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जब रजत शर्मा को बेचनी पड़ी थी अपनी प्रॉपर्टी...

Published At: Monday, 10 December, 2018 Last Modified: Monday, 10 December, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

टीआरपी की तगड़ी फाइट के मद्देनजर कई चैनल अपनी स्ट्रेटजी बनाने में लगे हुए है। हालांकि, इस बारे में ‘इंडिया टीवी’ ( INDIA TV) की एमडी और सीईओ रितु धवन का कहना है कि उनका चैनल नंबरों की इस अंधी दौड़ में शामिल नहीं है।

रितु धवन का कहना है, ‘इंडिया टीवी’ ने वर्ष 2004 में हिंदी न्यूज मार्केट में कदम रखा था। उस समय आजतक, एनडीटीवी इंडिया, जी न्यूज और स्टार न्यूज जैसे चैनल मार्केट में पहले से थे, इसके बावजूद यह चैनल अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा और तब से मार्केट शेयर पर इसकी बड़ी हिस्सेदारी बनी हुई है।

 

ज्ञात है कि इंडिया टीवी की राह में काफी उतार-चढ़ाव भी आए हैं। शुरुआत के दो वर्षों में जब कंपनी काफी नाजुक दौर में थी तो चैनल के फाउंडर रजत शर्मा को कर्मचारियों की सैलरी आदि के भुगतान को पैसे जुटाने के लिए प्रॉपर्टी बेचने को मजबूर होना पड़ा था। 

रितु कहती है कि कई मुश्किलों के बावजूद भी कंपनी का सफर जारी रहा और नोटबंदी के बावजूद 31 मार्च 2017 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में इंडिया टीवी की पैरेंट कंपनी इंडिपेंडेंट न्यूज सर्विस (आईएनएस) को टॉप लाइन और बॉटम लाइन दोनों में ग्रोथ देखने को मिली।रितु धवन के अनुसार, ‘रेवेन्यू की बात करें तो इस दिशा में चैनल तमाम तरह की बाधाओं का सामना कर रहा है। 

दरअसल, व्युअरशिप में अच्छी खासी बढ़ोतरी के बावजूद ऐडवर्टाइजर्स और एजेंसियों को विज्ञापन की दरें बढ़ाने में मुश्किल हो रही हैं, लेकिन हमारी टीम ने भी इस दिशा में काफी अच्छा काम किया है। यह मांग और आपूर्ति का खेल है और हमारी टीम बहुत अच्छे से इसे खेल रही है। आने वाले चुनावों के रूप में हमें शानदार अवसर मिला है और इस दौरान हमें अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। ‘उन्होंने कहा, ‘इंडिया टीवी का 14 साल का सफर काफी रोचक रहा है। हमारी शुरुआत सीरियस न्यूज दिखाने से हुई थी। इसके बाद रेटिंग बढ़ाने के मकसद से हमनें 2008 के आखिर में पॉपुलर न्यूज दिखाना शुरू कर दिया, लेकिन पिछले 5 सालों से हमारा फोकस न्यूज पर है। जो लोग नियमित रूप से हमारा चैनल देखते आए हैं,  वे बता सकते हैं कि हमारी जो छवि धार्मिक और पौराणिक कथाओं वाले शो दिखाने की बन गई थी, वह अब फिर से हार्डकोर न्यूज में बदल रही है।

उनका कहना है, ’जहां तक हमारी व्युअरशिप की बात है, हिंदीभाषी मार्केट में हमारी पहुंच 100 मिलियन से ज्यादा लोगों तक हो चुकी है। रही बात नंबर गेम की तो हमारा फोकस इसके बजाय विश्वसनीय समाचार स्रोत के रूप में बने रहने को लेकर है। नंबरों के मामले में हमारी स्थिति ठीक है। हमारा फोकस क्वॉलिटी पर है और कंटेंट के मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं करना चाहते हैं।‘ ‘आप की अदालत’ जैसे लोकप्रिय शो को लोग काफी पसंद करते हैं और इसने हमेशा व्युअरशिप को बढ़ाने का काम किया है, इसके बावजूद बार्क की रेटिंग में ये टॉप पॉजिशन पर नहीं है, इस बारे में रितु धवन का कहना है, ‘हम नंबरों की अंधी दौड़ में शामिल नहीं हैं। हमने अपने लिए ऐसे कोई टार्गेट सेट नहीं किए हैं और इस दौड़ में शामिल होने से मना कर दिया है। आज से करीब दस वर्ष पहले जब हमें नंबरों की जरूरत थी, तब हमने टार्गेट सेट किए थे और नंबर वन पर रहे थे। नंबर हासिल करना मुश्किल नहीं है, अच्छे नंबरों के साथ क्वॉलिटी और विश्वसनीयता बनाए रखना खास है और हम इसी पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

फ्री टू एयर (FTA) चैनल के रूप में इसकी चुनौतियों के बारे में रितु धवन का कहना है, ‘हालांकि हमारा वेंचर बेहतर स्थिति में है, डिस्ट्रीब्यूशन हमें काफी प्रभावित करता है। कीमत के मामले में यह ब्रॉडकास्टर पर काफी प्रभाव डालता है। हर साल बिना किसी आधार के कैरिज फीस बढ़ती जाती है। इसके अलावा एक मामला ये भी है कि डिजिटाइजेशन के दौरान जो लोग कॉस्ट कटिंग से लाभ की उम्मीद जता रहे थे, वह अपने मकसद से काफी दूर हैं। हमें लगता है कि कैरिज फीस के निर्धारण के मामले में एफटीए चैनलों को भुगतान वाले चैनलों (pay channels) से अलग रखना चाहिए।’



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