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वरिष्‍ठ पत्रकार अरनब गोस्‍वामी ने बताया अपनी बेचैनी का राज...

Published At: Tuesday, 08 May, 2018 Last Modified: Monday, 07 May, 2018

अंग्रेजी न्यूज चैनल 'रिपब्लिक टीवी' (Republic TV) के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी लंबे समय से चर्चाओं में हैं। चाहे उनके नए वेंचर 'रिपब्लिकका मामला हो अथवा चैनलों की रेटिंग कावह हमेशा सुर्खियों में छाये रहते हैं। यदि आपको कभी अरनब गोस्‍वामी से उनकी डेस्‍क पर मिलने का मौका मिले तो वहां आपको अरनब का एक नया व्‍यक्तित्‍व देखने का मौका मिलेगा। यहां आपको स्‍वतंत्रता सेनानी भगत सिंह की फ्रेम की हुई तस्‍वीर मिलेगीजो उन्‍हें बेटे ने दी थी। इसके अलावा आपको पूर्व में उनके द्वारा किए गए राहुल गांधी और सोनिया गांधी के साक्षात्‍कार का कैरिकेचर और हस्‍तलिखित फ्रेम की हुई वह कॉपी मिलेगीजिसमें चैनल को रेटिंग की दिशा में टॉप पर बताया गया है।

पिछले दिनों सिमरन सभरवाल से बातचीत में अरनब गोस्‍वामी ने अपने बारे में व 'रिपब्लिक टीवीके बारे में विस्‍तार से बातचीत की। इसके अलावा उन्‍होंने यह भी बताया कि कैसे उन्‍होंने चुनौतियों को अवसर में बदला और आज भारतीय न्‍यूज की क्‍या दशा है। अरनब का यह भी कहना था कि 'रिपब्लिककी लॉन्चिंग के बाद से वह और मैच्‍योर हुए हैं और 'रिपब्लिकने उन्‍हें एक नई पहचान दी है। प्रस्‍तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश : 

रिपब्लिक’ और ‘Republicworld.com’ के एक साल पूरे होने के बाद यदि आपसे प्रोग्रेस रिपोर्ट देने के लिए कहा जाए तो आप अपने आपको कहां पाते हैं और कितने अंक देंगे?

यदि एक साल के प्रदर्शन की बात करें तो मैं अपने आपको दस में से नौ नंबर दूंगा। एक अंक की हमेशा इसलिए गुंजाइश रह जाती है कि आप इससे भी बेहतर कर सकते थे। हमारी लॉन्चिंग इतनी शानदार नहीं हुई थीइसके बाद भी इतने अच्‍छा प्रदर्शन इस बात का सबूत है कि अच्‍छा कंटेंट लोगों को पसंद आता है और यह आपके आगे बढ़ने में काम करता है। हमने हर 24 घंटे में एक्‍सक्‍लूसिव रिपोर्ट बनाईं और लोगों के सामने रखीं। इलेक्‍शन की कवरेज में भी हम नंबर वन थे। उदाहरण के लिए- गुजरात के चुनाव और बजट के दौरान हमारा चैनल सबसे ज्‍यादा देखा गया। चाहे प्राइम टाइम हो अथवा नॉन प्राइम टाइमहम बहुत अच्‍छी स्थिति में हैं। हमारे लिए यह काफी अच्‍छी बात है और हम काफी उत्‍साहित हैं कि हम दूसरे साल में प्रवेश करने जा रहे हैं। इसके अलावा हम कई नई चीजें भी करने जा रहे हैं।

'रिपब्लिक टीवी' (Republic TV) और आप तभी से चर्चा में हैंजब से आपने इस चैनल का नाम सार्वजनिक किया था। इसके बाद निवेशक और आपसी हितों पर टकराव को लेकर खबरें सामने आईं। अन्‍य पत्रकारों द्वारा आलोचना की बात भी सामने निकलकर आई। माना जाता है कि लोग नैतिक आधार पर 'रिपब्लिकसे इस्‍तीफा दे रहे हैं और यहां तक कि लोग आपके पैनल पर आने से इनकार कर रहे हैं। आप एक न्‍यूजमेकर हैं। ऐसे में इस बारे में आपका क्‍या कहना है?

