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जानें, किस तरह का टीवी चैनल खुलने का इंतजार कर रहे हैं अक्षय कुमार

Published At: Monday, 01 October, 2018 Last Modified: Wednesday, 03 October, 2018

 समाचार4मीडिया ब्‍यूरो ।।

बॉलिवुड 'खिलाड़ी' अक्षय कुमार ने पिछले दिनों पूर्व नौकरशाह और जाने-माने लेखक विजय सिंघल की किताब 'भगवद् गीता-सेइंग इट दि सिंपल वे' को लॉन्च किया। दिल्‍ली के ली मेरिडियन होटल में आयोजित एक समारोह में भगवद् गीता पर आधारित इस किताब की लॉन्चिंग के दौरान अक्षय कुमार ने कई बातें शेयर भी कीं। उनका कहना था कि वह भी अपनी जिंदगी में रोजाना गीता की कुछ शिक्षाओं का इस्तेमाल करते हैं। गीता की बदौलत ही उनका जीवन कुछ कम जटिल और थोड़ा और शांत हो गया है। 

उन्होेंने कहा कि सिंघल की किताब की खासियत यह है कि इसमें भगवद् गीता के श्लोकों का हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एक साथ किया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है कि पाठकों के लिए श्लोकों के मर्म को समझ पाना आसान हो जाए। हर पृष्ठ पर केवल दो श्लोक और हिंदी तथा अंग्रेजी में अर्थ होने से पृष्ठ पर मैटर की अधिकता नहीं है, ताकि पाठकों की रुचि बनी रहे। श्लोकों को इतनी सरल और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करने के साथ ही भावार्थ की प्रस्तुति ऐसी है कि ध्यान मुख्य कथन से न भटके। विजय इससे पहले -ए डिविनिटि इन फ्लो-गंगा, एब्सोल्यूट वननेस दि जर्नी टु दि सेल्फ जैसी बेस्ट-सेलर किताब लिख चुके हैं।

अनावरण से पहले अक्षय कुमार और सिंघल के साथ पुस्तक पर संक्षिप्त चर्चा का आयोजन किया गया। भगवद् गीता के दर्शन से संबंधित चर्चा का संचालन ‘बिजनेस वर्ल्ड’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने किया।

चर्चा के दौरान विजय सिंघल ने बताया कि भगवद गीता के कुछ श्‍लोक और चित्र रोजाना ट्वीट करते थे। फिर दोस्‍तों ने कहा कि आपने हिन्‍दी और अंग्रेजी में इतनी साधारण भाषा में यह किया है तो क्‍यों नहीं आप इन्‍हें एक किताब की शक्‍ल दे देते हैं। इस वजह से उन्‍होंने इसे मूर्त रूप दिया। इस किताब की खासियत यह भी है कि इसमें संस्‍कृत भाषा का इस्‍तेमाल नहीं किया गया है, इसके पीछे विजय का कहना था कि लगभग 90 प्रतिशत लोग संस्‍कृत को अच्‍छी तरह से नहीं समझते हैं, ऐसे में इस भाषा का इस्‍तेमाल करने का कोई औचित्‍य नहीं था और जो इस भाषा को समझते हैं तो उनके लिए हमारी इस किताब की जरूरत नहीं है। इसलिए इस किताब को हिन्‍दी और अंग्रेजी में कंपाइल किया गया है। उन्‍होंने कहा, 'मैंने नोटिस किया है कि लोग इसे इतनी कठिन भाषा में अनुवाद करते हैं कि सामने वाला सोचता है कि चलो कल पढ़ लेंगे और वो कल कभी आता नहीं है। इसलिए मैंने इस किताब में काफी आसान शब्‍दों का इस्‍तेमाल किया है और एक पेज पर हिन्‍दी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में इसलिए अनुवाद किया है ताकि समझने में किसी तरह की दिक्‍कत महसूस न हो।' 


इस मौके पर अनुराग बत्रा ने विजय सिंघल और अक्षय कुमार के साथ गुफ्तगू भी की। ऐसे ही कुछ सवाल-जवाबों से आप यहां रूबरू हो सकते हैं-

डॉ. बत्रा : 16 साल में यह आपकी 10वीं किताब है, मैं जानना चाहता हूं कि आप ये किताबें क्‍यों लिखते हैं ?

विजय : यदि इन किताबों को पढ़कर लोगों को कुछ सीखने को मिलता है, तो यह अच्‍छी बात है। लेकिन सच कहूं तो मैं इन किताबों को अपने आपको अभिव्‍यक्‍त करने के लिए लिखता हूं।

डॉ. बत्रा : अक्षय जी, आप बॉलिवुड के काफी बड़े स्‍टार हैं। मुझे याद है कि आपने कहा था कि आप रोजाना सूर्य को उगता हुए देखते हैं और आपकी सुबह सूर्य नमस्‍कार से होती है। आज के वॉट्सएप और 'सीक्रेट गेम्‍स' के जमाने में आप इस किताब को कितना प्रासंगिक मानते हैं ?

