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फेक न्यूज फैलाने वाले हो जाएं सावधान!

Wednesday, 29 November, 2017

समाचार4मीडियो ब्यूरो ।।

फेक न्यूजयानी फर्जी खबर यह शब्द इस साल इतना चर्चा में रहा कि इसे कॉलिन्स डिक्शनरी ने वर्ड ऑफ द ईयर 2017’ घोषित कर दिया। लेकिन अब यही शब्द आपके लिए मुसीबत की वजह भी बन सकता है, यदि आप अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ फर्जी खबर या फिर झूठी कहानियां गढ़ते हैं तो। फेक न्यूज यानी फर्जी खबरों को लेकर एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि आप अपने प्रतिद्वंद्वियों को बदनाम करने के लिए इस तरह की हरकत करते पकड़े जाते हैं तो यह न केवल आपको बदनाम कर सकती है, बल्कि आपकी साख को भी नुकसान पहुंचा सकती है।   

जर्नल ऑफ बिजनेस एथिक्स में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि कंपनियां जो अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ फर्जी खबरें फैलाती हैं, उन्हें अंतत: नकारात्मक प्रचार का अनुभव करना पड़ता है और उनकी साख को नुकसान पहुंचता है। कान्सास स्टेट यूनिवर्सिटी में मार्केटिंग के सहायक प्रोफेसर सुंघा जंग 'अल्टीमेटली द ट्रथ प्रीवेल्स' अध्ययन के सह-लेखक हैं।

कान्सास स्टेट यूनिवर्सिटी में मार्केटिंग के सहायक प्रोफेसर सुंघा जंग 'अल्टीमेटली द ट्रथ प्रीवेल्स' अध्ययन के सह-लेखक हैं। शोधकर्ताओं ने 2012 में दक्षिण कोरिया में घटित एक वास्तविक मामले का विश्लेषण किया। जहां एक ग्राहक को कथित तौर पर देश के सबसे लोकप्रिय बेकरी ब्रैंड्स में से एक द्वारा बनाई गई पाव रोटी में एक मृत चूहा मिला था, जिसके बाद कंपनी का व्यापार अचानक से गिर गया और तब तक नहीं उठा, जब एक संवाददाता ने यह पता नहीं लगा लिया कि यह फर्जी खबर बेकरी के एक प्रतिद्वंदी ने चलवाई थी।

मामला सबके सामने आने के बाद अचानक, आरोप झेल रही कंपनी को मीडिया और ऑनलाइन में फिर से वहीं स्थान मिल गया। शोधकर्ताओं ने 3 साल के ब्लॉग पोस्ट, समाचार लेख और सोशल मीडिया एक्सचेंजों की जांच की और आंकलन किया कि प्रत्येक कंपनी के संदर्भ में कितने सकारात्मक और नकारात्मक शब्द इस्तेमाल किए गए थे।

उन्होंने पाया कि फर्जी खबरों ने पीड़ित कंपनी को पहले नुकसान पहुंचाया, लेकिन इसने उस फर्म को बहुत अधिक मात्रा में और स्थाई नुकसान पहुंचाया, जिसने यह झूठी खबर मूल रूप से गढ़ी थी। फर्जी खबरों से पीड़ित कंपनी को एक साल तक नुकसान हुआ, जबकि अपराधी कंपनी को 2 साल से अधिक समय तक इसका प्रभाव झेलना पड़ा।

व्यवसाय के लिए इस तरह के हथकंडों का अभ्यास करने वालों को शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि तकनीक के लिए फर्जी खबरों का पता लगाना और अधिक सटीक होता जा रहा है।

जंग ने कहा, ‘फेसबुक, गूगल और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कृत्रिम फर्जी खबरों का पता लगाने के लिए प्रणाली का निर्माण कर रहे हैं, जिसका मतलब है कि फर्जी खबरों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा। 


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पोल

क्या इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा का क्रिकेट की दुनिया में जाना सही है?

हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

नहीं, जिसका काम उसी को साजे। उनका कर्मक्षेत्र मीडिया ही है

बड़े लोगों की बातें, बड़े ही जाने, हम तो सिर्फ चुप्पी साधे

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