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इंटरैक्टिव TV पर है अमर उजाला का फोकस: प्रोबल घोषाल, अमर उजाला

Published At: Friday, 05 October, 2018 Last Modified: Friday, 12 October, 2018

अपेक्षा मिश्रा ।।

आजकल डिजिटल का जमाना है। ऐसे में ऑनलाइन कंटेंट का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करने वालों के साथ ही क्षेत्रीय भाषा में विडियो देखने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है और यह बहुत तेजी से बढ़ता हुआ मार्केट बनता जा रहा है।

इस बारे में ‘अमर उजाला पब्लिकेशंस लिमिटेड’ के डायरेक्टर प्रोबल घोषाल का कहना है कि पाठकों की जरूरतें बदल रही हैं। ऐसे में कंटेंट को उसी के अनुसार तैयार करने और सामने आ रहीं चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक के इस्तेमाल के साथ ही उनका ऑनलाइन ब्रैंड विडियो पर ज्यादा फोकस कर रहा है। इसके अलावा उन्होंने ये भी बताया कि ब्रैंड किस तरह से प्रोग्रामैटिक एडवर्टाइजिंग फॉर्मेट का इस्तेमाल कर रहे हैं और यह डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन एडवर्टाइजिंग के भविष्य को एक आकार प्रदान कर रहा है।

प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश-

सबसे पहले अपनी कोर ब्रैंड वैल्यू के बारे में बताएं, जिसकी वजह से आपके ब्रैंड की क्रेडिबिलिटी बनी हुई है?

‘अमर उजाला’ हमेशा विश्वसनीयता, ईमानदारी, अखंडता और निष्पक्षता में यकीन रखता है। ‘अमर उजाला’ अखबार की डिजिटल शाखा amarujala.com पर पाठकों को ऐसा कंटेंट मिलता है, जिस पर वे भरोसा कर सकते हैं। इन दिनों सभी लोग फेक न्यूज के खतरे से जूझ रहे हैं। खासकर सोशल मीडिया इससे बुरी तरह प्रभावित है। ऐसे में हमें अपने ब्रैंड को भरोसेमंद बनाए रखना बहुत जरूरी है, ताकि पाठकों का विश्वास कायम रखा जा सके।

हमारा मानना है कि सनसनीखेज न्यूज आदि के द्वारा पाठकों को अपने साथ नहीं जोड़ा जा सकता है। इसके बजाय हम इस बात पर विशेष ध्यान देते हैं कि पाठकों को विश्वसनीय खबरें मिल सकें, फिर चाहे वह वेबसाइट हो अथवा मोबाइल ऐप।

अमर उजाला में ऐसे कौन से फैक्टर्स हैं, जो इसे अन्य प्रतियोगियों से अलग बनाते हैं ?

हम अपने पाठकों को जो भी कंटेंट उपलब्ध कराते हैं, उसमें हम विश्वसनीयता का विशेष ध्यान रखते हैं। कंवर्जेंस स्टोरी (convergence story) तैयार करना और विभिन्न माध्यमों से अपने पाठकों से संवाद कायम करना, यही कुछ बातें हमें अपने प्रतियोगियों से अलग बनाती हैं।

अखबार की स्टोरी को हम अपनी वेबसाइट और विडियो सेक्शन पर भी इस्तेमाल करते हैं। हम अपने पाठकों को ऑनलाइन, विडियो और प्रिंट यानी सभी माध्यमों में ज्यादा से ज्यादा कंटेंट उपलब्ध कराना चाहते हैं। इसके अलावा पाठकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हम टेक्नोलॉजी का सहारा भी ले रहे हैं। इसके लिए हम अखबार में छपी अपनी बड़ी स्टोरी में ‘क्यूआर कोड’ (QR code) फीचर का भी इस्तेमाल करते हैं, इस कोड को स्कैन कर हमारा पाठक उस स्टोरी को ऑनलाइन भी देख सकता है। हमारे लिए अपने पाठकों से जुड़े रहना सबसे ज्यादा जरूरी है।

अमर उजाला ऐप के टार्गेट ऑडियंस मुख्य रूप से टीयर टू (tier 2) और टीयर थ्री (tier 3) शहरों से हैं। यदि डिजिटल मार्केटिंग की बात करें तो इसके सामने क्या चुनौतियां हैं ?

आजकल किसी भी अन्य माध्यम के मुकाबले विडियो कंटेंट लोगों को बहुत भा रहा है। डिजिटल की बात करें तो अंग्रेजी में 150 मिलियन यूजर्स के मुकाबले क्षेत्रीय भाषा के यूजर्स की संख्या 500 मिलियन है। टीयर टू (tier 2) और टीयर थ्री (tier 3) शहरों में क्षेत्रीय भाषा में विडियो ज्यादा देखा जा रहा है। इससे विडियो बिजनेस में हमारे पास बहुत अवसर हैं। इसके अलावा, मोबाइल मार्केट बढ़ने के साथ ही ऑनलाइन विडियो कंटेंट भी ज्यादा देखा जा रहा है।

टीयर टू और टीयर थ्री शहरों के यूजर्स की मानसिकता शहरी क्षेत्रों में रहने वालों से काफी अलग होती है। ऐसे में अपने पाठकों के अनुसार कंटेंट को तैयार करना चुनौती होती है।amarujala.com का इंटरैक्टिव टेलिविजन हमें अपने पाठकों से प्रभावी रूप से जोड़ने में काफी मददगार होता है।

हमने एक नया फीचर ‘City app’ शुरू किया है। इसकी मदद से हमारे पाठक अपने शहर से जुड़ी खबरों के बारे में अपडेट रहते हैं। फिलहाल यह ऐप आगरा, कानपुर, वाराणसी, लखनऊ, इलाहाबाद और चंडीगढ़ में काम कर रहा है। हम इसका और विस्तार करना चाहते हैं। इस ऐप की मदद से न सिर्फ यूजर्स अपनी पसंद की स्टोरी देख सकते हैं बल्कि इस पर रेस्टोरेंट्स, सिनेमाघर और ब्लड बैंक आदि की जानकारी भी मिलती है।

अमर उजाला के डिजिटल विंग की कंटेंट मार्केटिंग स्ट्रेटजी के बारे में कुछ बताएं ?