अक्षय कुमार : हालांकि मैं किताबें पढ़ने का शौकीन नहीं हूं लेकिन कई बार अच्‍छी सूक्तियां, अच्‍छे वाक्‍य और अच्‍छी-अच्‍छी बातें हम पढ़ लेते हैं। रही सूर्य नमस्‍कार की बात तो ऐसा कोई दिन नहीं हुआ, जब मैंने सूर्य को उगते हुए नहीं देखा हो। रात को शूटिंग चाहे जितनी देर से खत्‍म हो, सुबह मैं जल्‍दी उठता हूं और हमेशा मैंने सूरज को उगते हुए देखा है। 

मेरा मानना है कि हमारे देश ही नहीं बल्कि पूरे जगत के लिए य‍ह किताब बहुत जरूरी है, क्‍योंकि मेरा विश्‍वास किसी समस्‍या के समाधान पर रहता है और मैं बहुत सकारात्‍मक हूं। और ये वही किताब है जो समस्‍याओं से निपटने का तरीका बताती है। 

मैं उस दिन का इंतजार कर रहा हूं कि किसी दिन एक ऐसा टीवी चैनल आए जो सिर्फ अच्‍छी बातें और पॉजीटिव न्‍यूज ही बताए। जिस चैनल का नाम ही 'पॉजीटिव न्‍यूज' हो। क्‍योंकि आज जिस तरह की न्‍यूज परोसी जा रही है, उसे देख-देखकर हम थक चुके हैं। चैनलों पर कभी कोई अच्‍छी खबर दिखती ही नहीं है। ये किताब अच्‍छी खबर ही है, जिसके अंदर कमाल की चीजें लिखी हुई हैं।

डॉ. बत्रा: आपने जिंदगी में कई लक्ष्य हासिल किए हैं। आप जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तत्‍पर रहते हैं। पिछले दिनों युद्ध पीडि़त विधवाओं के लिए आपने करोड़ों रुपये दिए थे। ये जज्‍बा आपके अंदर किस तरह आया और हम लोग इससे कैसे जुड़ सकते हैं ?

अक्षय कुमार : हम सब इन सभी बातों से जुड़े हुए हैं। बस तकलीफ इतनी करनी है कि जो सैनिक हमारी सेवा करते-करते अपनी जान गंवा चुके हैं, उनके परिवारों के लिए मदद का हाथ आगे बढ़ाना है। सरकार ने इसके लिए बहुत ही अच्‍छा ऐप बनाया है। इसमें खास बात यह है कि यदि हममें से किसी को शहीद के परिवार की आर्थिक मदद करनी है तो देने वाले के बैक से रकम सीधे उन परिवार के खाते में जाएगी। यानी इसमें किस तरह के बिचौलिये शामिल नहीं हो सकते हैं। यही नहीं, जिस व्‍यक्ति को पैसे मिलते हैं, उसे भी पता चल जाता है कि ये किसने भेजे हैं।  

डॉ. बत्रा: भगवद गीता किसी विशेष धर्म अथवा संप्रदाय से नहीं जुड़ी है। यह सार्वभौमिक है, तो क्‍या आप मानते हैं कि देश के सभी स्‍कूलों में भगवद गीता को अनिवार्य कर देना चाहिए और इसे नेशनल बुक की तरह दर्जा दे देना चाहिए ?

अक्षय कुमार: मैं चाहता हूं कि विजय ऐसी किताब लिखें, जिसमें सभी धर्मग्रन्थों जैसे गीता, कुरान, गुरु ग्रंथ साहिब और बाइबिल की सर्वश्रेष्‍ठ बातों का संग्रह हो। फिर उस किताब को सभी स्‍कूलों में अनिवार्य कर देना चाहिए।'

डॉ. बत्रा: भगवद गीता में लिखा है कि कर्म करो और फल की चिंता मत करो लेकिन वर्तमान में जब हम सब लोग महत्‍वाकांक्षी हैं और सभी लोग अच्‍छे परिणाम की उम्‍मीद करते हैं। ऐसे में क्‍या आपको लगता है कि गीता के इन उपदेशों पर अमल करना इतना आसान है ?

अक्षय कुमार: हम जो काम करते हैं, उसका फल जरूर मिलता है। कई बार ऐसा भी होता है कि आपने कोई काम किया और भगवान उसका फल आपको दूसरे रूप में दे देता है। जैसे कि मैं आपको बताऊं कि कई बार मैं किसी फिल्‍म में बहुत मेहनत करता हूं लेकिन वह ज्‍यादा नहीं चलती लेकिन जिसमें मैंने बहुत ज्‍यादा मेहनत नहीं की, वह अच्‍छा प्रदर्शन करती है। कहने का मतलब है कि आपको अपनी मेहनत का फल किसी न किसी रूप में कभी न कभी मिल ही जाता है। इसलिए फल की चिंता किए बिना अपना कर्म करते रहना चाहिए।

डॉ. बत्रा: इस किताब को हम गीता सार कह सकते हैं। इसमें शामिल दो-तीन चीजों के बारे में बताएं, जिन्‍हें हम अपने जीवन में शामिल कर सकें?

