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TV चैनलों को लेकर TRAI ने सूचना-प्रसारण मंत्रालय को दिए ये सुझाव...

Published At: Thursday, 28 June, 2018 Last Modified: Wednesday, 27 June, 2018

समाचार4मीडिया ।।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने देश में टेलिविजन चैनलों के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग को लेकर अपनी सिफारिशें जारी कर दी हैं।

इस बारे में सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने 21 अगस्‍त 2017 को ट्राई को पत्र भेजा था। इसमें कहा गया था कि अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग को लेकर वर्तमान गाइडलाइंस पांच दिसंबर 2011 को लागू की गई थीं, जो पांच साल से ज्‍यादा पुरानी हो चुकी हैं।

इन वर्षों में टेक्‍नोलॉजी और मार्केट की स्थिति काफी बदल चुकी है, यह देखते हुए और पिछले अनुभवों से सबक लेते हुए एमआईबी का मानना था कि ब्रॉडकास्टिंग सेक्‍टर की ग्रोथ के लिए इन गाइडलाइंस में आवश्‍यक संशोधन होने चाहिए। एमआईबी ने विभिन्‍न मुद्दों पर ट्राई से सिफारिशें जारी करने को कहा था।

इस पर ट्राई ने 19 दिसंबर 2017 को 'Issues relating to Uplinking and Downlinking of Television Channels in India' विषय पर एक कंसल्‍टेशन पेपर जारी कर विभिन्‍न शेयरधारकों से सुझाव मांगे थे। इस बारे में सुझाव देने की अंतिम तारीख 31 जनवरी 2018 रखी गई थी। इस पर प्रत्‍युत्‍तर देने के लिए 10 फरवरी 2018 की तारीख नियत की गई थी।   

इस पर ट्राई को 38 सुझाव और एक प्रत्‍युत्‍तर मिला था। ये सभी ट्राई की वेबसाइट पर पोस्‍ट किए गए थे। इसके बाद दिल्‍ली में 11 अप्रैल 2018 को एक खुली परिचर्चा का आयोजन किया गया था। सभी शेयरधारकों की राय जानने के बाद ट्राई ने सिफारिशों को अंतिम रूप दिया था।

आइए, जानते हैं कि ट्राई ने किन सिफारिशों को जारी किया है-

1- सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग संबंधी सिफारिशें

: 'न्‍यूज एंड करेंट अफेयर्स टीवी चैनल्‍स' और 'नॉन-न्‍यूज एंड करेंट अफेयर्स टीवी चैनलों' की परिभाषा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह 5 दिसंबर 2011 को जारी अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलांस के अनुसार ही रहेंगी।   

: टीवी चैनलों द्वारा अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग की अनुमति मांगने वाली कंपनी के लिए निर्धारित न्‍यूनतम तय राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

: टीवी चैनलों को अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग की अनुमति के लिए नीलामी की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी।

: टीवी चैनलों को अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग की अनुमति उसी तरह दी जाएगी जैसे अब दी जाती है।   

: ब्रॉडकास्टिंग सेक्‍टर में बिजनेस करना और आसान बनाने के लिए ट्राई ने 26 फरवरी 2018 को अपनी सिफारिशों को दोहराते हुए सरकार के पास एक पत्र भेजा था, जिसमें टीवी चैनलों के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग के लिए अनुमति देने की मौजूदा प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए कई उपायों की सिफारिश की गई थी।

: अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग की अनुमति के लिए अनुमति शुल्‍क और प्रवेश शुल्‍क में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है।

: अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग की अनुमति के लिए वार्षिक लाइसेंस शुल्‍क इस प्रकार रहेगा।

- भारतीय टीवी चैनल की अपलिंकिंग के लिए तीन लाख रुपए वार्षिक 

- भारत से किसी टीवी चैनल की डाउनलिंकिंग के लिए साढ़े सात लाख रुपए प्रतिवर्ष

- विदेश से किसी टीवी चैनल की डाउनलिंकिंग के लिए साढ़े 22 लाख रुपए

: फ्री टू एयर (FTA) चैनलों की इनक्रिप्‍शन को आवश्‍यक नहीं बनाना चाहिए बल्कि यह एफटीए चैनल उपलब्‍ध करा रहे ब्रॉडकास्‍टर्स के ऊपर छोड़ देना चाहिए।

: द अलग-अलग कंपनियों के बीच ट्रांसफर की अनुमति को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। यदि कंपनी एक्‍ट 2013 के अनुसार कोई अधिग्रहण होता है अथवा यदि कानून के अनुसार किसी ट्रांसफर को अनुमति मिलती भी है तो उसमें तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। टीवी चैनल के इसके सहयोगी अथवा होल्डिंग कंपनी में ट्रांसफर अथवा होल्डिंग कंपनी की सहयोगी कंपनी में ट्रांसफर को अनुमति दी जानी चाहिए।    

: ऐसे चैनलों को ट्रांसफर की अनुमति देने के मामले में चैनल के काम शुरू करने के एक साल तक का समय फिक्‍स करना चाहिए। इस अवधि में ट्रांसफर नहीं किया जाना चाहिए।

2- टेलिपोर्ट्स संबंधी मामले

: टेलिपोर्ट के लिए एकमुश्‍त दिए जाने वाले प्रोसेसिंग शुल्‍क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।  

: टेलिपोर्ट लगाने के लिए किसी तरह की एंट्री फीस नहीं रखी गई है।

: प्रत्‍येक एंटीना के लिए वार्षिक लाइसेंस शुल्‍क तीन लाख रुपए रखा जाना चाहिए।

: भारत में टेलिपोर्ट की संख्‍या पर किसी भी तरह सीमित करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

: टेलिपोर्ट्स की लोकेशन टेलिपोर्ट ऑपरेटर्स के लिए खाली छोड़ देनी चाहिए।

 

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हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

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