इसका कारण यह है कि हम काफी सफल रहे हैं और जब आप सफल होते हैं तो आपके ऑफिस में रखा हुआ एक गिलास पानी भी न्‍यूज बन जाता है। यह सब हमारा नाम खराब करने के लिए किया जा रहा था। आपको क्‍या लगता है कि कोई भी अनजान वेबसाइट अथवा संस्‍था 'रिपब्लिकअथवा मेरे ऊपर स्‍टोरी कर हिट होने की उम्‍मीद कर सकती है। लेकिन सच कहूं कि इन बातों से हम बिल्‍कुल परेशान नहीं हुए क्‍योंकि हम अपने काम में बहुत व्‍यस्‍त हैं। हमारा पूरा फोकस हमारे बिजनेस परहमारे प्रॉडक्‍ट और चैनल पर है। रही बात शेयरहोल्‍डर्स और इन्‍वेस्‍टर्स की तो सिर्फ हमारा चैनल ही ऐसा हैजिसके शेयर पब्लिक डोमेन में हैं। 'एशियानेट' (Asianet) के शेयर करीब 15.5 प्रतिशत हैं और बाकी का नियंत्रण मेरी होल्डिंग कंपनी 'एआरजी आउटलियर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड' (ARG Outlier Media Private Limited) के हाथों में है। यह बहुत ही ज्‍यादा स्‍वतंत्र न्‍यूज ऑर्गनाइजेशन है। इससे यह स्‍पष्‍ट साबित होता है कि हम न सिर्फ एडिटोरियली बल्कि वित्‍तीय रूप से भी अपने ऑर्गनाइजेशन को खुद कंट्रोल करते हैं।

लोगों में यह धारणा है कि ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) प्रो-इस्‍टैबलिशमेंट (pro-establishment) हैयानी यह सरकार के पक्ष में बात करता है। इसके बारे में आपका क्‍या कहना है?

य‍ह पूरी तरह से बकवास है क्‍योंकि हमसे ज्‍यादा सरकार की आलोचना कोई नहीं करता है। जम्‍मू-कश्‍मीर के कठुआ कांड और उन्‍नाव के दुष्‍कर्म कांड राष्‍ट्रीय स्‍तर के मुद्दे नहीं बनतेयदि हमने इन मामलों को प्रमुखता से नहीं उठाया होता। जम्‍मू-कश्‍मीर और उत्‍तर प्रदेश दोनों जगह पर भाजपा सत्‍ता में है। हमने इन दोनों मामलों में स्‍वतंत्र रूप से कवरेज की थी। इसलिए इस तरह की धारणा बनाने का कोई आधार नहीं है।

फेक न्‍यूज’ (Fake News) पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) द्वारा किए गए सर्कुलर और प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेश के बाद उसे वापस लेने के मामले में आपका क्‍या कहना है?

फेक न्‍यूज बहुत बड़ी परेशानी है और यदि कोई यह कहता है कि फेक न्‍यूज से कोई समस्‍या नहीं है तो यह गलत है। इसके अलावा कुछ ऐसे डिजिटल न्‍यूज ऑर्गनाइजेशंस हैजिन्‍हें राजनीतिक दलों से फंडिग मिलती है और वे अपने आपको फेक न्‍यूज बस्‍टर्स (fake news busters) कहते हैंयह सही नहीं है। यदि आपको किसी भी राजनेता अथवा राजनतिक दल से प्रत्‍यक्ष अथवा अप्रत्‍यक्ष रूप से सपोर्ट मिलता है तो आप अपने आपको स्‍वतंत्र और 'fake news busters' नहीं कह सकते हैं। हालांकिइस मामले में सूचना और प्रसारण मंत्रालय का तरीका सही नहीं था। मैंने अभी नोटिस विस्‍तार से नहीं देखा है लेकिन मुझे यह पसंद नहीं आया। लेकिन जो पेज मैंने देखा वह इस मामले में मंत्रालय की सिफारिशों का सिर्फ एक पेज था। मैंने मंत्रालय की सिफारिशों को विस्‍तार से नहीं पढ़ा है।

आप अपनी वर्किंग लाइफ को कैसे मेंटेन कर पाते हैं?

