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स्ट्रिंगर्स को लेकर ITV के एडिटर (मल्टीमीडिया) अजय शुक्ल ने की ये अहम टिप्पणी

Published At: Wednesday, 27 February, 2019 Last Modified: Thursday, 28 February, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

देश में टेलिविजन न्‍यूज इंडस्‍ट्री को नई दिशा देने और इंडस्‍ट्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम योगदान देने वालों को सम्मानित करने के लिए 16 फरवरी को नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में ‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) दिए गए। इनबा के 11वें एडिशन के मौके पर आयोजित समारोह में कई पैनल डिस्कशन भी हुए।

ऐसे ही एक पैनल का विषय ‘रीजनल मीडिया: खतरा, खबरें और कमाई’ रखा गया था, जिसमें मीडिया के दिग्गजों ने अपने विचार व्यक्त किए। समाचार4मीडिया डॉट कॉम के एग्जिक्यूटिव एडिटर अभिषेक मेहरोत्रा ने बतौर सेशन चेयर इसे मॉडरेट किया। इस पैनल डिस्कशन में ‘नेटवर्क18’ (हिंदी नेटवर्क) के एग्जिक्यूटिव एडिटर अमिताभ अग्निहोत्री, सहारा इंडिया टीवी नेटवर्क’ के ग्रुप एडिटर मनोज मनु, ‘जनतंत्र टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ वासिंद्र मिश्र, इंडिया न्यूज’ के चीफ एडिटर (मल्टीमीडिया) अजय शुक्ल, ‘पीटीसी नेटवर्क’ के मैनेजिंग डायरेक्टर-प्रेजिडेंट रबिंद्र नारायण और ‘बीबीसी गुजराती’ के एडिटर अंकुर जैन शामिल रहे।

पैनल डिस्कशन के दौरान अभिषेक मेहरोत्रा द्वारा यह पूछे जाने पर कि रीजनल मीडिया में जब हम खबरों की बात करते हैं तो उन खबरों के साथ पत्रकारों और रिपोर्टरों पर कितना खतरा होता है?, ‘इंडिया न्यूज’ के चीफ एडिटर (मल्टीमीडिया) अजय शुक्ल ने कहा, ‘जब हम खबरों पर चलते हैं तो हमें कोई खतरा नहीं होता है। खतरा सामान्यतः रेवेन्यू को लेकर है। देश की पूरी मीडिया इंडस्ट्री में सबसे बड़ी समस्या रेवेन्यू को लेकर है और रेवेन्यू को हम कैसे फोकस करें, ये हमारे लिए आज मायने रखता है। एक पत्रकार होते हुए भी हमें इस बारे में सोचना पड़ेगा, क्योंकि यदि आधार मजबूत नहीं होगा तो निश्चित रूप से इमारत गिरेगी। इसलिए जरूरत है कि पत्रकार भी उस दिशा में सोचें कि कैसे नियमों का पालन करते हुए हम ज्यादा से ज्यादा रेवेन्यू जुटा सकते हैं। रही बात खबरों की तो एक मंत्र है कि जो है, जहां है, जैसा है, हम उसे उसी तरह से प्रस्तुत करें। यदि हम ऐसा करेंगे तो मुझे लगता है कि किसी तरह का विवाद नहीं उठेगा और आप मार्केट में बने रहेंगे।’

अजय शुक्ल ने कहा, ’इसका बड़ा उदाहरण इंडिया न्यूज हरियाणा है। चैनल की पिछले हफ्ते की टीआरपी 52.8 प्रतिशत रही है। हम पिछले 10 सालों से नंबर वन वहां पर इसलिए हैं कि हमने वहां पर ये मंत्र अपनाया है। ये मंत्र हमने वहां तब अपनाया, जब हमारे मीडिया हाउस के वहां पर अपने हित थे, लेकिन हमने उनको किनारे किया और हमने उस चीज को देखा कि यदि हम उस पर चलेंगे तो क्या फायदा होगा। अंततः हमारी इंडस्ट्री को भी फायदा हुआ, हमारे लोगों को भी फायदा हुआ और चैनल आगे बढ़ा। तो, मुझे लगता है कि ये तरीका अपनाएंगे तो बेहतर होगा।’

