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ऐसे पार्टनर की तलाश में है ZEE समूह, बोले पुनीत गोयनका

Published At: Tuesday, 04 December, 2018 Last Modified: Wednesday, 05 December, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

मीडिया मुगल डॉ. सुभाष चंद्रा के स्वामित्व वाले एस्सेल ग्रुप (Essel Group) से पिछले पखवाड़े एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई थी। दरअसल, एस्सेल ग्रुप (Essel Group) ने घोषणा की थी कि वह 'जी ऐंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) में अपनी आधी हिस्सेदारी किसी स्ट्रेटजिक पार्टनर को बेचने की तैयारी कर रहा है। कंपनी की ओर से कहा गया था कि बिजनेस का अधिकतम मूल्य प्राप्त करने के लिए स्ट्रेटजिक रिव्यू किया जाना है, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।

यह डील किस तरह होगी, स्ट्रेटजिक पार्टनर कौन होगा और पार्टनर सामने आने के बाद क्या-क्या बदलाव होंगे, जैसे सवालों को लेकर ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ग्रुप के को-फाउंडर नवल आहूजा ने ‘ZEEL’ के एमडी और सीईओ पुनीत गोयनका से विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंशः

प्रमोटरों की हिस्सेदारी बेचने और पार्टनर को तलाशने की जरूरत आपको क्यों पड़ी, जबकि मीडिया के कुछ खास स्वरूपों की बात करें तो आपकी स्थिति काफी मजबूत है?

हम सिर्फ साउथ एशिया के मीडिया मार्केट में ही सफल नहीं होना चाहते, बल्कि इससे भी आगे बढ़ना चाहते हैं, ताकि इसे वैश्विक स्तर पर ले जा सकें। हमारा मानना है कि यदि हमें ऐसे पार्टनर मिल जाएं, जो टेक्नोलॉजी में काफी मजबूत हों और जिनकी पहुंच का दायरा काफी ज्यादा हो, तो हम पूरी दुनिया के लिए कंटेंट तैयार कर सकते हैं। हमने साउथ एशिया में अपनी पकड़ बना ली है और मिडिल ईस्ट, साउथ अफ्रीका जैसे मार्केट में भी हाथ आजमा रहे हैं। हम चाहते हैं कि लोग ‘ZEE’ को ‘डिज्नी’, ‘फॉक्स’ औऱ‘एनबीसी’ की तरह मेनस्ट्रीम मीडिया कंपनी की तरह देखें। टेक्नोलॉजी तो खरीदी जा सकती है लेकिन इसे लोगों की जरूरतों के हिसाब से सेट करने के लिए काफी मेहनत करने की जरूरत होती है। इसे यदि एक उदाहरण से समझें तो ओवर द टॉप (OTT) के क्षेत्र में ‘ZEE5’ के रूप में यह हमारा तीसरा प्रयास है। हमारे दो प्लेटफॉर्म्स उतना अच्छा नहीं कर पाए, जितना उन्हें करना चाहिए था।  

यदि आप एप्पल’, ‘नेटफ्लिक्सऔर अमेजॉन जैसी कंपनियों को देखें तो इन्होंने पारंपरिक ब्रॉडकास्ट मॉडल को प्रभावित करने का काफी प्रयास किया है, जबकि करीब 25 सालों से ‘ZEE’ इस पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए है और यह इसका गढ़ रहा है। ऐसे में आपको क्या लगता है कि वे ‘ZEE’ जैसी कंपनी का पार्टनर बनना चाहेंगी?

हमारी कंपनी ने कंटेंट के मामले में किसी की नकल नहीं की है। आज यदि आप देश की किसी भी मीडिया टेक कंपनी को देखें तो आपको पता चलेगा कि वे किसी खास सेगमेंट में ही काम करती हैं। वे देश के एक-दो प्रतिशत हिस्से को ही श्रेष्ठ मानती हैं और उनका कंटेंट आम लोगों के बीच ज्यादा नहीं होता है। कह सकते हैं कि उनका 90 प्रतिशत कंटेंट इंटरनेशनल और सिर्फ 10 प्रतिशत यहां का यानी घरेलू होता है। जबकि अपने देश में लोग अपनी स्थानीय भाषा में ही कंटेंट पसंद करते हैं।  