इसमें बैलेंस जैसी कोई बात नहीं है। हालांकि अब मैं रविवार को छुट्टी ले रहा हूंजो मैंने शुरुआत के छह महीनों में नहीं ली थी। लेकिन जहां तक तीन-चार छुट्टियां एक साथ लेने की बात है तो मैंने नहीं ली हैं। मैंने एक बार में दो से ज्‍यादा छुट्टी नहीं ली हैं। यह एक स्‍टार्ट-अप है। यह काफी बड़ा है और तेजी से आगे बढ़ रहा है ऐसे में लोगों की बहुत उम्‍मीदे हैं। यह सब काम का हिस्‍सा है लेकिन मैं जो कर रहा हूंउसे बहुत एंज्‍वॉय कर रहा हूं और पूरी तरह इसमें डूबा हुआ हूं। ‘रिपब्लिक’ में मैं एक स्‍टूडेंट बन गया हूं। यहां मैंने सीखा है कि न्‍यूज के प्रति लोगों की प्रतिक्रिया को समझना इतना आसान नहीं है। यहां सीखने के लिए बहुत कुछ है कि लोगों को क्‍या पसंद आता है और क्‍या नहीं। पिछले कुछ महीनों से हम आकलन कर रहे हैं कि हमें आगे क्‍या करना है। आमतौर पर मैं हर साल दो नई चीजें करता हूं लेकिन पिछले 12 महीने से मैंने सिर्फ एक ही नई चीज की है। इसलिएमैं काफी बेचैन हो रहा हूं और लगातार काम में जुटा हुआ है। अगले छह महीने में मैं कुछ नई चीजें करूंगा और कुछ नए ब्रैंड्स और प्रॉडक्‍ट तैयार करूंगा।

यदि हम आज के अरनब गोस्‍वामी और कुछ साल पहले के अरनब गोस्‍वामी की तुलना करें तो दोनों में आप कितना अंतर देखते हैं?

मैंने अपने सपनों का एक चरण पूरा कर लिया हैसिर्फ यही अंतर है। एक एंत्रप्रेन्योर के रूप में मैं अपने ऊपर बहुत जिम्‍मेदारी महसूस करता हूं। मुझे लगता है कि अब मैं पहले से बहुत बेहतर स्थिति में हूं और मेरा मानना है कि आगे भी मेरे ऑर्गनाइजेशन की सफलता मेरे और टीम की रणनीति पर निर्भर करेगी। हमने अभी तक जो भी हासिल किया हैउसके लिए मैं बहुत ही आभारी हूं। ऐसा ही कुछ मेरी टीम का भी मानना है क्‍योंकि यह सब मिलना इतना आसान नहीं था। हमारे पास पहले से कुछ भी ऐसा बड़ा नहीं थानहीं ही किसी बड़े ऑर्गनाइजेशन का सहारा था। इसलिए मैं अपने आप को बहुत खुशनसीब मानता हूं जो यह स‍ब हासिल करने में सफल रहा। सबसे बड़ी बात ये है कि हमने साबित कर दिया है कि हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं। एक चीज जो मैंने अब तक सीखी हैवह यह है कि यदि आपने पूरी ईमानदारी के साथ किसी काम को किया है तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। दूसरी बात यह है कि इसमें नए प्‍लेयर्स के लिए भी काफी मौका है। हालांकि कुछ पुराने प्‍लेयर्स द्वारा बाधाएं उत्‍पन्‍न की जाएंगी लेकिन मीडिया पर किसी का एकाधिकार नहीं है। सभी चीजें मिलकर काम करती हैं और मेरा मानना है कि इन चीजों से मुझे काफी मदद मिली है और आज की तारीख मैं मैं पहले से ज्‍यादा मैच्‍योर हुआ हूं।

 


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