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रेवेन्यू बढ़ाने के लिए ‘प्रसार भारती’ के CEO कर रहे हैं ये प्रयास...

Published At: Tuesday, 21 August, 2018 Last Modified: Wednesday, 22 August, 2018

 रुहैल अमीन ।।

देश की पब्लिक ब्रॉडकास्ट कंपनी ‘प्रसार भारती’ के सीईओ का पदभार संभाले हुए शशि शेखर वेम्पती को एक साल से ज्‍यादा समय हो चुका है। अपने इस कार्यकाल में उनके द्वारा प्रसार भारती को एक नई दिशा देने का उनका प्रयास धीरे-धीरे रंग ला रहा है। वेम्‍पती का फोकस डिजिटल की ओर है और उनके नेतृत्‍व में प्रसार भारती में काफी बदलाव देखने को भी मिले हैं।

इस कार्यकाल के दौरान 'एक्‍सचेंज4मीडिया' (exchange4media) को दिए गए अपने दूसरे इंटरव्‍यू में वेम्‍पती ने अपनी तमाम योजनाओं पर चर्चा की और बताया कि कैसे वह प्रसार भारती को एक नई पहचान दिलाना चाहते हैं और इसे सफलता के नए दौर में ले जाना चाहते हैं।

प्रस्‍तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश :

प्रसार भारती के सीईओ का पद संभाले हुए आपको एक साल से अधिक समय हो चुका है। इस एक साल में आपका सबसे बड़ा फोकस किस चीज पर रहा और आप अपने मकसद में कितने सफल रहे हैं?

एक साल में मेरा सबसे ज्‍यादा फोकस प्रसार भारती में डिजिटल को बढ़ावा देने का रहा है और इस दिशा में हमने बहुत काम किया है। यही कारण है कि इन दिनों हमारे नेटवर्क में 37 से ज्‍यादा एक्टिव यूट्यूब चैनल हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब आप दूरदर्शन (DD) और ऑल इंडिया रेडियो (AIR) के कंटेंट को यूट्यूब पर विभिन्‍न भाषाओं में देख सकते हैं।

इसके अलावा हमारे पास 250 से ज्‍यादा एक्टिव ट्विटर हैंडल्‍स हैं, जहां पर आप विभिन्‍न भाषाओं में पूरे दिन के अपडेट हासिल कर सकते हैं। 'एआईआर न्‍यूज ऐप' (AIR News App) के नए वर्जन में भी हमने इन सब चीजों को शामिल किया है। इसके अलावा इस ऐप में एक और खास बात यह है कि आप इस पर विभिन्‍न विदेशी भाषाओं में भी न्‍यूज पढ़ सकते हैं। एक बात और आपको बता दूं कि 'बार्क इंडिया' (BARC India) के डाटा के अनुसार इस एक साल में हमारे कई प्रादेशिक चैनलों के प्रदर्शन में काफी सुधार हुआ है। हमारा ध्‍यान सिर्फ दिल्‍ली पर न होकर पूरे नेटवर्क में बदलाव करने पर है और इस बदलाव व प्रगति को देखकर मैं खुश हूं।

अपने कार्यकाल की तीन बड़ी चुनौतियां के बारे में बताएं ?

सबसे बड़ी चुनौती तो सांस्‍कृतिक बदलाव (cultural shift) की है, जो पूरे संस्‍थान में हो रहा है। यह पूरा बदलाव सिर्फ नेशनल चैनल पर नहीं हो रहा है बल्कि प्रादेशिक स्‍तर पर भी बदलाव हो रहे हैं। हमारे पास ऑल इंडिया रेडियो दरभंगा का ट्विटर हैंडल भी है। कोई भी यह उम्‍मीद नहीं कर सकता है कि दरभंगा जैसी जगह पर सोशल मीडिया की इतनी ज्‍यादा मौजूदगी हो सकती है। इसी तरह हमारे पास लेह लद्दाख में भी ट्विटर हैंडल है। ऐसे में आप कह सकते हैं कि सांस्‍कृतिक रूप से काफी बदलाव हो रहे हैं और यह प्रक्रिया जारी है।   

दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है कि चूंकि प्रसार भारती बहुत पुराना संगठन है। ऐसे में हमारे साथ बहुत बड़ी विरासत (legacy) का मुद्दा जुड़ा हुआ है, जिसे समय के साथ अब तार्किकता के मुद्दे पर देखने की जरूरत है। इस दिशा में भी काम चल रहा है।

तीसरी सबसे बड़ी चुनौती रेवेन्‍यू की है। हम अपने रेवेन्‍यू को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए हमने अपने रेवेन्‍यू ढांचे में भी कुछ बदलाव करने का प्रयास किया है। हमारे कुछ ऐसी कवरेज भी की हैं जो काफी खास हैं और प्राइवेट सेक्‍टर में किसी के पास उनकी उपलब्धता नहीं है, ऐसे में हम इसे लेकर भी कुछ प्लान कर रहे हैं। 

स्‍वतंत्रता दिवस की कवरेज के लिए आपने गूगल के साथ पार्टनरशिप की थी, इसके बारे में थोड़ा विस्‍तार से बताएं ?

दूरदर्शन के लिए स्‍वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस की कवरेज काफी खास होती है। इस दौरान दूरदर्शन की व्‍युअरशिप भी काफी बढ़ जाती है। ऐसे में इसे ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए हमने गूगल और यूट्यूब के साथ मिलकर काम किया। स्‍वतंत्रता दिवस की ही बात करें तो उस दिन गूगल ने इस कवरेज का सजीव प्रसारण किया था। इससे अपने आप ही व्‍युअरशिप काफी बढ़ गई। गूगल ने यह सब अभी करना शुरू किया है। उन्‍होंने अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में भी ऐसा ही किया था। इसके अलावा हमने अगले दिन प्रधानमंत्री के भाषण का प्रादेशिक भाषा में रेडियो नेटवर्क पर प्रसारण किया। इस अवसर पर हमने अपने नेटवर्क पर शंकर महादेवन के विशेष गाने का प्रसारण भी किया था।

जहां तक ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू की बात करें तो इस तरह के बड़े आयोजनों के लाइव प्रसारण शुरू होने से पहले काफी ऐडवर्टाइजर्स इसमें अपनी रुचि दिखाते हैं और रेवेन्‍यू बहुत बढ़ जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि व्‍युअरशिप और रेवेन्‍यू के मामले में यह हमारे लिए बहुत बड़ा और खास दिन रहा।   

निजी एफएम स्‍टेशनों पर ऑल इंडिया रेडियो की न्‍यूज के प्रसारण का मामला अभी नहीं सुलझ पा रहा है जबकि इससे प्रसार भारती को काफी रेवेन्‍यू मिल सकता है। आपको क्‍या लगता है, कब तक यह मामला सुलझ सकता है ?

इस बारे में पॉलिसी तो बनी हुई है लेकिन अभी इसमें कुछ बाधाएं हैं। इन बाधाओं को समझने के लिए हम फीडबैक का सहारा ले रहे हैं। वास्‍तव में हम इन बाधाओं को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि निजी एफएम चैनलों पर भी ऑल इंडिया रेडियो की न्‍यूज का प्रसारण हो सके। इसके लिए पायलट प्रोजेक्‍ट शुरू किया जाएगा और यदि यह सफल रहता है तो इसे लागू कर दिया जाएगा।

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नहीं, जिसका काम उसी को साजे। उनका कर्मक्षेत्र मीडिया ही है

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