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पत्रकार अर्जुन निराला का सवाल- तुम कब डॉक्टर बन गईं मुझे पता ही नहीं चला माँ...

Published At: Saturday, 05 January, 2019 Last Modified: Monday, 07 January, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

अमर उजाला समूह से जुड़े पत्रकार और कवि अर्जुन निराला की कलम कई बार कविताएं भी रचती है। उनके द्वारा लिखी गईं कई कविताओं का संकलन एक किताब की शक्ल में प्रकाशित हुआ है। प्रस्तुत है उनके द्वारा रचित दो कविताएं, जिन्हें पढ़कर आपकी आंखें नम हो जाएंगी...

माँ... 

जब भी पूछता हूं   
तुम कहती हो
ठीक हूं
अच्छी हूँ
चंगी हूं...
फिर ये 
गो‌ल‌ियां
ये सीरिंज             
ये दवा की बोतलें
तुम कब 
डॉक्टर बन गईं
मुझे पता ही नहीं चला
माँ...

नर पिशाच

किसी की जिंदगी
यूं बर्बाद कर देते हो
तुम
तेजाब डालकर
नर्क बना देते हो
एक हंसती-खेलती जिंदगी
खत्म कर देते हो
एक महकता उपवन
बदरंग कर देते हो
अरमान
जला देते हो
सपने देखने वाली आखें
तुम्हे जेल नहीं
मिलनी चाहिए सजा-ए-मौत
तुम्हारे लिए
बस,
एक ही शब्द है
मेरे पास
....नर पिशाच।।

 

 



पोल

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