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रीजनल मीडिया BARC से पीड़ित है, रीजनल रेटिंग्स के सिस्टम में करें सुधार: रबिंद्र नारायण, MD, PTC

Published At: Friday, 05 October, 2018 Last Modified: Friday, 05 October, 2018

इन दिनों मीडिया का काफी तेजी से विस्‍तार हो रहा है। ऐसे में अब मेनस्‍ट्रीम मीडिया और रीजनल मीडिया के बीच कोई ज्यादा  अंतर नहीं दिखाई दे रहा है। रीजनल कंटेंट भी अब मेनस्‍ट्रीम मीडिया का अहम हिस्‍सा बन रहा है। यदि हम पंजाबी की ही बात करें तो बॉलिवुड पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। यहां तक कि पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े नेटवर्क्‍स ने रीजनल में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। कहने का मतलब है कि इस दौर ने रीजनल नेटवर्क और रीजनल कंटेंट को देखने के तरीके को नए सिरे से परिभाषित किया है।

'पीटीसी नेटवर्क' (PTC Network) की बात करें तो यह करीब दो दशक से पजांबी कंटेंट दर्शकों को उपलब्‍ध करा रहा है। अब स्‍थानीय सीमाओं से निकलकर इसकी व्‍युअरशिप कनाडा, यूएस, आस्‍ट्रेलिया, यूके, यूएई आदि देशों तक पहुंच चुकी है। इतनी पहुंच के बावजूद रेटिंग एजेंसियों की ओर से इसे उतनी तवज्‍जो नहीं मिली है। 'पीटीसी नेटवर्क' के एमडी और प्रेजिडेंट रबिंद्र नारायण ने नेटवर्क के आगे बढ़ने से लेकर विभिन्‍न मुद्दों पर बातचीत की। इसमें उन्‍होंने रेटिंग एजेंसियों से पंजाबी चैनलों के प्रति अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि रीजनल मीडिया एक तरह से रेटिंग एजेंसी बार्क से पीड़ित ही है।

प्रस्‍तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश :

रीजनल बनाम मेनस्‍ट्रीम मीडिया को लेकर तमाम बातें हुई हैं।अब हम देख रहे हैं कि मेनस्‍ट्रीम चैनल भी प्रादेशिक की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, इस बदलाव के बारे में क्‍या कहेंगे और इसने चर्चाओं को किस तरह प्रभावित किया है ?

मुझे लगता है कि यह काफी पुरानी बात है। जब चैनल छोटी-छोटी जगह प्रसारित किए जाते थे और वे किसी खास क्षेत्र में ही देखे जाते थे, तब इस तरह की बातें होती थीं। 1998 में जब हमने शुरुआत की थी तो हमारा सपना था कि दुनिया के किसी भी कोने में बैठा हुआ व्‍यक्ति स्‍वर्णमंदिर की गुरबाणी को देख सके। हमने इसी मिशन को लेकर शुरुआत की थी। सौभाग्‍य से, अब ऐसा हो चुका है। ऐसे में अब हम रीजनल कहां रह गए? अब कोई सीमा बची ही कहा हैं?

समय के साथ-साथ पंजाबी म्‍यूजिक और पंजाबी मनोरंजन चैनलों ने साबित कर दिया है कि अब किसी भी तरह की कोई सीमारेखा नहीं बची है। स्‍पेन में हमने पंजाबी दर्शकों के लिए तमाम शो देखे हैं। हमने लंदन, यूएई, आस्‍ट्रेलिया और न्‍यूजीलैंड में तमाम शो किए हैं। ऐसे में अब पूरी दुनिया हमारी पहुंच में है और क्षेत्र की कोई बाध्‍यता नहीं बची है।

पंजाबी एंटरटेनमेंट को आगे बढ़ाने में पीटीसी नेटवर्क का क्‍या योगदान है और आप इसे किस तरह परिभाषित करेंगे

इसकी शुरुआत वर्ष 1998 में हुई थी, जब मैंने 'पंजाबी वर्ल्‍ड' (Punjabi World) नाम से चैनल शुरू किया था। यह दुनिया का पहला पंजाबी चैनल था। यही वह समय भी था जब पंजाब विभिन्‍न आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों से उभर रहा था। उस समय कोई एंटरटेनमेंट इंडस्‍ट्री नहीं थी। कोई पंजाबी फिल्‍म नहीं बनाई गई थी और कोई गाना भी जारी नहीं किया गया था। आप सिर्फ दूरदर्शन पर गुरुदास मान के गाने सुन सकते थे अथवा लंदन में 'मलकीत' सिंह को सुन सकते थे। नए पंजाबी गायक तभी आगे आए जब उन्‍हें एक पंजाबी चैनल मिला और जिस प्‍लेटफॉर्म का वे इस्‍तेमाल कर सकते थे।

इसके बाद से हमने पंजाबी कलाकारों को बढ़ावा देना शुरू कर दिया। पंजाब में जब 'PTC' आया तब हमें 'पीटीसी चक दे' (PTC Chak De) के नाम से पूरी तरह एक म्‍यूजिक चैनल बनने का मौका मिला और इसने हमें ग्‍लोबल लेवल पर एक प्‍लेटफार्म बनाने में मदद मिली। 'पीटीसी पंजाबी' ही इकलौता भारतीय चैनल है जिसे कनाडा की संसद में बजाने की अनुमति मिली है।   

पंजाबी चैनलों के व्‍युअरशिप ट्रेंड्स के बारे में कुछ बताएं ?