विजय: इस किताब में हमने पुराने समय में प्रचलित हिंदुत्‍व के प्रमुख विचारों को शामिल किया है। इसमें सभी का सार आ गया है। इसमें हमने कर्मयोग, भक्तियोग, बुद्धियोग और ज्ञानयोग आदि के शामिल किया है।  

डॉ. बत्रा: अक्षय जी, आप भगवद गीता मे दिए गए सार का अच्‍छा उदाहरण हैं। आप अच्‍छे कर्मयोगी भी हैं और दूसरे लोगों के लिए उदाहरण हैं। आज अध्‍यात्‍म (spirituality) की इतनी चर्चा होती है और दूसरी तरफ धर्म (religion) को लेकर बात होती है।अक्षय कुमार की बात करें तो आपकी नजर में इन दोनों में क्‍या अंतर है ?

अक्षय कुमार : सच कहूं तो अध्‍यात्‍म (spirituality) और धर्म (religion) मेरी समझ से बाहर की बात है। जैसा कि मैंने पहले भी बताया कि मैंने आज तक गीता नहीं पढ़ी है। मेरी पत्‍नी भी किताब लिखती हैं, मैंने उनकी भी किताब भी नहीं पढ़ी है। मुझे जो कुछ सिखाया है, वह पिताजी ने सिखाया है और ज्ञान की तमाम बातें बताई हैं। कुछ लोग कहते हैं कि सुबह-सुबह उठकर मेडिटेशन करना चाहिए। मैं मोमबत्‍ती के सामने बैठकर मेडिटेश्‍न में यकीन नहीं रखता हूं। इसलिए मैंने आज तक मेडिटेशन नहीं किया है। उसकी जगह मैंने अपने पिताजी से सीखा है कि आप पूरे दिन में किसी भी रूप में किसी जरूरतमंद व्‍यक्ति अथवा जानवर की मदद कर दें। ऐसे में जो आपको दुआएं मिलती है तो मेरे लिए यही मेडिटेशन है। मेरे साथ भी यही होता है। रात को जब मैं सोने जाता हूं तो कितना ही मानसिक तनाव क्‍यों न हो, तो उस समय मुझे उस व्‍यक्ति द्वारा दिए गए धन्‍यवाद के शब्‍द याद आ जाते हैं, जिसकी मैंने मदद की होती है और मुझे आराम से नींद आ जाती है। मेरे लिए यही सबसे बड़ा मेडिटेशन है और यह बात मुझे मेरे पिताजी ने सिखाई थी। एक बात और कहना चाहता हूं कि स्‍वास्‍थ्‍य के मामले में हमारे देश का रिपोर्ट कार्ड बहुत खराब है। ऐसे में मैं कहना चाहता हूं कि यदि स्‍वस्‍थ रहना है तो सूर्य छिपने से पूर्व भोजन कर लेना चाहिए। उसके बाद आपको कुछ खाने की जरूरत नहीं है। मेरा कहना है कि इसको लेकर आपका शरीर भी आपको हमेशा धन्‍यवाद कहता रहेगा।    

डॉ. बत्रा: आजकल सेल्‍फी का जमाना है लेकिन मैंने देखा है कि आजकल का अधिकांश युवा वर्ग अपने माता-पिता के साथ सेल्‍फी नहीं लेता। वह अपने चाचा-ताऊ आदि के साथ भी फोटो नहीं लेता है। लेकिन आपकी बात करें तो आप अपने पिताजी की काफी बात करते हैं। यहां भी हमने देखा कि आप अपने पिताजी को कितना श्रेय दे रहे हैं। चूंकि आप युवाओं के प्रेरणास्रोत भी हैं और बड़ी संख्‍या में युवा आपको फॉलो करते हैं। ऐसे में आप बच्‍चों को क्‍या संदेश देना चाहते हैं?

अक्षय कुमार : ऐसा नहीं है कि सिर्फ अपनी मेहनत के बल पर मैं सफल हूं। मेहनती तो दुनिया में बहुत लोग होते हैं। मैं जब स्‍टूडियो के अंदर जाता हूं तो बाहर कितने स्‍ट्रगलर खड़े होते हैं। मैं आज जो कुछ भी हूं, उसमें मेरे माता-पिता का बहुत बड़ा योगदान है। ऐेसे में बच्‍चों को मैं यही संदेश देना चाहता हूं कि आप जब भी सुबह काम पर निकलें तो अपने माता-पिता के पैर जरूर छुएं। यह वैज्ञानिक तथ्य है,  उससे आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है।


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