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मार्केट में आया एक और हास्य उपन्यास, देखें विमोचन की झलिकियां...

Tuesday, 12 June, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।


एक पत्रकार से पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर रहे वेद माथुर का हास्य उपन्यास बैंक ऑफ़ पोलमपुर ने मार्केट में दस्तक दे दी है। विमोचन समरोह बीते गुरुवार को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता थे, जबकि पैनलिस्ट में लोकप्रिय व्यंग्यकार आलोक पुराणिक और शारदा यूनिवर्सिटी के डीन प्रमोद मित्रा शामिल रहे। 


कार्यक्रम के दौरान वेद माथुर ने कहा कि भारतीय बैंकों की हालत सुधारने के लिए विल फुल डिफाल्टर्स को त्वरित न्यायिक निर्णय द्वारा जेल का प्रावधान होना चाहिए, ताकि ये डिफाल्टर्स वसूली के लिए मजबूर हो सकें। उन्होंने कहा कि बैंकों की खस्ता हालत के लिए राजनीतिज्ञों और ब्यूरोक्रेट्स के इशारे पर काम करने और बाद में उनसे लाभ लेने वाले बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी और धीमी गति से चलने वाली न्यायिक व्यवस्था भी जिम्मेदार है।


माथुर ने विभिन्न सवाल उठाते हुए कहा कि बैंकों के बड़े डिफाल्टर्स में से अधिकांश इरादतन हैं और वे लचर व्यवस्था का लाभ लेकर धोखाधड़ी के बावजूद ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे हैं, जबकि बैंक अपना घाटा पूरा करने के लिए आम आदमी व व्यापारी से उनके आवास, शिक्षा और स्वरोजगार ऋण में ब्याज वसूल रहे हैं। माथुर ने कहा कि बैंकों में जोखिम प्रबंधन प्रणाली के नवीकरण और शीर्ष पर होने वाली नियुक्तियों में पारदर्शिता आवश्यक है। 


वहीं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने कहा कि बैंकों में डूबते ऋण और धोखाधड़ी से समूची अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा है। इन पर निगरानी के लिए तटस्थ, अनुभवी और शक्ति संपन्न बोर्ड की आवश्यकता है।


समारोह में व्यंग्यकार आलोक पुराणिक और शारदा यूनिवर्सिटी के डीन प्रमोद मित्रा ने कहा कि वेद माथुर ने हास्य-व्यंग्य के माध्यम से भारतीय बैंकिंग के सभी रोगों को उजागर किया है। अब उपचार सरकार और बैंकों के निदेशक मंडल को करना है।


गौरतलब है कि करीब 40 वर्षों तक बैंकिंग क्षेत्र में अपनी सेंवाए देने के बाद वेद माथुर हाल ही में पंजाब नेशनल बैंक के जनरल मैनेजर के पद से रिटायर हुए हैं। उन्होंने अजमेर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र दैनिक न्याय से अपना करियर शुरू किया था और फिर बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ गए थे। लेकिन इसके बावजूद भी पत्रकारिता से पूरी तरह अलग नहीं हुए, बल्कि कई पत्र-पत्रिकाओं के लिए लिखते रहे। उनके सैकड़ों व्यंग्यात्मक व अन्य लेख, कविताएं आदि समय-समय पर शीर्ष पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहीं। दैनिक न्याय में तो उनका चकरमनाम से व्यंग्य पर आधारित कॉलम वर्षों तक प्रकाशित हुआ। इसके अतिरिक्त दैनिक भास्कर के अजमेर संस्करण में भी उनका बारादरी कॉलम कई वर्षों तक प्रकाशित हुआ, जो सामाजिक मुद्दों पर आधारित था। प्रिंट मीडिया के अलावा वे आकाशवाणी और विजुअल मीडिया से भी जुड़े रहे। उनकी दो किताबें सामने हैं सफलताऔर Mantras to Success प्रकाशित हो चुकीं हैं।


यहां देखें विमोचन की तस्वीरें-














 

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