मेरा मानना है कि रेटिंग एजेंसियों द्वारा पंजाबी चैनलों के साथ ठीक नहीं किया जा रहा है। ‍सभी रेटिंग एजेंसियां अभी भी 'PHCHP' (पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, हि‍माचल प्रदेश) की रेटिंग कर रही हैं और अब इसमें जम्‍मू-कश्‍मीर को भी शामिल कर लिया गया है। अब आप मुझे बताओ कि क्‍या गुजरात की व्‍युअरशिप के आधार पर मराठी चैनल की रेटिंग की जा सकती है। क्‍या कर्नाटक की व्‍युअरशिप के आधार पर तमिल चैनल की रेटिंग की जाएगी। आखिर पंजाबी चैनलों के मामले में ये क्‍यों हो रहा है। पंजाबी व्‍युअरशिप को हरियाणा, हिमाचल, जम्‍मू-कश्‍मीर के सम्मिलित आधार पर क्‍यूं मापा जाता है, जहां पर यह भाषा अभी उतनी प्रचलित नहीं है। 'बार्क' (BARC) के अनुसार, 100 में से सिर्फ नौ या दस व्‍यक्ति ही पंजाबी चैनलों को देखते हैं। क्‍या वाकई में आपको लगता है कि ये सब सच है? 'Zee', 'स्‍टार' और 'सोनी' यहां नंबर वन चैनल बने हुए हैं, क्‍योंकि आपको यहां हिन्‍दी व्‍युअरशिप में पंजाबी व्‍युअरशिप जुड़कर मिल रही है। ये चैनल तमिलनाड़ु, कर्नाटक अथवा महाराष्‍ट्र में नंबर वन नहीं हो सकते हैं लेकिन पंजाब में हो जाएंगे। आखिर क्‍यों, ऐसे में ऑरिजिनल प्रोग्रामिंग पर 60 करोड रुपये खर्च करने के बावजूद हम उनसे प्रतिस्‍पर्धा नहं कर सकते हैं।     

दुनिया में लगभग 80 प्रतिशत ऑरिजिनल कंटेंट पीटीसी तैयार करता है फिर चाहे वह मूवी हा अथवा गाने। ऐसे में रेटिंग एजेंसी के इस तरह के रवैये के कारण मैं अपने विज्ञापनों की दरें नहीं बढ़ा सकता हूं। मुझे पंजाब में हिन्‍दी चैनलों से प्रतिस्‍पर्धा करनी होगी। सिर्फ हम ही अकेले ऐसे चैनल हैं जो 24 घंटे के समय में से सिर्फ आठ घंटे के लिए विज्ञापन स्‍वीकार कर रहे हैं। इससे भी खास हमारी पॉलिसी है, जिसमें हमने खुद को शुरुआत से ही फ्री टू एयर रखा है। 

आजकल डिजिटल का जमाना है। ऐसे में डिजिटल प्‍लेटफॉर्म काफी लोकप्रियता बटोर रहे हैं। आप इसका किस तरह से लाभ ले रहे हैं ?

प्रत्‍येक पांच अथवा दस साल में नई टेक्‍नोलॉजी दिखाई देती है और कंटेंट के लिए नए प्‍लेटफॉर्म आ जाते हैं। कहने का मतलब है कि मीडिया कोई भी हो, सभी के लिए कंज्‍यूमर है। हमारा मानना है कि यदि आप सफलता की सीढ़ी चढ़ना चाहते हैं तो आपको आगे बढ़ना होगा और इसके बारे में सोचना होगा कि आगे क्‍या नई चीज होने वाली है जो आपको टॉप पर ले जा सकती है। हम पहले ऐसे भारतीय चैनल थे जो वर्चुअल रियलिटी पर आधारित थे। हमारा हाल ही में लॉन्‍च हुआ चैनल 'पीटीसी ढोल टीवी' (PTC Dhol TV) दुनिया का पहला ऐसा 24x7 टीवी चैनल है, जिसे विशेषरूप से फेसबुक पर शुरू किया गया है और इसे बहुत ही अच्‍छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इसलिए हम डिजिटल की सभी संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए तैयार हैं। यही नहीं, हम पहले से ही इसका फायदा उठा रहे हैं।

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