अभिषेक मेहरोत्रा द्वारा यह पूछे जाने पर कि रीजनल मीडिया की असली तकत उसके स्ट्रिंगर्स होते हैं। अक्सर स्ट्रिंगर्स की क्रेडिबिलिटी अथवा उसके अपने रेवेन्यू मॉडल को लेकर सवाल उठते हैं। ऐसे में क्या हमें स्ट्रिंगर्स की स्थिति को बेहतर करने के प्रयास करने चाहिए? अजय शुक्ल ने कहा, ‘चैनल हो अथवा न्यूज पेपर, उसमें स्ट्रिंगर्स से ज्यादा मजबूत कड़ी कोई नहीं हो सकती है। हमें यह बात पहचाननी पड़ेगी। रीजनल मीडिया के रेवेन्यू में स्ट्रिंगर्स का बहुत बड़ा योगदान है। ऐसे में स्ट्रिंगर्स को मजबूत करने और उसके बारे में हमें सोचने की जरूरत है। हिन्दुस्तान अखबार में अपने कार्यकाल के दौरान हमनें स्ट्रिंगर्स के लिए ऐसा तरीका अपनाया था कि वे खबरों से न खेलें और अपनी आय बढ़ाएं। उसके लिए हमारे द्वारा अपनाया गया तरीका इतना सफल रहा कि इत्तेफाक से अखबारों का रेवेन्यू भी बढ़ा और सर्कुलेशन में भी काफी इजाफा हुआ। अब हमने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भी इस तरह की शुरुआत की है और उसके अच्छे परिणाम सामने आए है। ऐसे में हमें उससे एक चीज क्लीयर कर लेनी होती है कि खबरों को लेकर हमें कोई समझौता नहीं करना है। पेड न्यूज की बात करें तो न मैंने ये देखी है, न मैंने की है और न ही कोई मेरे चैनल में चलवा सकता है।’

उन्होंने कहा, ‘समस्या तब होती है जब हम खबर की पुष्टि किए बिना जल्दबाजी में उसे चला देते हैं कि अभी चला दो, बाद में देख लेंगे। लेकिन मेरे यहां मैं बिना पुष्टि किए उसे नहीं चलाता हूं। हाल ही में एमडीएच मसाले के संस्थापक के निधन को लेकर जो अफवाह उड़ी थी, वह खबर हमने न अपने अखबार में छापी और न ही किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल की। इसके साथ ही हम ही वह पहले व्यक्ति थे, जिसने स्पष्ट किया था कि ये खबर झूठी है और ऐसा कुछ नहीं हुआ है। इस मामले में भी खबर की पुष्टि के लिए हमें वही स्ट्रिंगर नेटवर्क काम आया, जो सीधे उनके घर जाकर सही खबर निकाल लाया। कहने का मतलब है कि स्ट्रिंगर्स हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं।’

अजय शुक्ल का यह भी कहना था, ‘मीडिया अपने दायित्व का निर्वाह पूरी तरह से कर रहा है। जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि जो जहां है और जैसा है, उसे हम उसी तरह से दिखाएं, बाकी तो पाठक/दर्शक बहुत समझदार हैं। वे समझ जाते हैं कि कौन क्या है। हालांकि इस स्थिति में कुछ कमियां हो सकती हैं, लेकिन सामान्य तौर पर मीडिया अपने दायित्वों का निर्वाह कर रहा है। उसे लेकर तमाम तरह के प्रोपेगेंडा खड़े किए जाते हैं, उसकी क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठाया जाता है। हालांकि मीडिया की क्रेडिबिलिटी उतनी खराब नहीं है, जितनी दिखाई जाती है। अभी स्ट्रिंगर पर बात हुई। हम कहते है कि स्ट्रिंगर सिर्फ एक ही काम करेगा, हम उसे कुछ रुपए भेज रहे हैं। उसमें वो अपना घर भी चलाएगा और पत्रकारिता भी करेगा, तो क्या वह ये सब ईमानदारी से कर पाएगा? दरअसल, इसे लेकर हम झूठ बोलते हैं, हम मुगालते में हैं। वो निश्चित रूप से दूसरा काम करता है। जब वह यह करता ही है तो क्यों न हम उसे अपने यहां इस तरह रेगुलर करें कि वो बेईमानी न कर पाए। इसके लिए हम चेक एंड बैलेंस का सिस्टम बनाएं। जब हम इस तरह का सिस्टम बनाते हैं, तो कहीं पर भी परेशानी नहीं होती है। मीडिया भी खराब नहीं होता है और वह अपने दायित्वों का सही से निर्वहन करता है और सहयोग करता है। रीजनल मीडिया जितना बेहतर करता है, उतना नेशनल मीडिया भी नहीं करता है।’

रीजनल मीडिया की बेहतरी का उदाहरण देते हुए अजय शुक्ल ने कहा, ‘पंजाब में पहले विधानसभा की लाइव कवरेज नहीं हुआ करती थी, करीब छह महीने पहले आईटीवी नेटवर्क जॉइन करने के बाद हमने इसे लाइव करने की व्यवस्था कराई। इस बार फिर लाइव हो रहा है। यह मौका हमें अकेले कवर करने का भी मिल सकता था, लेकिन हमने कहा कि यह कवरेज हम अकेले नहीं करेंगे। दूसरे चैनल्स को भी इसका अधिकार होना चाहिए। एक मीडियाकर्मी होने के नाते हमारी ड्यूटी है कि हम सबके बारे में सोचें। यदि हम ऐसा करेंगे तो हमें लगता है कि हम मार्केट में टिकेंगे भी और हमारे प्रतिद्वंद्वी जब ज्यादा बेहतर ढंग से सामने आएंगे तो चीजें और ज्यादा बेहतर होंगी।‘  

आप ये पूरी चर्चा नीचे विडियो पर क्लिक कर भी देख सकते हैं-



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