भाई मेजर प्रेम भाटिया को वीर चक्र मिला था। लड़ाई के दौरान घायल हुए मेजर प्रेम भाटिया के शरीर से 32 गोलियां निकाली गईं थीं।



पोल

सोशल मीडिया पर पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है, क्या है आपका मानना?

पत्रकार भी दूध के धुले नहीं हैं, उनकी भी जवाबदेही होनी चाहिए

ये पेड आईटी सेल द्वारा पत्रकारिता को बदनाम करने की साजिश है

Copyright © 2019 samachar4media.com