हमारे ‘ZEE5’ प्लेटफॉर्म को लॉन्च हुए छह-सात महीने ही हुए हैं और इतने कम समय के अंदर ही इसका 55 प्रतिशत से ज्याद कंटेट हिंदी ही नहीं, अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी है। ‘ZEE5’ की खासियत यही है कि यह ज्यादा से ज्यादा लोकल कंटेंट तैयार करने जा रहा है। इसके अलावा, लॉन्चिंग के छह महीने के अंदर ही यह नंबर दो का ओवर द टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म बन गया है।इसका कारण एक तो इसकी कंटेंट वैल्यू है, दूसरा हमने फिल्म लाइब्रेरी आदि में भी काफी निवेश किया है। हम इसी तरह का लाभ चाहते हैं।

क्या आप कोई नया बिजनेस वर्टिकल लॉन्च करने जा रहे हैं? ऐसी भी कुछ चर्चाएं थीं कि आप बैंकिंग, फाइनेंसियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर में जाना चाह रहे हैं या वहां पर अपना कोई प्रॉडक्ट लॉन्च करने की सोच रहे हैं?

हम पहले से ही अपने ‘SL Finance’ पोर्टफोलियो में BFSI सेक्टर में हैं, जो हमारे लिए पूंजी का इस्तेमाल करने के लिए एक जगह होगी। दरअसल, हम नए जमाने के टेक्नोलॉजी क्षेत्रों को देख रहे हैं, जहां पर हम अपने बिजनेस का विस्तार कर सकते हैं। लेकिन इसके बारे में डॉ. सुभाष चंद्रा ही बेहतर तरीके से बता सकते हैं। मैं तो सही पार्टनर की तलाश करने और अगले पांच वर्षों में ‘ZEE’ को एक नई ऊंचाई पर ले जाने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा हूं।   

आपको किस तरह के पार्टनर की तलाश है, इसके बारे में कुछ बताएं ?

पहली और सबसे खास बात वैल्यू सिस्टम है। हमारे पार्टनर के पास हमारी तरह ही वैल्यू सिस्टम होगा और दोनों के लिए उसका मतलब जितना समान होगा, पार्टनरशिप के लिए यह उतना ही महत्वपूर्ण होगा। यह ऐसी पार्टनरशिप होगी, जिसमें दोनों के पास समान अधिकार होंगे, क्योंकि हम इस बिजनेस को मिलकर चलाएंगे।

अभी की बात करें तो बिजनेस का संचालन परिवार के लोग करते हैं, ऐसे में इस पार्टनरशिप के बाद क्या होगा?

बिजनेस को यहां तक लाने में परिवार और मैनेजमेंट ने जो मदद की है, मैं उसकी बहुत कद्र करता हूं। साउथ एशिया के लिए अगले तीन से पांच सालों के लिए योजना पहले से ही चल रही है। मुझे इसमें बदलाव को कोई जरूरत नहीं दिखाई देती है। इसमें निवेश बढ़ाकर और मजबूती दी जा सकती है। इसके अलावा मुझे ऐसा भी कोई कारण नहीं दिखाई देता है कि जिस हिसाब से परिवार इस समय बिजनेस को चला रहा है, उसमें स्ट्रेटजिक पार्टनर की ओर से कोई बदलाव होना चाहिए। लेकिन यदि वे ऐसा करना चाहेंगे तो हमारे पास ऐसे बेहतरीन प्रोफेशनल्स की टीम है जो इन सभी वर्टिक्लस को आसानी से चला सकती है।  

इस स्ट्रेटजिक इनवेस्टमेंट के जरिये आप वैश्विक स्तर पर अपना विस्तार करना चाह रहे हैं, इसके लिए आपने किस तरह की प्लानिंग की है?

अभी हम जिस तरह से काम कर रहे हैं, उसमें पुनीत मिश्रा घरेलू ब्रॉडकास्ट बिजनेस और तरुण कात्याल ‘ZEE5’ का घरेलू बिजनेस चला रहे हैं। ग्लोबल ऑडियंस के स्तर पर हम ब्रॉडकास्ट और डिजिटल के लिए एक अलग स्ट्रक्चर भी तैयार करेंगे। ब्रॉडकास्ट की बात करें तो इंटरनेशनल मार्केट में साउथ एशिया के लिए हमारा यह स्ट्रक्चर बना रहेगा, क्योंकि यह काफी अलग तरह का ऑपरेशन है और इसमें उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में इंटरनेशनल स्तर पर डिजिटल पर भी पूरा ध्यान दिया जाएगा।    

OTT के बारे में आपका क्या मानना है, क्या आपको लगता है कि आने वाला समय ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का है और भविष्य में अधिकांश ब्रॉडकास्ट कंपनियां ओटीटी वाली टेक मीडिया कंपनियां बन जाएंगी?  