हमारी कंटेंट मार्केटिंग मुख्यतः दो बिजनेस मॉडल पर आधारित है। पहले में हम विभिन्न जॉनर जैसे- कॉमेडी, एंटरटेनमेंट, लाइफ स्टाइल, न्यूज आदि में छोटे-छोटे विडियो तैयार करते हैं। इसके अलावा दूसरे में यूजर्स के collaborative बिजनेस मॉडल में विश्वास रखते हैं, जिसमें कंज्यूमर्स विडियो कंटेंट तैयार करने में शमिल होते हैं और उस कंटेंट को हम अपने प्लेटफॉर्म पर भी चलाते हैं।

उदाहरण के लिए 'अमर उजाला काव्य' के जरिए हमने देश भर के कवियों की कविताओं का विडियो कंटेंट शामिल किया है। इसमें विभिन्न कवियों की भागीदारी है। इसके अलावा, समय-समय पर हम अपने स्टूडियो में विभिन्न कवियों को बुलाकर कार्यक्रम भी कराते हैं, जिसे हम अपनी वेबसाइट पर भी दिखाते हैं। ऐसे में यूजर्स इन दोनों माध्यमों से हमारे साथ जुड़ सकते हैं।  

प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले ज्यादा कंज्यूमर्स को आकर्षित करने में आपके ओडियो, स्थानीय कंटेंट और खुश खबर जैसे सेगमेंट कैसे आपकी मदद कर रहे हैं ?

हमारे लिए कंटेंट सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। ‘ऑडियो’ फीचर बिल्कुल मूविंग रेडियो की तरह है। इस फीचर की सहायता से किसी आर्टिकल को खुद पढ़ने के बजाय आप सुन सकते हैं। इस फीचर की खास बात यह है कि आप ड्राइविंग करते समय, खाना पकाते समय अथवा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते समय भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। 

आजकल शहरों में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोग परेशान हैं। ‘खुश खबर’ फीचर में हम अपने पाठकों को अच्छी खबर के बारे में बताते हैं, जिससे अच्छा माहौल बनता है। इस सेगमेंट में स्टोरी अथवा विडियो के रूप में अच्छी खबर, कोई आइडिया और लाइफस्टाइल कंटेंट होता है, जिससे माहौल बेहतर होता है।

डिजिटल पर अमर उजाला के विज्ञापन खर्च का प्रतिशत कितना है? कुछ ऐसे डिजिटल खर्च के बारे में बताएं, जिसने ब्रैंड के प्रभाव को बढ़ाने और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसकी पहुंच बढ़ाने में योगदान दिया हो?

डिजिटल पर हमारे विज्ञापन खर्च में काफी तेजी से वृद्धि हो रही है। हमें इसे प्रॉफिट देने वाला बिजनेस बनाना है। फिलहाल टेक्नोलॉजी, नए संसाधन, नए प्लेटफॉर्म्स आदि को देखते हुए इसमें खर्च करने का समय है। डिजिटल में ऑनलाइन और प्रिंट ब्रैंड के एकीकरण से हमें अपनी पहुंच और अवसर दोनों में मदद मिलेगी। हम ऐसा कॉमन प्लेटफॉर्म तैयार करने में लगे हुए हैं, जहां कंज्यूमर ज्यादा कंटेंट के लिए प्रिंट के साथ ही वेबसाइट का भी इस्तेमाल कर सके।

डिजिटल को लेकर अगले पांच वर्षों के लिए आपकी क्या स्ट्रेटजी है ?

इसके लिए हमारा रोडमैप एकदम साफ है। हम विडियो, एडिटोरियल कंवर्जेंस, इंटरैक्टिव टीवी और ज्यादा से ज्यादा स्थानीय कंटेंट पर ध्यान दे रहा है। अगले पांच वर्षों में हमारा फोकस ज्यादा से ज्यादा रेवेन्यू जुटाना है, जिसके लिए हम प्रोग्रामैटिक एडवर्टाइजिंग में निवेश कर रहे हैं, जो वक्त की जरूरत है। डिजिटल पर जब हम ब्रैंड के साथ जुड़ते हैं, तब टार्गेट ऑडियंस को जागरूक करना और अमर उजाला डॉट कॉम की ब्रैंड पोजीशनिंग बहुत ही अहम हो जाती है। ऐसे में प्रोग्रमैटिक, पब्लिशर्स और ब्रैंड्स कंज्यूमिंग ऐड् से हम अपने ब्रैंड में और वैल्यू शामिल कर पाएंगे। इस तरह की डिजिटल स्ट्रेटजी से न सिर्फ हमारी वेबसाइट का बिजनेस बढ़ेगा, बल्कि हमारे ऑनलाइन ब्रैंड के रेवेन्यू में भी तेजी से बढ़ोतरी होगी। 



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