यदि वे लंबे समय तक अस्तित्व में बने रहना चाहती हैं, तो उन्हें ऐसा करना होगा। यदि वे सिर्फ ब्रॉडकास्ट कंपनियां बने रहना चाहती हैं तो काफी नीचे चली जाएंगी, क्योंकि तब ब्रॉडकास्टिंग भी काफी कम हो जाएगी। लेकिन यदि मैं ओटीटी की बात करूं तो यह टॉप पर होगी।

18 महीने पहले जब आपने टेन स्पोर्ट्स (Ten Sports) की बिक्री की थी तो आपने स्पोर्ट्स से दूर रहने रहने का फैसला किया था। लेकिन जब ओटीटी की बात करें तो क्या आपको लगता है कि स्पोर्ट्स कंटेंट की कमी का असर पड़ता है?

नहीं, मैं ऐसा नहीं मानता हूं। यूनाइटेड स्टेट्स में ‘नेटफ्लिक्स’ और ‘अमेजॉन’ के पास स्पोर्ट्स नहीं है और इसके बावजूद वे दुनिया में सबसे सफल ओटीटी प्लेटफॉर्म्स हैं। टीवी और ओटीटी दोनों में एक ही तरह की बात लागू होती है। स्पोर्ट्स की बात करें तो इससे ट्रैफिक तो आता है और खेलों के दौरान व्युअपशिप भी बढ़ती है, लेकिन यह टिकाऊ नहीं है। आयोजन के खत्म होने पर यह संख्या कम हो जाती है। ऐसे में सिर्फ स्पोर्ट्स से ज्यादा लाभ नहीं होता है।

ओटीटी कंटेंट रेगुलेशन के मामले में सरकार द्वारा उठाए गए कदम के बारे में आपका क्या कहना है?

ओटीटी सर्विसेज टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को सीधी चुनौती दे रही हैं। इसलिए वॉइस और मैसेजिंग ओटीटी को रेगुलेट किया जा रहा है। यह ओटीटी के विडियो पार्ट को कवर नहीं कर रहा है।

क्या आपको लगता है कि आने वाले समय में सरकार इसमें भी हस्तक्षेप करेगी?

मैं नहीं समझ पा रहा हूं कि आजकल के माहौल में आप इस तरह की कवायद कैसे कर सकते हैं, जब इंटरनेट की पहुंच लोगों तक काफी आसान हो गई है। मेरे कहने का मतलब है कि क्या वे गूगल और पॉर्न साइट्स को कंट्रोल कर सकते हैं। यहां तक कि उन्होंने 300 साइट्स बंद भी कर दीं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि इंटरनेट पर अब पॉर्न नहीं है। हां, इस तरह की रोक 20 साल पहले शुरू कर दी गई होती, तो वे अपने उद्देश्य में जरूर सफल होते। लेकिन यदि आज इस तरह की चीजें शुरू करते हैं तो इस उद्देश्य को पूरा करने में और 20 साल लग जाएंगे। हम दूसरा चीन तैयार नहीं करना चाहते, जो अपनी दुनिया में सिमटा हुआ है। लोगों के हित में इस तरह की कवायद ठीक नहीं है।

अब आखिरी सवाल, इस डील के तीन साल बाद आप अपने आपको कहां और किस रूप में देखते हैं?

मैं लोगों को यह बताते-बताते थक चुका हूं कि ये बड़े बजट वाली कंपनियां हमारे देश में हमें चुनौती देने आई हैं। मैं इन कंपनियों से अपने सामर्थ्य के अनुसार प्रतिस्पर्धा करूंगा। मैं ये नहीं कह रहा हूं कि मैं नेटफ्लिक्स बनना चाहता हूं, लेकिन मैं उनसे प्रतिस्पर्धा करना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि मार्केट ये कह सके कि हम देश की पहली मीडिया कंपनी है जो बड़ी विदेशी कंपनियों से टक्कर लेने बाजार में उतरी है। हम ऐसा जरूर करेंगे।

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